हरियाणा के यमुना क्षेत्र के गांवों को हाईअलर्ट घोषित, प्रशासन ने मंगवाई किश्तियां

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Vivek Rana, Yuva Haryana
Ghrounda, 29 July, 2018
हथिनीकुंड बैराज से लाखों क्यूसिक पानी छोड़ दिए जाने के बाद यमुना क्षेत्र के गांवों को हाईअलर्ट कर दिया है,  बताया जा रहा है कि यह पानी दिल्ली में तबाही मचा सकता है।
हरियाणा के यमुना नदी के सटे इलाकों में पानी छोडऩे की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारियों ने यमुना में डेरा डाल दिया है।
प्रशासन ने जेसीबी, पोपलेन, लेबर सहित अन्य इंतजाम कर दिए है। पानी छोड़े जाने से ग्रामीणों में हडकंप की स्थिति पनप गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन की ओर से यमुना में बाढ़ बचाव के लिए किसी प्रकार के इंतजाम नही किए गए है।
कई दिनों से पहाड़ों में चल रही बारिश से प्रशासन ने लगभग पांच लाख क्यूसिक पानी शनिवार को यमुना में छोड़ दिया था।
यमुना में पानी छोडऩे के बाद प्रशासन ने यमुना से सटे गांवों के लोगों को अलर्ट कर दिया है। जिससे ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ गई है। यमुना में पानी छोडऩे के सूचना मिलते ही सिचांई विभाग के अधिकारी अपने अमले के साथ यमुना में पहुंच गए है और बाढ़ बचाव के लिए जुट गए है।
प्रशासन ने मौके पर फिलहाल जेसीबी मशीन,पोपलेन व लेबर सहित अन्य सामान मंगवा लिया है,लेकिन अभी तक किश्ती नही मंगवाई गई है। अधिकारियों के अनुसार रविवार तक गांव मुंडोगढ़ी,लालूपूरा के पास पानी आने को अनुमान लगाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से बाढ़ बचाव के लिए पूरे इंतजाम ने करने पर ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीणों को भूगतना पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष बाढ़ बचाव के लिए प्रशासन की ओर से कोई कार्य नही करवाया गया है। गांव लालूपरा के सरपंच विकास रावल,ग्रामीण पिल्लु, सोमा, पिटम्बर, छोटा,कमल आदि ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन की ओर से बाढ़ बचाव के कोई इंतजाम नही किए गए है। इस वर्ष तो ठोकरों की भी मरम्मत नही की गई। उन्हांने बताया कि अगर यमुना में पंाच लाख क्यूसिक पानी छोड़ा गया है तो गांवों में पानी घुसने के पूरे आसार बन जाएंगे। जिससे ग्रामीणों को काफी नुकसान सहन करना पड़ेगा।
नही पहुंची किश्ती।
हालांकि प्रशासन की ओर से बाढ़ बचाव के लिए पूरे इंतजाम होने के दावे किए जा रहे है,लेकिन बाढ़ बचाव के लिए अभी तक किश्ती तक नही पहुंच पाई है। अगर यमुना में सवा पांच लाख क्यूसिक पानी पहुंचता है,तो कहीं न कही प्रशासन के दावे बौने साबित हो जाएंगे।
कई बार भुगत चुके है खामियाजा।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षो में कई बार बाढ़ आने का खामियाजा भुगत चुके है। प्रशासन बाढ़ आने के बाद ही जागता है। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद उनकी फसलें व टयूवलों की ओहदियों में पानी भर जाता है, वही घरों में पानी घुसनें के बाद सारा सामान खराब हो जाता है। जिससे ग्रामीणों को भारी नुकसान सहना पड़ता है। प्रशासन की ओर से कोई मदद नही मिलती।
यमुना में लगभग सवा पांच लाख क्यूसिक पानी छोडऩे की सूचना मिली है। सूचना मिलने के बाद यमुना क्षेत्र में बाढ़ बचाव के लिए पूरे इंतजाम किए गए है। फिलहाल जेसीबी मशीन,पोपलेन,लेबर आदि अन्य सामान पहुंच गया है। किश्ती की अभी जरूरत नही है। यमुना में पानी छोडऩे से किसी प्रकार का कोई खतरा नजर नही आ रहा है। ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया है। विक्रम सिंह ,एसडीओ सिचांई विभाग।

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