Home Breaking 28 फरवरी को आएगा हरियाणा बजट किसान और किसानी पर रहेगी ‘मेहरबानी’

28 फरवरी को आएगा हरियाणा बजट किसान और किसानी पर रहेगी ‘मेहरबानी’

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Yuva Haryana, Chnadigarh

28 फरवरी को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल बतौर वित्त मंत्री अपना पहला बजट पेश करेंगे। प्रश्नकाल के बाद 12 बजे सीएम मनोहर लाल 2020-21 का बजट पेश करेंगे। 2 व 3 मार्च को बजट पर चर्चा होगी। 3 मार्च को ही सीएम जवाब देंगे। हरियाणा सरकार का बजट फोकस इस बार किसान और किसानी पर ही केंद्रित रहेगा,ताकि निर्धारित वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जा सके। इसके लिए किसान संबंधी मौजूदा योजनाओं को जहां सरकार और आर्थिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाएगी, वहीं किसानों के लिए भविष्य में कुछ नई योजनाएं भी लांच की जाएंगी।

इसकी झलक विधानसभा अधिवेशन के पहले दिन राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के अभिभाषण में स्पष्ट दिखाई दी। इस अभिभाषण से ये भी साफ हो गया है कि 28 फरवरी को पेश होने वाले हरियाणा सरकार के बजट के मुख्य केंद्र बिंदु में किसान और बागवान ही रहने वाले हैं। विधानसभा में राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में ये बताया कि किस तरह किसानों की आय बढ़ाने व कृषि क्षेत्र को और समृद्ध बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार काम कर रही है। इस दिशा में सरकार ने जिन लक्ष्यों को पूरा कर लिया है और जो नए लक्ष्य तय किए हैं, उनकी विस्तार से जानकारी राज्यपाल ने सदन में सदस्यों के समक्ष पेश की। केंद्र सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का टारगेट रखा है। इसी टारगेट को अपनाते हुए हरियाणा सरकार भी काम कर रही है। प्रदेश में भाजपा की मनोहर सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में ही इसी टारगेट को लेकर एक्सरसाइज शुरू कर दी थी। अब मौजूदा भाजपा-जजपा गठबंधन सरकार भी इसी लक्ष्य प्राप्ति को लेकर प्रतिबद्धता से आगे बढऩा चाहती है।

चूंकि ये वर्ष 2022 इसी गठबंधन सरकार के कार्यकाल में ही आना है,इसलिए आय दोगुनी को लेकर किसानों के प्रति जवाबदेही भी इसी गठबंधन सरकार की होगी। सरकार यदि लक्ष्य प्राप्ति में कामयाब रही, तो वर्ष 2024 के विधानसभा में ये बड़ा मुद्दा भी बनेगा। इसी के मद्देनजर गठबंधन सरकार ने इस बजट सत्र में अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए किए जाने वाले प्रयासों को और आर्थिक मजबूती देने का निर्णय लिया है।

इन लक्ष्यों को बजट में मिलेगी और आर्थिक मजबूती
– गेहूं व धान के अतिरिक्त सूबे के किसानों की सूरजमुखी,बाजरा व अन्य तिलहनी फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद और तिलहन उत्पादन को प्रोत्साहन करना
– खरीद में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित हो, इसके लिए किसान पंजीकरण पोर्टल पर सभी किसानों को पंजीकृत करना, ताकि फसल औने-पौने दाम पर न बिके
– बागवानी की मुख्य फसलों के लाभकारी मूल्य केा सुनिश्िचित करना, इसके लिए शुरू भावांतर भरपाई योजना में अब 12 नई सब्जियों व फलों को शामिल करना
– ग्रेडिंग, सोर्टिंग, पैकिंग, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, भंडारण व फलों और सब्जियों के रेफ्रिजरेटिड ट्रांसपोर्ट के लिए इंटिग्रेटिड पैक हाउसिज स्थापित होंगे, 3 बन चुके, 181.72 करोड़ से 52 और बनेंगे
– किसानों की आय बढ़ाने के लिए सामूहिक इनपुट मैनेजमेंट, उपज संग्रह, कृषि व्यापार गतिविधियों के प्रबंधन को बढ़ावा के लिए वर्ष 2022 तक 1 हजार ‘किसान उत्पादक संगठनÓ बनाए जाएंगे।
– रसायनिक खादों के उचित उपयोग के लिए किसानों को 81.69 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी हो चुके। अब मंडियों व सबयार्ड में 111 मृदा जांच प्रयोगशालाएं खोली जांएगी।
– सोनीपत के सेरसा गांव में मसाला मंडी, पंचकूला के पिंजौर में सेब मंडी व गुरुग्राम में फूल मंडी विकसित होगी
– फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 1672 कस्टम हायरिंग सेंटर बन चुके हैं। संख्या और बढ़ेगी
– किसानों के लिए एकमुश्त ऋण ब्याज माफी शुरू हो चुकी है, इसमें किसानों को और राहत मिलेगी।
– किसानों के पशुधन को उच्चकोटि की पशु स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएगी। सभी पशुओं का बीमा होगा, कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम को बढ़ावा मिलेगा

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