एचएयू ने खोजी गेहूं की नई किस्म, अब गेहूं में नहीं लगेगा पीला रतुआ रोग

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें सरकार-प्रशासन हरियाणा हरियाणा विशेष

Yuva Haryana,

Hisar, 14 March,2019

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने गेहूं की एक नई किस्म डब्ल्यूएच 1184 तैयार की है। जो पीला रतुआ बीमारी का प्रतिरोधक है। राज्य सरकार की तरफ से इस किस्म की स्वीकृति मिल गई है, मगर अभी राष्ट्रीय स्तर पर इस किस्म का रिलीज होना बाकी है।

विश्वविद्यालय के मेला ग्राउंड में आयोजित कृषि मेले में इस किस्म को किसानों को दिखाने के लिए प्रदर्शित किया गया। वैज्ञानिकों के अनुसार इस किस्म के किसानों तक पहुंचने में एक से डेढ़ साल लगेगा।

बता दें कि पीला रतुआ गेहूं की फसल को खराब कर देता है। इससे पैदावार बहुत कम होती है। किसानों की मेहनत पर रतुआ से पानी फिर जाता है। लेकिन अब गेहूं में पीला रतुआ रोग से परेशान रहने वाले किसानों के लिए यह राहत देने वाली खबर है।

गेहूं वैज्ञानिकों के अनुसार गेहूं की नई किस्म का प्रयोग किया गया था, जो सफल रहा है। विश्वविद्यालय ने जीटी रोड बेल्ट के सोनीपत, पानीपत, यमुनानगर और अंबाला जिलों में गेहूं में पीला रतुआ की बीमारी का आंकलन किया था।

वैज्ञानिकों के अनुसार इन्हीं क्षेत्रों में पीला रतुआ का प्रकोप अधिक है। यहां पर गेहूं के उत्पादन में 12 से 15 फीसद कमी दर्ज की गई थी। इस क्षेत्र में नई किस्म के बीज के प्रयोग करने वालों किसानों की फसल में यह समस्या नहीं दिखी। वहीं हिसार, भिवानी, रोहतक, महेंद्रगढ़, झज्जर आदि जिलों में पीला रतुआ न के बराबर है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि डब्ल्यूएच 1184 किस्म का औसत उत्पादन 58 से 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म से अधिकतम उत्पादन 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर लिया जा सकता है। इसका दाना मोटा और चमकदार है। इसके अलावा इस किस्म के अधिकांश गुण डब्ल्यूएच 1105 किस्म से मिलते-जुलते हैं। यह किस्म पकाई पर उच्च तापमान को सहन कर सकती है।

एचएयू के कुलपति प्रो. केपी सिंह हमारे वैज्ञानिक प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हर एंगल पर काम कर रहे हैं। नई किस्म विश्वविद्यालय के फार्म पर बेहद सफल साबित हुई है। अब इसे किसानों के खेतों में प्रयोग के तौर पर लगाया है और अभी तक इसमें पीला रतुआ बीमारी नहीं आई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *