रोटी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा यह हरियाणा का वुशू नेशनल चैंपियन

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Suman Kashyap, Yuva Haryana

Haryana, 13-05-2018

एक ओऱ जहां कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकार सम्मानित करने के लिए तारीखें तय कर रही हैं, और ईनाम राशि में लाखों की बौछार कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वुशु में सात बार नेशनल चैंपियन रहे, संजय को रोटी जुटाने और परिवार को पालने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

ये वुशु चैंपियन गरीबी से इतना तंग आ गया है कि मेडल तक बेचने को मजबूर हो गया है। जी हां, रोहतक के लाखनमाजर का संजय वुशु में 9 बार और स्टेट में 7 बार नेशनल चैंपियन रहा यह खिलाड़ी परिवार का पेट पालने के लिए दिहाड़ी लगाने के लिए मजबूर है।

संजय का कहना है कि रोजगार के लिए उसने सीएम से लेकर पीएम तक मदद के लिए हाथ फैलाए, लेकिन किसी ने उस पर तरस नहीं खाया।

संजय ने बताया कि उसने 14 साल मेहनत सोचकर की, वह खेलों के माध्यम से अच्छे मुकाम पर पहुंचेगा। लेकिन रोजगार पाने के लिए उसकी 14 साल की मेहनत भी रंग न लाई।

सम्मान पत्र और ढेर सारे मेडलों के बावजूद भी वह पाई- पाई के लिए तरस रहा है। संजय के पिता का साया सर से उठ जाने के बाद वही परिवार का पालन-पोषण कर रहा है।

उसका एक बच्चा भी है, जिसका भविष्य भी अंधेरे में है। उसने निराशा में यह तक कह डाला कि यह मेडल और सर्टिफिकेट उसके लिए रद्दी बन गए है। इनका उसके जीवन में कोई महत्व नहीं रह गया है।

 

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