कैग की सर्वे रिपोर्ट ने किया खुलासा, हरियाणा नहीं है पूरी तरह से खुले में शौचमुक्त

Breaking बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा

Yuva Haryana,

Chandigarh, (30-3-2018)

खट्टर सरकार के स्वच्छता अभियान को कैग की एक सर्वे रिपोर्ट ने आइना दिखा दिया है।

कैग की रिपोर्ट के अनुसार लोग अभी भी खुले में शौच जाते हैं। जिन लोगों को शौचालय बनवाने के लिए अनुदान दिए गए, वह पात्र नहीं थे और जिन लोगों ने शौचालय बनवाए भी, वह उन्हें शौच जाने की बजाय स्टोर के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

कई जगह इन शौचालयों में पुराना सामान और गोबर के उपले रखे जा रहे हैं। एक ने घर में बने शौचालय में ही किराने की दुकान खोल दी है। बहुत लोगों ने शौचालय बनवाए ही नहीं और बहुत लोगों ने बनवाने शुरू तो किए पर अधूरे ही छोड़ दिए।

हरियाणा की प्रधान महालेखाकार महुआ पाल ने अपनी रिपोर्ट में शौचालयों के निर्माण की पड़ताल की तो असलियत सामने आई। 2012 में हुए सर्वे के आधार पर राज्य के ग्रामीण इलाकों में 7.64 लाख परिवार ऐसे चिहिन्त किए गए, जिनके पास शौचालय नहीं थे।

सरकार ने उन्हें शौचालय बनवाने के लिए अनुदान देना शुरू किया। जून 2017 में हरियाणा के ग्रामीण इलाकों को खुले में शौच मुक्त घोषित कर दिया गया। 31 जुलाई 2017 को भौतिक सत्यापन हुआ तो इन दावों पर सवाल खड़े हो गए।

हरियाणा के खुले में शौचमुक्त होने के सरकारी दावों की असलियत कैग ने ऊजागर कर दी है। कैग के अधिकारियों ने 31 जुलाई 2017 को 14 हजार 959 परिवारों की पहचान की, जिनकी जांच की जानी थी।

कैग ने 1045 परिवारों का मौके पर जाकर मुआयना किया, जिसमें से 10 परिवारों के पास शौचालय नहीं बने हुए थे। तीन खंड बिलासपुर, गन्नौर और रेवाड़ी के सात गांवों में कई शौचालय ऐसे मिले, जो कंपलीट नहीं थे और उनमें स्टोर का सामान तथा उपले रखे हुए थे। एक शौचालय तो बनाया ही नहीं गया था।

करीब 200 शौचालय ऐसे मिले, जहां मूल सुविधाओं की जरूरत थी। यानी किसी का दरवाजा नहीं था तो किसी के ऊपर छत और नीचे वाशबेसिन नहीं था। दरअसल, ग्रामीणों ने इन्हें उपयोग के लिए बनवाया ही नहीं था। अनुदान के लोभ में उन्होंने बनवाया और इसका वह लोग उपयोग अन्य कामों के लिए कर रहे थे।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *