गुरूद्वारे में लंगरों पर भी पड़ी GST की मार

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व्यापारी वर्ग व गृहणियों के अलावा अब गुरुद्वारों के लोकप्रिय रसोईघर को भी GST की मार सहनी पड़ रही है। इसी कड़ी में नकद समृद्ध शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने दावा किया है कि उन्होंने 1 जुलाई 2017 से 31 जनवरी 2018 तक लंगर में आवश्यक विभिन्न वस्तुओं की खरीद पर बतौर GST करीब 2 करोड़ का भुगतान किया है। इससे लंगर सेवा पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। एसजीपीसी के अनुसार GST गुरुद्वारों में सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों पर 10 करोड़ रुपये से ज्यादा का बोझ डाल रहा है।

SGPC के प्रवक्ता दिलजीत सिंह बेदी ने कहा कि द गोल्डन टेंपल कॉम्प्लेक्स की ओर से विशेष पर्वों, त्योहारों, उत्सवों पर 100,000 से ज्यादा लोगों को मुफ्त भोजन प्रदान कराया जाता है। इसके अलावा 50,000 से अधिक स्वयंसेवक गुरूद्वारा परिसर में विभिन्न देशों से आए अलग अलग धर्मों, संस्कृतियों, जातियों के लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा करते हैं।

SGPC गुरूद्वारों में लंगर के लिए लाखों टन गेहूं का आटा, देसी घी, दाल, सब्जियां, दूध, चीनी और चावल की खरीद पर हर साल करीब 75 करोड़ खर्च करती है। साथ ही इन वस्तुओं की खरीद पर 10 करोड़ GST का मार भी सहनी पड़ रही है।

इससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। SGPC ने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरुण जेटली और GST परिषद को पत्र लिखा, जिसमें लंगर के लिए कच्चे माल की खरीद पर जीएसटी छूट की मांग की है और कहा गया है कि जीएसटी केवल उन उत्पादों पर लगाया जाता है, जो कि बेचे जाते हैं। जबकि गुरूद्वारों में खाना मुफ्त वितरित किया जाता है, इसलिए जीएसटी लगाने का कोई सवाल ही नहीं है। SGPC ने सरकार से मांग की है कि लंगर में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुओं को जीसएटी स्लैब से बाहर किया जाए।

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