हरियाणा विधानसभा में दस बिल पारित, हरियाणा पुलिस संसोधन विधेयक पारित

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा हरियाणा विशेष
Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 Dec, 2018
हरियाणा विधानसभा में आज 10 बिल पारित किये गए, जिनमें हरियाणा नगर निगम (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2018; हरियाणा प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय, रोहतक (संशोधन) विधेयक, 2018; फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2018; पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2018; हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018; हरियाणा पुलिस (संशोधन) विधेयक, 2018; हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन)द्वितीय संशोधन विधेयक, 2018, हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, सिंचाई विभाग (संशोधन) विधेयक, 2018 और हरियाणा विनियोग (संख्या 4) विधेयक, 2018 और हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018 शामिल हैं। 
 
हरियाणा नगर निगम (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 को संशोधित करने के लिए हरियाणा नगर निगम (तृतीय संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया। इस अधिनियम की धारा-2 (45) द्वारा जनसंख्या शब्द को नवीनतम जनगणना के आधार पर प्रकाशित किये गए आंकड़ों अनुसार जनसंख्या के रूप में परिभाषित किया गया है। यह परिभाषा लागू करना कभी-कभी राज्य सरकार को पुराने प्रकाशित आंकड़ों को लागू करने के लिए बाध्य करता है, जो जमीनी स्तर पर समकालीन वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है। यह सरकार को पिछली जनगणना और वर्तमान समय के बीच की अवधि के दौरान किसी क्षेत्र की आबादी में हुई बढ़ौतरी की गणना करने से रोकता है तथा क्षेत्र के प्रशासन को भी प्रभावित करता है। इस परिभाषा को भारत के संविधान की धारा 243 पी (जी) के आधार पर विभिन्न राज्यों के विधानमण्डलों द्वारा समान रूप से अपनाया गया है। इसलिए इसे पूर्ण रूप से संशोधित करना अनावश्यक मुकद्दमेबाजी को आमंत्रित करेगा। महाधिवक्ता हरियाणा द्वारा सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार विशेष खण्ड के रूप में उदाहरण जोडक़र इसे परिभाषित कर सकती है, जो राज्य सरकार को सम्बंधित क्षेत्र में जनगणना के पश्चात जनसंख्या में हुई वृद्धि की गणना करने के उद्देश्य को हल कर सकती है और कानूनी रूप से भी मान्य होगी। इसलिए राज्य में किसी नगर निगम का गठन करने हेतु, पूर्व जनगणना और वर्तमान समय के बीच की अवधि के दौरान किसी क्षेत्र की आबादी में हुई बढ़ौतरी को मद्देनजर रखते हुए जनसंख्या की गणना करने के लिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 3 की उप-धारा 2 के परन्तुक में वर्तमान जनसंख्या का प्रावधान करने और वर्तमान जनसंख्या की गणना करने के लिए उदाहरण जोड़ा जाना प्रस्तावित है। 
 
हरियाणा प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय, रोहतक (संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय, रोहतक की स्थापना सरकारी तकनीकी संस्थान सोसाइटीज, रोहतक के एकीकृत परिसर को अपग्रेड करके हरियाणा राज्य विधानसभा  (2014 के अधिनियम 24) के एक अधिनियम द्वारा की गई थी, जिसमें चार संस्थान नामत: राज्य फाइन आर्ट्स संस्थान, स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ डिजाइन, स्टेट इंस्टीटयूट ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन और राज्य शहरी योजना एवं वास्तुकला संस्थान शामिल हैं। ये चार संस्थान महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक से सम्बद्ध थे और 240 छात्रों के वार्षिक दाखिले के साथ वर्ष 2011 में शुरू हुए थे। हरियाणा प्रदर्शन और दृश्य कला विश्वविद्यालय, रोहतक शहर के केन्द्र में स्थित है और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में आता है। विश्वविद्यालय प्रदर्शन एवं दृश्य कला में और मास मीडिया के क्षेत्र में देश के अग्रणी विश्वविद्यालयों में से एक के रूप में उभर रहा है। अब सरकार ने हरियाणवी भाषा के उस भारतीय कवि के नाम से विश्वविद्यालय का नाम बदलने का निर्णय लिया है जिसे राज्य सरकार द्वारा मरणोपरांत सूर्य कवि के रूप में सम्मानित किया गया था। अब इस विश्वविद्यालय को ‘‘पंडित लखमी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आटर््स रोहतक’’ के रूप में नामित करने का निर्णय लिया है।
 
फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2018
रोजगार के अवसर उत्पन्न करने के माध्यम से निवासियों को जीवन की गणवत्ता एवं उचित आजीविका अवसर उपलब्ध करवाने के लिए फरीदाबाद महानगर क्षेत्र के निरंतर, स्थायी एवं संतुलित विकास के लिए विजन विकसित करने हेतु, एकीकृत एवं समन्वित योजना, अवसंरचना विकास एवं नगरीय सुख-सुविधाओं की व्यवस्था, गतिशील प्रबन्धन, नगरीय पर्यावरण एवं सामाजिक, आर्थिक एवं औद्योगिक विकास के सतत प्रबन्धन के लिए उपबंध करने हेतु, तेजी से बढ़ रही नगर बस्तियों के रूप में फरीदाबाद के आविर्भाव के संदर्भ में स्थानीय प्राधिकरणों के समन्वय में नगरीय सुशासन एवं निष्पादन ढ़ांचे को पुन:परिभाषित करने हेतु और इनसे सम्बंधित एवं इनके आनुषंगिक मामलों के लिए वैधानिक प्राधिकरण स्थापित करने के लिए  फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण विधेयक, 2018 पारित किया गया। 
 
पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2018
पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम, 1952 को हरियाणा राज्यार्थ आगे संशोधित करने के लिए पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2013 की सीडब्ल्यूपी संख्या 21942 में अपने आदेश द्वारा पहले आओ-पहले पाओ नीति को असराहनीय कहते हुए एक पारदर्शी नीति बनाने का सुझाव दिया था और सर्वोच्च न्यायालय ने भी एक अन्य याचिका में अनुज्ञप्ति या अनुमति प्रदान करने के लिए एक पादर्शी नीति हेतु दिशानिर्देश तैयार करने की स्वतंत्रता प्रदान की है। अत: पहले आओ-पहले पाओ नीति के यद्यपि विकल्प स्वरूप बनाने तथा 10 नवम्बर, 2017 की एक नीति अधिसूचित की गई है। नीति के सम्बंध में एक निर्धारित प्रक्रिया के पालन करने के बाद बोली या नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति की विशिष्ट श्रेणी के अनुदान की परिकल्पना करती है। मौजूदा वैधानिक प्रावधानों में नीलामी या बोली के माध्यम से भूमि उपयोग में परिवर्तन की अनुमति प्रदान करने का प्रावधान नहीं है। अत: 10 नवम्बर, 2017 की नीति के कार्यान्वयन हेतु पंजाब नई राजधानी (परिधि) नियंत्रण अधिनियम, 1952 में भूमि उपयोग के परिवर्तन की अनुमति प्रदान करने के सक्षम प्रावधानों सम्मिलित करना आवश्यक है ताकि बोली या नीलामी प्रक्रिया के द्वारा विशिष्ट श्रेणी में अनुमति प्रदान की जा सके। इसी प्रकार, सरकार का विभाग के कार्यकलापों में और अधिक पारदर्शिता एवं निपुणता लाने के लिए विभिन्न वैधानिक अनुमोदनों की ऑनलाइन प्राप्ति और प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिसके लिए अधिनियम में सक्षम प्रावधान किया जाना आवश्यक है।
 
 
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन अधिनियम, 1975 में आगे संशोधन करने के लिए हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया। यह देखते हुए कि कई सामुदायिक स्थलों को उचित उपयोग में नहीं लाया जा रहा है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि इनके निर्माण एवं उचित उपयोग हेतु निर्धारित समय-सीमा को, यथाविहित विस्तार शुल्क की प्राप्ति के उपरांत, बढ़ाने जाए। यह विस्तार शुल्क सामुदायिक स्थानों के समयबद्ध सीमा में उचित उपयोग हेतु न लाए जाने के लिए वित्तीय दण्ड के रूप में होगा। यह भी देखा गया है कि रियल एस्टेट से जुड़ी विकास योजनाएं अक्सर दीर्घकालीक होती हैं, जिनको पूरा करने में 10 वर्ष से अधक का समय लग जाता है और इसके अतिरिक्त, चूंकि ‘रेरा’ का गठन खासकर ऐसी रियल एस्टेट परियोजनाओं की निगरानी तथा आबंटियों और कालोनाइजर के आपसी मुद्दों के निपटान के लिए किया जा चुका है। अत: यह आवश्यक हो गया है कि 1975 के अधिनियम संख्या 8 के अधीन लाईसैंसों के शीघ्र नवीकरण की निगरानी सम्बंधी सख्त प्रावधानों में छूट प्रदान की जाए। अत: अधिनियम संख्या 8 की धारा 3 की उप-धारा 4 में संशोधन करते हुए लाईसैंसों की नवीकरण की अवधि को बढ़ाते हुए पांच साल करने का प्रस्ताव है। इस अधिनियम के तहत दिए गए किसी लाईसैंस को रद्द करने की स्थिति में निदेशक को सम्बंधित कालोनी को अपने कब्जे में लेना होता है और विकास के कार्यों को पूर्ण करना या करवाना होता है। प्लॉट या फ्लैट धारकों व कालोनाइजर से विकास कार्यों की लागत राशि भी वसूल करनी होती है। लेकिन वर्तमान में इस अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अत: निदेशक द्वारा इन विकास कार्यों को पूर्ण करने हेतु तृतीय पक्ष को नियुक्त करने का प्रावधान करना प्रस्तावित है, जिसके लिए 1975 के अधिनियम संख्या 8 की धारा 8 में संशोधन प्रस्तावित है।
 
हरियाणा पुलिस (संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा पुलिस अधिनियम, 2007 को आगे संशोधित करने के लिए हरियाणा पुलिस (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया ताकि  अधिनियम के राज्य पुलिस बोर्ड उपबन्ध को अनुक्रम में लाने हेतू, राज्य पुलिस बोर्ड को राज्य सुरक्षा आयोग से प्रतिस्थापित किया जाना अपेक्षित है। पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए कोई प्रक्रिया नहीं है। अत: इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने के दृष्टिगत राज्य में इसकी दक्षता, प्रभाविता, जवाबदेही तथा उत्तरदायित्व को सुनिश्चित करने हेतु पुलिस सेवा प्रशासन, नियंत्रण तथा पर्यवेक्षण के लिए उतरदायी है। तथापि, इन निर्देशों में पुलिस महानिदेशक की पदावधि कम से कम दो वर्ष थी, फिर भी यह महसूस किया गया कि न्यूनतम दो वर्ष की अवधि दीर्घ अवधि है और निरंकुशता की सम्भवता को समाप्त करने तथा संतोषप्रद अनुक्रम में यह अनुकूलनियता होनी चाहिए। इसलिए पुलिस महानिदेशक की पदावधि, कम से कम एक वर्ष, जो एक और वर्ष विस्तार योग्य है, के रूप में विहित की जानी प्रस्तावित है। इसलिए राज्य सुरक्षा आयोग व्यापक नीति निर्णय लेने के लिए सर्वोत्तम निकाय है। राज्य सुरक्षा आयोग के परामर्श से पुलिस महानिदेशक को हटाया जाना प्रस्तावित है। अत: अधिनियम की धारा 34 के अधीन पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण एवं तैनाती के सम्बंध में उपबन्ध किये जाने प्रस्तावित हैं। 
 
हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, सिंचाई विभाग (संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, सिंचाई विभाग अधिनियम 2010 को आगे संशोधित करने के लिए हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क, सिंचाई विभाग (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया है। वर्तमान में सिंचाई विभाग में ग्रुप क के अभियंताओं सेवा शर्ते एवं वरिष्ठता का निर्धारण अधिनियम, 2010 के तहत शासित होता है। यह अधिनियम सिविल, मैकेनिकल, इलैक्ट्रिकल तथा कम्प्यूटर संवर्ग की अलग-अगल वरिष्ठता प्रदान करता है और आगे प्रमुख अभियंता का पद केवल सिविल अभियंता संवर्ग द्वारा भरा जाता है। यह अधिनियम एक नवम्बर, 1966 से लागू किया गया था। इस अधिनियम को कुछ मैकेनिकल अभियंताओं द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायायल में चुनौती दी गई थी और इस सम्बंध में न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में हरियाणा अभियंता सेवा ग्रुप क अधिनियम, 2010 में संशोधन किया जाना आवश्यक हो गया था। 
 
हरियाणा विनियोग (संख्या 4) विधेयक, 2018
हरियाणा विधानसभा में आज मार्च, 2019 के 31वें दिन को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान सेवाओं के लिए हरियाणा राज्य की संचित निधियों में से 2575,14,19,000 रुपये की राशि के भुगतान एवं विनियोग का प्राधिकरण देने के लिए हरियाणा विनियोग (संख्या 4) विधेयक, 2018 पारित किया गया। 
 
हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018
हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 को संशोधित करने के लिए हरियाणा नगरपालिका (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2018 विधेयक पारित किया गया। इस अधिनियम की धारा 2 (19 क) द्वारा जनसंख्या शब्द को नवीनतम जनगणना के आधार पर प्रकाशित किये गए आंकड़ों अनुसार जनसंख्या के रूप में परिभाषित किया गया है। यह परिभाषा लागू करना कभी-कभी राज्य सरकार को पुराने प्रकाशित आंकड़ों को लागू करने के लिए बाध्य करता है, जो जमीनी स्तर पर समकालीन वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता है। यह सरकार को पिछली जनगणना और वर्तमान समय के बीच की अवधि के दौरान किसी क्षेत्र की आबादी में हुई बढ़ौतरी की गणना करने से रोकता है तथा क्षेत्र के प्रशासन को भी प्रभावित करता है। इस परिभाषा को भारत के संविधान की धारा 243 त (छ) के आधार पर विभिन्न राज्यों के विधानमण्डलों द्वारा समान रूप से मनाया गया है। राज्य सरकार विशेष खण्ड के रूप में उदाहरण जोडक़र इसे परिभाषित कर सकती है, जो राज्य सरकार को सम्बंधित क्षेत्र में जनगणना के पश्चात जनसंख्या में हुई वृद्धि की गणना करने के उद्देश्य को हल कर सकती है। 
राज्य सरकार को पिछली जनगणना और वर्तमान समय की 50,000 से अधिक संक्रमणकालीन जनसंख्या वाली क्षेत्र के लिए नगरपालिका, 50,000 से अधिक किन्तु 3 लाख से कम शहरी क्षेत्र के लिए नगरपरिषद और 3 लाख से अधिक की जनसंख्या के लिए नगर निगम गठित किये जाएंगे। परन्तु इस धारा के अधीन पहले कोई नगरपालिका गठित नहीं की जा सकती थी। 
 
हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन) द्वितीय संशोधन विधेयक, 2018,
हरियाणा विधानसभा में आज हरियाणा विधानसभा (सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन) द्वितीय संशोधन विधेयक, 2018 पारित किया गया। इस विधेयक के तहत सरकारी चीफ व्हीप के बारे में विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिसमें चीफ व्हीप के पद को परिभाषित करने और उसको दी जाने वाली सुविधाएं वर्णित की गई  हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *