हैफेड कर रहा है घपला, हरियाणा के बाहर से मंगवाया जा रहा है सरसों

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Rampal Fauji, Yuva Haryana

Haryana, 06-05-2018

नांगल चौधरी में सरसों बिक्री का सबसे अधिक फायदा व्यापारी वर्ग व राजस्थान के उन किसानों को मिल रहा है, जिनकी यहां रिश्तेदारी है।

स्थानीय जान पहचान वाले किसानों द्वारा कागजात उपलब्ध करवाने पर उसे 100 रुपये प्रति किवंटल का लालच दिया जा रहा है। पूरा खेल हैफेड खरीद कर्मियों की सांठगांठ से हो रहा है।

इस खेल में वे किसान शामिल हैं, जिनके खेत बंजर पड़े थे। सूत्रों की मानें तो पिछले पांच दिनों से किसानों की कम व व्यापारी और राजस्थान के किसानों की सरसों अधिक बिक रही है। जिस गांव का शेडयूल होता है, व्यापारी व किसान उसी गांव के किसानों से सांठ- गांठ बैठाना शुरू कर देते हैं।

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। बाजरे की फसल बिक्री के दौरान भी ऐसा ही हुआ था। मामला उजागर होने के बाद खरीद प्रक्रिया बंद कर दी गई थी, लेकिन वही खेल अब मंडी में फिर से चल रहा है।

जिन गांवों में पीने तक का पानी नसीब नहीं है, वहां के किसान भी बंपर पैदावार के मुताबिक सरसों की ब्रिकी कर रहे हैं। यह माल कहां से आ रहा है किसान पूछने पर बताने को तैयार नहीं है।

ना ही उन व्यपारियो पर कोई कार्यवाही हो रही। जो सरेआम ट्रेक्टर ट्राली भर कर आते है मीडिया के सवाल पर हैफेड के अधिकारियों का एक ही बयान है, हम कागज देख कर ले रहे हैं।

आखिर इन व्यपारियों को कौन पटवारी व तहसीलदार है, जो गिरदावरी करके दे रहा है। उस जगह और उस गांव की जिसको सरकार ने सूखा घोषित कर रखा। उस क्षेत्र के किसान बार-बार सूखे के मुआवजे की मांग करते आ रहे, उसके बाद भी कागजो में वहां बंपर पैदावार दिखाई जा रही है ।

 

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