हरियाणा कैबिनेट की बैठक में क्या- क्या लिये गए अहम निर्णय, पढ़िए विस्तार से-

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Yuva Haryana

Chandigarh, 25 June, 2019

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा  शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन नियम 1976 के नियम 13 में संशोधन को स्वीकृति प्रदान की गई।

संशोधन के अनुसार, डिफॉल्ट अवधि के लिए प्रस्तावित नवीकरण लाइसैंस फीस पर लागू दर पर साधारण ब्याज, यदि प्रभार्य योग्य है, लिया जाएगा।  संशोधन का उद्देश्य एकीकृत कॉलोनियों पर समान सिद्धांत का विस्तार करना है और इस तरह इसे 7 मार्च, 1976 से पूर्वप्रभावी करने की संभावना है।

बैठक में हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत प्रदान किए गए लाइसेंसों के क्षेत्र मानदंडों में संशोधन करने और दीन दयाल जन आवास योजना के विस्तार को स्वीकृति प्रदान की गई।

आवासीय प्लॉटिड कॉलोनी के लिए संशोधित न्यूनतम क्षेत्र मानदंड हाइपर जोन के लिए 25, उच्च के लिए 20, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 हैं। इससे पहले, यह हाइपर एवं उच्च के लिए प्रत्येक 100-100, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 था। आवासीय समूह आवास के लिए क्षेत्र मानदंड को हाइपर जोन के लिए 5, उच्च के लिए 4, मध्यम के लिए दो और निम्र के लिए एक संशोधित किया गया है। इससे पहले, यह हाइपर एवं उच्च के लिए 10-10, मध्यम के लिए दो और निम्र के लिए एक था।

औद्योगिक प्लॉटिड कॉलोनी के लिए क्षेत्र मानदंड को हाइपर जोन के लिए 25, उच्च के लिए 20, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 तक संशोधित किया गया है। इससे पूर्व, यह हाइपर और उच्च जोन के लिए 50-50, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 था।

एकीकृत औद्योगिक लाइसेंसिंग नीति के लिए क्षेत्र मानदंडों को हाइपर जोन के लिए 25, उच्च के लिए 20, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 तक संशोधित किया गया है। इससे पहले, यह हाइपर जोन एवं उच्च के लिए 50-50, मध्यम के लिए 25 और निम्र के लिए 15 था।
नई एकीकृत लाइसेंसिंग नीति के क्षेत्र मानदंड हाइपर जोन के लिए 15, उच्च के लिए 10, मध्यम के लिए 5 और निम्न के लिए 2 तक संशोधित किए गए हैं। इससे पहले, ये हाइपर एवं उच्च के लिए 25-25, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 था।

कम घनत्व की पर्यावरण अनुकूल कॉलोनी के लिए क्षेत्र मानदंड हाइपर जोन एवं उच्च  के लिए 25-25, मध्यम के लिए 15 और निम्र के लिए 10 तक संशोधित किये गये हैं। इससे पहले, यह हाइपर, उच्च, मध्यम और निम्न के लिए 100-100 थे।
दीन दयाल जन आवास योजना के लिए क्षेत्र मानदंडों को संशोधित करते हुए हाइपर जोन के लिए 10 और उच्च, मध्यम एवं निम्न के लिए पांच-पांच किया गया है जबकि पहले, उच्च, मध्यम एवं निम्न के लिए यह पांच-पांच था।

किफायती समूह आवा, वाणिज्यिक, साइबर पार्क और साइबर सिटी के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानदंडों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
हितधारकों और आम जनता से आपत्तियों/सुझावों को आमंत्रित करने के लिए संशोधित मानदंडों/मापदंडों को सार्वजनिक डोमेन में 30 दिनों के लिए रखा जाएगा, जिन्हें नीति को अंतिम रूप देने के लिए संज्ञान में लिया जाएगा।

मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हरियाणा गौवंश संरक्षण और गौसंवर्धन अधिनियम, 2015 को और अधिक सख्त एवं व्यावहारिक बनाने के लिए संशोधित किया गया। नए विधेयक को हरियाणा गौवंश संरक्षण और गौसंवर्धन (संशोधन) विधेयक, 2019 कहा जाएगा।

संशोधन के अनुसार, कोई भी पुलिस अधिकारी, जो उप-निरीक्षक के पद से नीचे का नहीं होगा या सरकार की ओर से अधिकृत कोई भी व्यक्ति इस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने या इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुपालन होने बारे स्वयं को संतुष्ट करने के मद्देनजर ऐसे किसी भी वाहन में प्रवेश कर सकता है, रोक सकता है या जांच कर सकता है, जिनका गायों या गोमांस के निर्यात के लिए उपयोग किया जाना है या उपयोग किया जा सकता है।

वह ऐसी गाय या गोमांस और उस वाहन, जिसमें ऐसी गाय या गोमांस पाया जाता है, को जब्त कर सकता है, जिसके बारे में उसे संदेह है कि इस अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन हुआ है या उल्लंघन होने वाला है और उसके बाद अदालत में इस प्रकार जब्त की गई गाय या गोमांस को सुरक्षित रूप से प्रस्तुत करने और उनकी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।

वह ऐसे किसी भी परिसर में प्रवेश या जांच कर सकता है जिसका गौ वध के लिए इस्तेमाल हो रहा है या इस्तेमाल होने की संभावना है और गाय या गोमांस को जब्त करने के साथ-साथ मौके से गौ वध और गाय या गोमांस के निर्यात से संबंधित गतिविधियों के संबंध में इस्तेमाल किए गए या इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण एवं दस्तावेज जैसे साक्ष्य एकत्र कर सकता है। इस अधिनियम के तहत तलाशी या जब्ती के लिए, आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 100 के प्रावधान, जो तलाशी से संबंधित हैं, लागू होंगे।

पुलिस अधिकारी, जो उप-निरीक्षक के पद से नीचे का नहीं होगा या इसके लिए सरकार की ओर से अधिकृत व्यक्ति द्वारा जब भी इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध किया जाता है तो इस तरह के अपराध के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी वाहन को जब्त किया जा सकता है। इस अधिनियम के तहत कोई भी दण्डनीय अपराध किए जाने के संबंध में किसी भी वाहन को जब्त किया जाता है, तो जब्त करने वाले व्यक्ति को बिना किसी देरी के सक्षम अधिकारी को उसके बारे में एक रिपोर्ट करनी होगी और सक्षम अधिकारी जिस क्षेत्र में उक्त वाहन को जब्त किया गया था, उस क्षेत्र पर अधिकार क्षेत्र होने पर, यदि संतुष्ट हो कि उक्त वाहन इस अधिनियम के तहत अपराध के लिए इस्तेमाल किया गया था, तो उक्त वाहन को जब्त करने का आदेश देगा। बशर्ते कि ऐसे वाहन को जब्त करने का आदेश देने से पहले उक्त वाहन के मालिक को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाएगा।

बैठक में कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय, हरियाणा, ग्रुप डी (फील्ड स्टाफ), सेवा नियम, 2019, ग्रुप डी (मुख्यालय) और कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय, हरियाणा, ‘निदेशालय  लिपिकीय’, ग्रुप बी, सेवा नियम, 2019 तैयार करने को स्वीकृति प्रदान की गई।

इन नियमों को हरियाणा ग्रुप डी कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें), अधिनियम, 2018 के साथ संरेखित किया गया है जिससे विभागों में आयु, शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की विधि समान रूप से लागू होगी।

यह इस लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल निदेशालय को वर्ष 2007 में स्वास्थ्य विभाग से अलग करके बनाया गया था। तब से तत्कालीन स्वास्थ्य विभाग के सेवा नियम ही नवगठित विभाग के कर्मचारियों पर लागू थे। ईएसआई विभाग गु्रप सी और ग्रुप ए कर्मचारियों के लिए सेवा नियम बनाने के अंतिम चरण में है।

बैठक में प्रबंधन प्रशिक्षु / प्रबंधक (विपणन) के दो पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से अपने स्तर पर और अपनी आवश्यकतानुसार भरने के हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं आधारभूत संरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई ताकि व्यावसायिक योग्यता एवं  युवा ऊर्जावान पेशेवरों की आवश्यकता को पूरा किया जा सके।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक चयन कमेटी गठित की गई है और एचएसआईआईडीसी के चेयरमैन, एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के निदेशक इसके सदस्य होंगे।
प्रबंधन प्रशिक्षु/प्रबंधक (विपणन) के पद के लिए अनुभव एवं शैक्षणिक योग्यता एमबीए (मार्केटिंग)/समकक्ष है।

बैठक में प्रदेश में किफायती आवास के प्रोत्साहन हेतु दूरगामी प्रभाव वाले कई निर्णय लिए गए। हालांकि, किसी सेक्टर में किफायती समूह आवास कालोनी के लिए कुल सीमा मौजूदा 15 एकड़ से बढ़ाकर अब 30 एकड़ की गई है तो दीन दयाल जन आवास योजना, जोकि एक किफायती प्लॉटेड आवास नीति है, का दायरा अब गुरुग्राम विकास योजना तक बढ़ाया गया है।

इसके अतिरिक्त, उच्च भूमि लागत और बड़े पैमाने पर भूमि संग्रह के दृष्टिïगत लाइसेंस प्रदान करने के लिए न्यूनतम क्षेत्र मानकों में कमी की गई है।

मंत्रिमंडल द्वारा हस्तांतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) जारी करने के लिए भी एक नीति को स्वीकृति प्रदान की गई जिसके माध्यम से अवसंरचना तथा जनसुविधाओं के निर्माण हेतु भूमि संग्रह आसान हो जाएगा। नया भूमि अधिग्रहण अधिनियम लागू हो जाने के बाद भूमि खरीद में मौजूदा बाधाओं के कारण आद्योपान्त अवसंरचना का प्रावधान सुनिश्चत करना अत्यधिक कठिन हो गया है। इस टीडीआर पॉलिसी से इस प्रक्रिया में सरलता आएगी।

मंत्रिमंडल द्वारा गुरुग्राम में कमर्शियल प्लाटेड कालोनी पॉलिसी के विस्तार को भी स्वीकृति प्रदान की गई जिससे वाणिज्यिक विकास में अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध होने की संभावना है। मंत्रिमंडल द्वारा एनआईएलपी कालोनियों पर टीओडी पॉलिसी की प्रासंगिकता सुनिश्चित करने और इस प्रक्रिया में क्रियान्वयन मुद्दों के समाधान हेतु एनआईएलपी पॉलिसी को स्पष्टï करने की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

मंत्रिमंडल की बैठक में पांच जातियों 1. जोगी, जंगम, जोगी नाथ, 2. मनियार, 3. भाट, 4. रहबारी और 5. मदारी (हिन्दू) को घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में शामिल करने का निर्णय लिया गया तथा विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में कुछ जातियों के मूल नामों के साथ कुछ पर्यायवाची शब्द जोडऩे का निर्णय लिया ताकि इन जातियों के व्यक्तियों को सरकार द्वारा परिपालित स्कीमों का लाभ दिया जा सके ।

इन जातियों को विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में शामिल करने की पुरानी मांग थी जिसे आज कैबिनेट ने मंजूरी दी है । अब से पहले राज्य की विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों की सूची में 24 जातियां थी जोकि अब 29 हो गई है । ये सभी जातियां पिछड़े वर्ग (क) में हैं ।

हरियाणा सरकार ने हरियाणा कृषि व्यवसाय तथा खाद्य प्रसंस्करण नीति- 2018 में संशोधन करके प्रदेश में स्थित खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में कच्चे माल के रूप में प्रयोग की जाने वाली दलहनों/दालों पर बाजार शुल्क माफ करने का निर्णय लिया है। कृषि विभाग ने हरियाणा कृषि उत्पाद मार्केट्स (सामान्य) नियम, 1962 के नियम 30 (6) के अनुरूप इस माफी को पहले ही स्वीकृति प्रदान कर दी है।

इस आशय का निर्णय मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया।
दलहनों/दालों पर बाजार शुल्क माफ करने के इस निर्णय से प्रदेश में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा जिससे रोजगार सृजित होगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा तथा किसानों को उनके उत्पाद का अच्छा खरीद मूल्य मिलने से अंतत: किसानों को भी लाभ होगा।

बैठक में दादूपुर नलवी सिंचाई योजना के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि की अधिसूचना रद्द करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई।
चूंकि यह योजना गैर-लाभकारी और पूरी तरह से अव्यावहारिक हो गई है, राज्य सरकार ने 27 सितम्बर, 2017 को मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति के बाद, 3, अगस्त 2018 की अधिसूचना के तहत 824.71 एकड़ भूमि की अधिसूचना रद्द कर दी थी।

सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना (हरियाणा संशोधन) अधिनियम, 2017 में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार की धारा 101 ए के साथ संलग्न परंतुक के प्रावधानों के अनुसार भूमि के मालिक किसानों को वैकल्पिक भूमि की पेशकश करके 11 दिसंबर, 2018 की अधिसूचना के तहत और 5.39225 एकड़ भूमि की अधिसूचना को रद्द कर दिया गया। लाभार्थियों को भूमि लौटाने और उन्हें दिया गया मुआवजा वापिस लेने के तौर-तरीकों के संबंध में प्रस्ताव को स्वीकृति हेतु अब मंत्रिमंडल के समक्ष रखा गया।

अब उपरोक्त भूमि लौटाने के सरकार के निर्णय के बारे में वास्तविक भूमि मालिकों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को सूचित करने के लिए 14 सितंबर, 2018 की अधिसूचना के खंड 13 के प्रावधानों के अनुसार यह निर्णय लिया गया है।

वास्तविक मालिकों या उनके कानूनी उत्तराधिकारियों को, उनके द्वारा लिए गए मुआवजे की तिथि से मुआवजा लौटाने की तिथि तक 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज के साथ, उन्हें अदा किए गए सोलेटियम को छोड़ कर, भूमि अधिग्रहण अधिकारी, अंबाला के पास मुआवजा जमा करवाना होगा। जमीन पर कब्जा मुआवजा राशि लौटाने के बाद ही दिया जाएगा और ब्याज के साथ मुआवजा लौटाने के 3 माह के अंदर जमीन का कब्जा देना सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी संबंधित अधीक्षण अभियंता, सिंचाई तथा भूमि अधिग्रहण अधिकारी की होगी।

सरकार ने उन भूमि मालिक किसानों का साधारण ब्याज माफ करने का भी निर्णय लिया है, जो अधिग्रहण के बाद सरकार द्वारा उपयोग जैसे किसी उपयोग या क्षति तथा भूमि की बहाली (रेस्टोरेशन) के कारण होने वाली क्षति के लिए मुआवजे का दावा नहीं करेंगे। हालांकि, जो भूमि मालिक उपयोग और क्षति के लिए मुआवजा चाहते हैं, उन्हें 9 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से साधारण ब्याज का भुगतान करना होगा। भूमि अधिग्रहण अधिकारी, अंबाला, को अपने दावे प्रस्तुत करते समय, भूमि मालिकों को अपनी पसंद का उल्लेख करना होगा कि क्या वे ब्याज का भुगतान करेंगे और उपयोग या क्षति के लिए मुआवजे का दावा करेंगे या नहीं।

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