महिला दिवस विशेष- घूंघट के पीछे से निकलकर ये महिलाएं बनी हैं सबके लिए प्ररेणास्त्रोत

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें हरियाणा हरियाणा विशेष

Kamarjeet Virk, Yuva Haryana,
Karnal 08 Mar,2019

हजारों महिलाओं की बदल रही जिंदगी, जिसके घूघंट को उसकी कमजोरी समझा जाता था। आज वो ही महिलाएं अपने घर का पालन पोषण कर रही है, घूंघट के पीछे रहने वाली महिलाएं अब पूरी तरह से सक्षम हो चुकी है।

घर बैठकर मेहनत से पहले काम करती है और फिर उस सामान को बाजार में जाकर खुद बेचती हैं। भले ही आज हम अंतराष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस मना रहें हो, लेकिन आज भी ग्रामीण तबके की महिलाओंं को कहीं ना कहीं पूरी तरह इज्जत नही मिलती।

वो मान- सम्मान जिस पर उनका हक है, वो उन्हें नहीं दिया जाता। आज भी हमारे समाज का एक हिस्सा ऐसा है, जो गाँव की महिलाओं को हमेशा घूंघट के पीछे रखता है। ऐसा हम नहीं, यह सब ब्यां कर रही है, करनाल की वो महिलाएं, जिन्होंने अपने होंसले और हिम्मत के बलबूते पर अपने सपनों को पूरा करने का कार्य किया है।

जिनके लिए कल तक घर और परिवार का काम ही सब था, लेकिन आज यह महिलाएं समाज में महिलाओं के कद को और ऊंचा करने में जुटी हुई हैं।

जिसे कभी घुंघट के पीछे रखा जाता था आज वह आजाद दिल से काम कर रही हैं। न केवल काम कर रही है बल्कि अपने उस काम को खुद लोगो तक पहुंचाती हैं। छोटे-छोटे गांवों से बाहर निकल कर आज इनके कदम बड़े बड़े शहरों की तरफ चल पड़े हैं।

करनाल के गाँव चिडाव की दर्जनों महिलाएं आज इकट्ठा होकर काम करती हैं, एक जगह पर समान बनाती है चाहे किसी भी तरह का आचार हो या चटनी हो डिजाईनरी ज्वेलरी या फिर बैग अपने हाथो की कलाकारी से तैयार किये हुए है।

इस सामान को महिलाएं पहले तो मिलकर बनाती हैं और फिर उसके बाद उसे शहर में लगने वाले बड़े बड़े मेलों में प्रदर्शनी लगाकर बेचती हैं। जहां इन्हें इनकी मेहनत का मूल तो मिलता ही है, साथ ही वो मान सम्मान भी इनकी कलाकारी को दिया जाता है, जिसकी ये हकदार हैं।

यह सम्मान इन्हें शहरों में भरपूर मिलता है, लेकिन गाँवों में खुद के लोगों से नही मिलता। जो इन्हें टोंट मारते हैं, इन्हें बैग टांगकर गाँव से बाहर जाते हुए देख तंज कसते हैं। लेकिन उसके बावजूद भी यह महिलाएं हार नही मानती। इनके मजबूत होंसलो की बदौलत ही आज इन्हें देखकर कई महिलाएं प्रेरित हो रही हैं।

जो कभी अपनों के डर और लोगों के तानो से घबराती थी, आज इन्हें बैग टांगकर गाँव से बाहर जाता देख सब हैरान रह जाते है। कुछ होसला अफजाई करते है तो कुछ तंज कसते हैं।

2019 में आज महिलाओं का कद काफी ऊंचा है। आज महिलाएं अन्तरिक्ष तक जा पहुंची हैं। जो दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। जिस कारण आज छोटे-छोटे गाँव की महिलाएं अपने कदम आगे बढ़ा रही हैं और अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए खुद सक्षम होकर बीना किसी की परवाह किये, बिना अलग अलग क्षेत्र में अपना बेहतर कार्य कर रही हैं।

उन्हीं में कुछ महिलाओ का कार्य करनाल की महिलाओं जैसा है, जो आज अपने आपको पूरी तरह मजबूत मानती हैं और इन्हें मजबूत करने में इनका साथ नाबार्ड जैसी भारत सरकार की योजना दे रही हैं।

भारत सरकार की एक ऐसी योजना जो ग्रामीण तबके की महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है, जिसके प्रयासों से करनाल की हजारो महिलाओं की जिंदगी बदली है।

महिला दिवस पर करनाल की ग्रामीण महिलाएं उन सब महिलाओ को संदेश दे रही हैं, जो आज भी अपने घर में घुटकर रहने को मजबूर हैं। इन महिलाओ की कोई उम्र नहीं, गरीब तबके की यह महिलाएं आज बदलते समय में आगे बढ़ रही हैं।

भले ही आज समाज के एक हिस्से का चेहरा कैसा भी हो इन्हें तो बस यह मालुम है इन्हें अपना काम करना है और कुछ पैसे कमाकर अपने बच्चो का परिवार का पालन पोषण करना है। क्योंकि आज के समय में एक की कमाई से घर नही चलता।

अपने फ़ूड प्रोडक्ट हर प्रकार के आचार चटनी से लेकर ज्वेलरी और बैग बनाकर और उसे बेचकर यह महिलाओं अपने घर का अच्छे से गुजारा चला रही हैं। हांलंकी इन्हें नाबार्ड योजना की तरफ से समय समय पर सहयोग भी मिलता है। नाबार्ड से जुड़ने वाली महिलाओं की गिनती आज करनाल में हजारो में और सभी अपने अपने क्षेत्र में अलग अलग तरीके का कार्य करके महिला दिवस पर दूसरी महिलाओ के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *