दिल में था जज्बा तो जूडो कराटे में हासिल किया ये मुकाम, विकलांगता ने भी मान ली हार

खेल हरियाणा

अपने सपनों को टूटने न देना, अपने सपनों को बिखरने मत देना।
है अगर जज्बा कुछ कर दिखाने का, तो न मानना कभी हार कहीं बाद में पछताओ, तुम मेरे यार।

रेवाड़ी के गांव भालकी में रहने वाले एक मूक बधिर बालक ने ये साबित कर दिया है कि अगर कुछ करने का हौसला हो, तो कोई परेशानी हमे अपनी मंज़िल को पाने से नही रोक सकती।

चौथी क्लास में पढ़ने वाला 6 वर्षीय पारस बचपन से ही मूक बधिर है। पारस ने 1 फरवरी से 5 फरवरी तक लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय स्तर जूडो कराटे प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया है।

पारस ने अपने माता पिता का ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा का नाम भी रोशन किया है। पारस ने यह प्रतियोगिता सब जूनियर कैटेगरी के 30 किलोग्राम वजन में छठे दौरे में जीती है। प्रतियोगिता में जीत हासिल करने के बाद पारस के गांव भालकी में पहुंचने पर ग्रामीणों ने उसका जोर-शोर से स्वागत किया।

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