दक्षिण हरियाणा को तगड़ा झटका, नहीं बनेगी हाईकोर्ट की अलग खंडपीठ

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Yuva Haryana
Chandigarh, 11 August, 2018

दक्षिण हरियाणा में अलग से हाईकोर्ट की बेंच बनाने को लेकर खट्टर सरकार की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीसों वाली समिति ने दक्षिणी हरियाणा में हाईकोर्ट की संवैधानिक बेंच स्थापित करने की जरुरत को सही नहीं पाया है। अब हाईकोर्ट की इस समिति ने हरियाणा सरकार को अपनी रिपोर्ट दे दी है।

इस मामले में हाईकोर्ट की इस समिति ने रिपोर्ट में सरकार को बताया है कि दक्षिण हरियाणा में अलग से हाईकोर्ट की बेंच की आवश्यकता नहीं है। कमेटी ने पूरे विचार विमर्श और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करने के बाद सरकार को यह रिपोर्ट सौंपी है।

हरियाणा सरकार दक्षिणी या पश्चिमी हरियाणा में हाईकोर्ट की अलग खंडपीठ चाहते थे और इस मामले में अप्रैल 2015 में केंद्र सरकार को प्रस्ताव भी भेजा गया था, केंद्र सरकार ने इस प्रस्वाव को मई 2015 में ही हाईकोर्ट में भेज दिया था जिसके बाद जुलाई 2015 में हाईकोर्ट के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों की एक समिति की गठन किया गया था।

समिति ने अपनी पूरी रिपोर्ट हरियाणा और केंद्र सरकार को भेज दी है। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट सही रुप से स्थित है और अलग से कोई खंडपीठ करने की कोई जरुरत नहीं है। इस रिपोर्ट को लेकर मुख्यमंत्री को भी अवगत करवा दिया गया है।

जुलाई 2015 में हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एसजे वजीफदार के आदेश पर बनाई गई कमेटी में जस्टिस एसके मित्तल, जस्टिस हेमंत गुप्ता, जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस राजीव भल्ला शामिल थे। ज्वाइंट रजिस्ट्रार (बजट एंड सेलरी) रेणु कालिया ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस के आदेशों का हवाला देते हुए कमेटी के गठन के आर्डर जारी किए थे।

पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की इस समिति की रिपोर्ट के बाद अब हरियाणा सरकार के अरमानों को झटका लगा है वहीं दक्षिण हरियाणा में अलग से हाईकोर्ट की मांग को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री राव इंद्रजीत सिंह भी मांग उठा चुके हैं। लेकिन अब उनकी उम्मीदों पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है।

 

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