प्री बजट चर्चा करने वाला देश का पहला राज्य बना Haryana, विधायकों से लिए जा रहे सुझाव

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Umang Sheoran, Yuva Haryana

पढ़ी-लिखी पंचायत देकर कर देश के समक्ष एक उदाहरण प्रस्तुत करने के उपरान्त हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वित्तमंत्री के रूप में अनेक हितधारकों, सांसदों व विधायकों के साथ बजट पूर्व बैठकें कर बजट में उनके सकारात्मक सुझावों को शामिल करने की एक नई पहल की है। भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इसके साथ ही एक नया अध्याय जुड़ गया है और हरियाणा ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

पंचकूला के सेक्टर-1 स्थित रेड बिशप पर्यटन केन्द्र के सभागार में वित्त विभाग एवं हरियाणा वित्तीय प्रबन्धन संस्थान द्वारा संयुक्त रूप से विधायकों के साथ आयोजित तीन दिवसीय बजट पूर्व विचार-विमर्श बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने विधायकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि को सदन में अपनी राजनीतिक पार्टी की विचारधारा से ऊपर उठकर बजट के लिए राज्य-व्यापी सुझाव देने का परिचय देना चाहिए।

बैठक में उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता, उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा के अलावा हरियाणा मंत्रिमण्डल के सदस्य तथा राज्य के 75 से अधिक विधायक उपस्थित थे।

एक वित्तमंत्री के रूप में मुख्यमंत्री मनोहर लाल की इस अनूठी पहल का उपस्थित सभी विधायकों ने स्वागत करते हुए कहा कि बजट पूर्व उनसे सीधा संवाद कर बजट के लिए सुझाव मांगना निश्चित रूप से उनके लिए एक सुखद अनुभव है। बजट में शामिल करने के लिए आज जो सुझाव उन्होंने दिए है आशा है कि उनके अच्छे सुझाव बजट में समावेशित  किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 8 जनवरी, 2020 से वे उद्योग जगत, सेवा क्षेत्र, रियल इस्टेट, कृषि,मैन्यूफेच्यरिंग, महिला, युवाओं तथा सांसदों सें भी विचार-विमर्श कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोक सभा अध्यक्ष, श्री ओम बिरला ने हरियाणा की इस पहल की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि बजट का हेतु समाज के अन्तिम पक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है। सीधा संवाद व विचार-विमर्श पर बजट के लिए सुझाव आमंत्रित करने की एक पहल की गई है। उन्होंने कहा कि बजट में भी जनता की आकांक्षाओं व अपेक्षाओं पर खरा उतरने का वे हर सम्भव  प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने पर्यावरण सुरक्षा, प्रदूषण, गिरता भू-जल स्तर, कृषि में अत्याधिक रसायन उर्वरकों का उपयोग कुछ ऐसी चुनौतियां है जिनका समाधान ढूढऩा जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा कि जब देश में खाद्यान्नों का संकट हो गया था उस चुनौती से निपटने के लिए हरित क्रांति लाई गई और इसका परिणाम यह है कि पंजाब, हरियाणा देश के खाद्यान भण्डारण में सर्वाधिक योगदान दे रहे हैं। विश्वभर में जल संरक्षण भी भविष्य की एक चुनौती बनती जा रही है। इसके लिए जल का अधिक से अधिक बचाव करना होगा। सुक्ष्म सिंचाई योजनाओं का अपनाना होगा। रोटी, कपड़ा और मकान के  साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य व सुरक्षा भी मनुष्य की एक आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी 20 फरवरी, 2020 से औपचारिक रूप से हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र आरम्भ हो जाएगा। आज की बैठक में आए सुझावों को भी बजट में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी की राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर प्री-बजट बैठक में विधायकों ने भाग लिया है जो एक अच्छी शुरूआत है। कृषि प्रधान राज्य होने के नाते  प्री-बजट बैठक के पहले दिन कृषि एवं सम्बद्घ क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को विजन एवं मिशन बनाने का उपस्थित विधायकों ने मुख्यमंत्री की सोच का स्वागत किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में विभागों की छोटी बड़ी कुल 1590 योजनाएं है, जिनमें से कई योजनाओं की आज के दिन प्रासंगिकता नहीं है। बजट में इस बात  का ध्यान रखा जाएगा कि ऐसी योजनाओं को या तो बंद किया जाएगा या तो इसे दूसरी योजनाओं के साथ मिलाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने हरियाणा को दिए गए संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-2030 के तहत 17 लक्ष्यों की लगाई गई प्रदर्शनी की उदघाटन भी किया और आर्थिक विकास से सतत विकास की ओर ‘मेरा प्रण’ पर हस्ताक्षर भी किए। जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का उचित प्रबंधन एवं उपयोग को बढ़ावा देना, रसायनों का ठोस प्रबंधन हेतु जागरूकता जिससे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर उनके हानिकारक प्रभावों को न्यूनतम किया जा सके, ग्राम पंचायत में ऐसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करना, जो पर्यावरण प्रदूषण को कम करती हों, नगरीय  क्षेत्रों में अपशिष्ट प्रबंधन को प्रोत्साहित करना शामिल है।

वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने राज्य की आर्थिक  विकास की स्थित पर एक विश्लेषणात्मक प्रस्तुतिकरण दिया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2014-15 राज्य का कुल बजट 73301 करोड़ था जो वर्ष 2019-20 में  132165 करोड़ रुपये  था। इसी प्रकार प्रति व्यक्ति आय जो वर्ष 2014-15 में 147382 रुपये थी जो अब 215157 है। सकल घरेलू उत्पाद दर 2019-20 में 11 प्रतिशत रही। राज्य की आर्थिक स्थिती केंद्रीय वित्त कोषीय प्रबंधन के नियमों के अनुरूप है। पूंजीगत परिव्यय में भी तीन गुणा वृद्धि हुइ है जो प्रदेश की सुदृढ़ आर्थिक स्थिती को दर्शाती है।

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