कूड़ा भी बीना, जूते भी पोलिश किए, कबाड़ी का काम भी किया और अब बन बैठा बाबूजी

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सपने तो सभी देखते है लेकिन बहुत कम लोग उन्हें पूरे करने की चाहत रखते हैं। कहते है कि जिंदगी में न तो कोई काम छोटा होता है और न कोई बड़ा। अपनी मेहनत और लगन से किया गया कोई भी काम निराशा नहीं देता।

भिवानी में झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले 30 वर्षीय ब्रिजेश कुमार कभी कोर्ट में बाबुओं के जूतों को चमकाता था। अपनी आखों में वकालत करने की चमक लिए बैठता था और अब अपने सपनों को पूरा कर दिखाया है।

ब्रिजेश कुमार अपने पिता का घर खर्च में हाथ बंटाता था और साथ में शिक्षा भी ग्रहण करता रहा। यही नहीं भिवानी कोर्ट में भी ब्रिजेश जूते पोलिश करता, जिसके बदले में महज 2 रूपये मिलते थे।

लेकिन पारिवारिक स्थिति खराब होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी और साथ में अपनी शिक्षा भी ग्रहण करता रहा। इसी मेहनत और लगन की बदौलत आज ब्रिजेश वकील बन गया।

ब्रिजेश ने खुशी जताते हुए कहा कि इस पद तक पहुंचने के लिए उसके पिता सुदेश कुमार और गुरू का बड़ा योगदान रहा है, जिन्होंने उसकी शिक्षा-दीक्षा में पूरा योगदान किया। ब्रिजेश ने BA, MA English, LLB की शिक्षा प्राप्त की और अब वे कोर्ट में वकालत करेंगे और हर वर्ग को सच्चाई और ईमानदारी के साथ न्याय दिलाएंगे।

जिस कोर्ट में वकीलों के जूतों को पोलिश करते थे आज उसी कोर्ट में वकालत करेंगे। इस बात से वे काफी खुश है और गर्व महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि उसके पिता ने अब तक घर भी नहीं बनाया, सब शिक्षा पर खर्च किया और आज भी उसका परिवार झोपड़ी में ही रहता है।

ब्रिजेश ने कहा कि वे 7 भाई-बहन हैं और हरियाणा-पंजाब सहित अनेक प्रदेशों में उनके समाज में वो ही सबसे ज्यादा पढ़ा लिखा है। ब्रिजेश ने कहा कि वो अब अपने आगे आने वाली पीढ़ी को खूब पढ़ाएगा।

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