हरियाणा की होली की बात है न्यारी

कला-संस्कृति होली के रंग

रै कोलड़े की मार अर भाभी का प्यार

रँगा गेल्या खीर चुरमें के स्वाद का वार

होली के डांडे नै धोकण अर बैर ,

द्वेष नै तजकै बिखेरो भाईचारे की फुहार

ल्यो आ ग्या रै यो होली का त्यौहार!

 

साल म्ह कितने इसे त्यौहार आवै सै जिनकी छाप पूरी जिंदगी भर रह ज्या सै। तो ईब ईसा ए खास त्यौहार फागण की पूर्णिमा नै आया करै। फागण का यो महीना मस्ती, मख़ौल अर अल्हड़ भाव तै परिपूर्ण होया करै। बसन्त रुत की गेल्या फागण मास कई तरह के बदलाव लेकर आया करे जुकर जाड़ा के अंत हो सै अर गर्मी की शुरुआत हो सै। तो इस मौज मस्ती के महीने म्ह होली का त्यौहार आया करै। जै यो त्यौहार हरयाणा म्ह मनाते नहीं देख्या तो सोच ल्यो थामने जिंदगी बिरान करदी कति।

फाग की मस्ती के अलावा होलिका दहन भी एक अच्छा अवसर होता है मेलजोल का

न्यू तो भाभी का स्वरूप माँ की तरह होया करै पर देवर भी छोटा होण के कारण छोटे बालक की तरह शरारती प्रतीत होया करें।तो यो त्यौहार देवर भाभी की तकरार अर प्रेम भरे रिश्ते नै अनोखे अंदाज तै दिखावे सै। तड़कै तड़क घर की बड़ी बड़ेरी महिला कुनबे खातर खीर, चावल ,हलवा अर चूरमा बनाकर अपणे घर के पितर देवता की गेल्या गाम के खेड़े महाराज, दई देवते अर कुलदेवी नै भोग देकर त्यौहार का शुभारंभ करया करें। फेर कुनबे की सारी देवरानी जेठानी किसे लत्ते, दुप्पटे, चुनरी नै बल्ल दे दे कोलड़ा बनाया करे।

कई बार तो बल्ल देते समय इसके बीच म्ह रस्सी भी धर ली जा सै जुकर एक कोलड़ा लागते ए होज्या कड़ लिली। ईब गाबरु छोरया का टोला गली म्ह इक्कठा होया करें अर फेर खेल्या करें कोलड़े आली होली। जै हरयाणा की होली के ये दृश्य नहीं देखे तो थारी “जिंदगी बिरबाद हो गिया”। जवान छोरो के उत्साह के गेल्या बड़े बूढ़े होली ने अपणे पुराने अंदाज म्ह मनाया करें। तो फेर के था, हरयाणा की बूढ़ी बड़ेरी के जवानॉ तै कम सै।

जबे तो मख़ौल म्ह कह्या करें … बूढ़ी ए लुगाई मस्ताई फागण म्ह,  काची अमरी गदराई फागण म्ह

होली की मस्ती में हर वर्ग, हर उम्र के लोग आनंद उठाते हैं

तो उम्र कोई भी हो फागण का चाह ईसा ए हो सै। । होली का डांडा गाम के खुले मैदान म्ह बसन्त पँचमी आले दिन गाड्या जाया करे अर होली आले दिन इस डांडे के चारों ओर गोस्से अर लकड़ी गेर दी जाया करे। होली के कई दिन पहले गोबर ते ढाल, कंडे बनाये जाया करें जो डांडे के ऊपर डाले जाया करें। ये कंडे प्रतीक होवे से द्वेष अर घृणा का, ज्याते इनका दहन करके भाईचारे अर आपसी मेल भाव की भावना कायम करी जाया करें।

हिरण्यकश्यप अर प्रहलाद की कहानी तै जो सन्देश प्राप्त होवे सै वहीं विस्तारित करणा होली त्यौहार मनाण का उद्देश्य मान्या गया सै। यो त्यौहार एक दिन तक नहीं आता यो लगातार सात दिन यानी सिली सातम तक न्यूए मनाया जाया करे। हरयाणा के हर त्यौहार की या खासियत रही सें अक अपणी ब्याही छोरियों को तोहफे और मान सम्मान स्वरुप मे कपडे, मिठाई, श्रृंगार का सामान दिया जाया करें जिसने सिद्दा कहया करें, अर सिद्दा होली त्यौहार के कुछ दिन पहले बेटी के ससुराल मे पीहर पक्ष द्वारा भाई के हाथ भिजवाया जाया करें।

न्यूए तीज त्यौहार पे कोथली अर सामण का सिंधारा देकर हरयाणा की गौरवमयी परम्परा को जीवित राख्या जाया करे। होली का त्यौहार सिर्फ कोलड़े खातर ही नहीं बल्कि हरयाणा के मस्तमौला अंदाज खातर भी खास मान्या जाया करे। यहाँ सिर्फ देवर अर भाभी नहीं बल्कि पत्नि अपणे पति के भी कोलड़े धर दिया करे ईब कोई तो टेम आवे जब तकरार अर प्यार ने कहासुनी के बाद त्यौहार पे भी याद करया जा।

गाम देहात म्ह होली का रंग न्यारा ए हो सै, छोरी अपणी सहेलियों गेल रँग गुलाल लगाकर गीत गाया करें अर एक गीत तो घणा ए मस्ती भरकर गाया जाया करे…

हे रै फागण आया रँग भरया रे लाला, फागण आया रँग भरया,

एक ससुर घर दो बहु रे लाला, दोनु पाणी ने जा ए बदन सिंह

फागण आया रँग भरया

अगली का बिछुवा ढ़ह पड़या रे छोरों

पिछली ने लिया ए उठा ए बदन सिंह

फागुन के इस महीने में हर ओर रंगों और उल्लास का नशा सा छाया रहता है

फागण म्ह गेंहू की फसल भी नुकसान अर फायदे नै बताती दिख्या करे तो बढ़िया फसल के आण पे भी गीत गाया करें जिसमें फागण के रँग के साथ पति पत्नी की मीठी तकरार झलक्या करें..

ओ बलमा मैं तो बोरला घड़ाऊंगी, मेरे पाया के म्ह घुंघरू मैं छन छन करती आऊंगी,

घड़वादयू तेरा बोरला घड़वा दयू, रमझोल री तू काम कराले खेत का,

घड़वादयू सारी टूम री मैं, सोला बरस की छोरी मेरा भाई सूबेदार सै

मैं पटवारी की बेटी मन्ने अफसर की मरोड़ सै

हो अफसर की मरोड़ सै, हो हो जी मैं बीस बरस का गाबरु मैं फौजी सूबेदार सूं

तँन्ने आना हो तो आज्या, मन्ने सौतन की मरोड़ सै, सौतन की मरोड़ सै

हो हो जी तू सौतन क्योंकर ल्यावेगा, मैं अफसर गेल्या जाऊँगी

फागण का महीना पिया हो हो हो फागण का महीना पिया करू थी मख़ौल हो !

हे रै फागण आया रँग भरया रै गोरी फूल ,

बदलू नै काढ़ ले रै गोरी मत कोले की आट ले रै

तेरे कोलड़े नै तू डाट ले ईसा मौका मिल रह्या

आज के फागण आया रँग भरया

 

देख ल्यो ईब म्हारे हरयाणा म्ह होली तो न्यूए नाच गा के मनाई जाया करें , किते कोलड़े तो किते रँग ,किते चूरमे की मिठास गेल्या यो त्यौहार पूरे साल भर यादगार रहवे सै।

 

युवा हरयाणा की ओर तै आप सबनै होली अर फाग की रँगीली शुभकामनाएं, खूब रँग गुलाल उडाइयो अर पाणी कम खिंनड्डाइयो ।

हैप्पी होली, हैप्पी फाग आर्टिकल शेयर करियो अर कॉमेंट करण की करियो ख़्यास।

 

सोनिया जांगड़ा, चंडीगढ़

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