SC/ST कानून में बदलाव के विरोध में हरियाणा सरकार -मुख्यमंत्री

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Chandigarh, 31 March 2018

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम में संशोधन किए जाने को लेकर अनुसूचित जाति के शीर्ष भाजपा नेताओं के शिष्टमंडल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात करके इस मामले में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि हरियाणा निश्चित तौर केंद्र सरकार से सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पेटिशन दायर करने का आग्रह करेगा।

 

SC/ST एक्ट के तहत अपराध पर सरकारी कर्मचारी की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी सुप्रीम कोर्ट ने

हाल ही में अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 के तहत अपराध को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नए दिशा निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ऐसे मामले में अब किसी सरकारी कर्मचारी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। इतना ही नहीं, गिरफ्तारी से पहले आरोपों की जांच जरूरी है और गिरफ्तारी से पहले जमानत भी दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के कड़े प्रावधानों के तहत दर्ज केस में सरकारी कर्मचारियों को अग्रिम जमानत देने के लिए कोई बाधा नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि एससी/एसटी एक्ट का दुरुपयोग हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी पब्लिक सर्वेंट पर केस दर्ज करने से पहले DSP स्तर का पुलिस अधिकारी प्रारंभिक जांच करेगा। किसी सरकारी अफसर की गिरफ्तारी से पहले उसके उच्चाधिकारी से अनुमति जरूरी होगी।

महाराष्ट्र की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ये अहम फैसला सुनाया था। लोगों का आरोप है कि कुछ लोग अपने फायदे और दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस कानून का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया।

 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात के दौरान सांसद रतन लाल कटारिया, परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, हरियाणा घुमंतु-अर्ध घुमंतु जाति कल्याण बोर्ड के चेयरमैन डॉ. बलवान सिंह, हरियाणा सफाई कर्मचारी आयोग के चेयरमैन एवं भाजपा एससी मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष रामअवतार वाल्मीकि, महामंत्री सुरेश कुमार दनोदा व धर्मेंद्र कुमार, चंद्रप्रकाश बोहती तथा स्वच्छ भारत मिशन हरियाणा के वाइस चेयरमैन सुभाष चंद्र ने अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम में प्रक्रियागत बदलाव के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर हस्तक्षेप किए जाने की मांग रखी। शिष्टमंडल द्वारा ज्ञापन सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने भरोसा दिलाया कि वह केंद्र सरकार से आग्रह करेंगे कि इस विषय में सर्वोच्च न्यायालय में रिव्यू पेटिशन दायर की जाए, ताकि समुदाय के लोगों के हित सुरक्षित रखने के लिए कानून को सख्ती से लागू किया जा सके।

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