सरकार के निर्देशानुसार विश्वविद्यालयों ने शोध के क्षेत्र में अपनी गति की तेज, 11 सरकारी व 17 निजी यूनिवर्सिटियों ने शोध विषय का किया चयन

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Yuva Haryana

Chandigarh, 14 Dec, 2018

हरियाणा सरकार के निर्देशानुसार प्रदेश के विश्वविद्यालयों ने शोध के क्षेत्र में अपनी गति को तेज कर दिया है। राज्य की सभी यूनिवर्सिटियों ने किसी प्राचीन दर्शन, ग्रंथ, संत-महात्मा और ऋषि-मुनि पर शोध करने का निर्णय लिया है। ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग अच्छी हो सके। हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के आग्रह पर अब तक 11 सरकारी यूनिवर्सिटी व 17 निजी यूनिवर्सिटियों ने अपने शोध विषय का चयन कर लिया है।

हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद के प्रवक्ता ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले दिनों उच्च शिक्षा परिषद के तत्वाधान में सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक राज्यपाल की अध्यक्षता में हुई थी, जिसमें निर्णय लिया गया था कि प्रत्येक यूनिवर्सिटी किसी प्राचीन दर्शन, ग्रन्थ, संत-महात्मा और ऋषि-मुनि पर शोध प्रकाशित करेंगे।

इसी संदर्भ में गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय,हिसार महर्षि वाल्मीकि पर शोध पुस्तक प्रकाशित करेंगे, जबकि स्टारेक्स विश्वविद्यालय, गुरुग्राम का विषय आर्यभट्ट रहेगा और महर्षि मारकण्डेश्वर विश्वविद्यालय वैदिक गणित पर, अल-फलह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद सूफी सिद्धांतों पर व एस.आर.एम. विश्वविद्यालय, सोनीपत द्वारा आयुर्वेद में वर्णित औषधीय पौधों पर शोध किया जाएगा।

इसी प्रकार, एमिटी विश्वविद्यालय गुरुग्राम द्वारा ‘मनुष्य के शरीर में कौशिका स्तर लिपिड्स’ के विषय पर, हरियाणा विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय ने ‘पारम्परिक भारतीय भोजन बनाने के प्रौद्योगिकी विज्ञान’ विषय पर,जे.सी बोस विश्वविद्यालय फरीदाबाद में ‘कम्प्यूटर में प्रयोग होने वाली प्राकृतिक भाषाओं’ पर नार्थ कैप विश्वविद्यालय गुरुग्राम में ‘एनीमेशन और गेमिंग’ पर ,एस. आर. एम. विश्वविद्यालय सोनीपत में ‘औषधियों की खोज’ पर, चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय भिवानी में ‘भारत और चीन में पारम्परिक तौर से प्रयोग होने वाली औषधियों’ पर शोध किया जाएगा।

हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद् के अध्यक्ष प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने बताया कि विश्वविद्यालयों का मुख्य कार्य अध्यापन होने के साथ-साथ नए ज्ञान का सृजन भी है। उन्होंने कहा कि परिषद् कार्य राज्य के विश्वविद्यालयों में मानवीय एवं सामाजिक समस्याओं के समाधान ढूंढने के प्रयास पर केन्द्रित रहेगा।

जिन विश्वविद्यालयों ने शोध विषय का चयन नहीं किया है, उनसे भी आग्रह किया गया है कि वे शीघ्र ही इस विषय में प्राध्यापक वर्ग से परामर्श करके निर्णय लें। आने वाले समय में वैश्विक स्तर की शिक्षा व्यवस्था बनाने के लिए विषय केन्द्रित शोध एक आवश्यक उपाय है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा प्रांत के सभी विश्वविद्यालयों से आग्रह किया है कि वे आधुनिक प्रासंगिकता वाले कम से कम एक विषय पर ग्रन्थ प्रकाशित करें। उन्होंने बताया कि 24 विश्वविद्यालयों ने अपने-अपने शोध करने बारे जानकारी दी है बाकि द्वारा भी शीघ्र ही विषय का चयन कर लिया जाएगा।

 

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