हरियाणा में बोर्ड ने 50 हजार से ज्यादा बच्चों के रोके एडमिट कार्ड, 3 मार्च से हैं परीक्षाएं

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Yuva Haryana, Chandigarh

बोर्ड परिक्षाओं में अध्यापकों के सहयोग ना करने पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने 562 स्कूलों में पढने वाले बच्चों के रोल न. रोक दिए हैं। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इन विद्यार्थियों के रोल नंबर इसलिए रोके हैं, चूंकि इनके स्कूलों के शिक्षकों ने बीते वर्ष बोर्ड परीक्षाओं में अपनी ड्यूटी नहीं दी थी। तब बोर्ड ने परीक्षा में ड्यूटी न देने वाले स्कूलों पर पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना लगाया था। उस समय फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन ने दबाव बनाया तो चेयरमैन ने जुर्माना न लेने का आश्वासन दिया था, लेकिन 2019-20 की बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने पत्र निजी स्कूलों की ईमेल पर भेज दिए। जिसका स्कूलों ने विरोध किया।

कुल 910 स्कूलों को पांच-पांच हजार रुपये जमा कराने के निर्देश दिए थे। जिसमें से लगभग 348 स्कूलों ने राशि जमा करा दी है, जबकि बाकि जुर्माना न देने पर अड़ गए हैं। इस कारण बोर्ड ने विद्यार्थियों के रोल नंबर रोके हैं। जिनके रोल नंबर रुके हैं, उनमें से अनेक विद्यार्थी दसवीं और बारहवीं के प्रैक्टिकल देने से भी वंचित रह गए हैं। फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल वेलफेयर एसोसिएशन एवं निसा इससे खफा हैं।

रविवार को इनके अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा ने पत्रकारों से बाचतीत में कहा कि अगर बोर्ड ने जल्दी रोल नंबर जारी नहीं किए तो पहली मार्च को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसी दिन विद्यार्थियों को साथ लेकर शिक्षा बोर्ड भिवानी का घेराव किया जाएगा। एक साल बाद डयूटी न देने वाले शिक्षकों की सजा विद्यार्थियों को देना गलत है। तीन मार्च से विद्यार्थियों के बोर्ड परीक्षा शुरू होने वाली है। ऐसे में रोल नंबर रोकना उन्हें मानसिक रूप से परेशान करना है। एक्ट में जुर्माना वसूलने का कोई प्रावधान नहीं है। विद्यार्थियों की तरफ से बाल कल्याण आयोग व मानव अधिकार आयोग में भी शिकायत की जाएगी।

फेडरेशन के महासचिव राम अवतार शर्मा ने कहा कि बोर्ड जानबूझकर इस बार की परीक्षाओं में निजी स्कूलों के परीक्षा केंद्र काफी दूरी पर तो सरकारी स्कूलों के परीक्षा केंद्र बेहद करीब बना रहा है। अगर परीक्षाएं शुरू होने से पहले केंद्रों में बदलाव नहीं किया गया तो वह इस मामले को लेकर न केवल हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे बल्कि मानवाधिकार आयोग तथा बाल कल्याण आयोग में भी कार्रवाई के लिए आवेदन करेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड की मंशा निजी स्कूलों का परीक्षा परिणाम खराब करना व सरकारी स्कूलों का परिणाम नकल कराकर सुधारना है। इसलिए निजी व सरकारी स्कूलों के परीक्षा केंद्र एक साथ नहीं बनाए गए। उन्होंने असेसमेंट के दस नंबर शिक्षकों से छीनकर बोर्ड के अपने हाथ में लेने के फैसले का भी विरोध किया है।

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