नहर में नाला बनाकर बरसाती पानी डालने का मामला पहुंचा हाइकोर्ट, बरसाती पानी को ढाल बनाकर गंदे पानी को नहर में डालने की है योजना

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Pradeep Dhankar, Yuva Haryana

Bahadurgarh, 29 March, 2019

बहादुरगढ़ में बरसाती नाले का पानी नहर में डालने का मामला अब पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने नगर परिषद बहादुरगढ़, नहरी विभाग और प्रदूषण नियंत्रण विभाग समेत 9 विभागों के अधिकारियों को नोटिस जारी किया है और अधिकारियों को 9 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर होने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही सुनवाई से 3 दिन पहले लिखित में जवाब दाखिल करने की हिदायत भी दी गई है।

दरअसल बहादुरगढ़ के सेक्टर 7 में बरसात के दिनों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए नगर परिषद के अधिकारियों ने नाला बना कर उसका पानी बहादुरगढ़ की प्यास बुझाने वाली इकलौती बहादुरगढ़ माइनर में डालने का प्लान तैयार किया था। नाले का निर्माण अब आखरी चरण में है। यहां के स्थानीय निवासियों ने भी इस नाले को बनाने का विरोध किया था। लोगों का कहना था कि बरसात के दौरान जल भराव के कारण पानी में सीवरेज के साथ- साथ है। अन्य बहुत सा कूड़ा करकट पानी में मिक्स हो जाएगा और जब यह पानी नाले से होकर मैहर में जाएगा तो यह लोगों के घरों में पीने के पानी के जरिए वापस पहुंच जाएगा। जिससे लोगों के बीमार होने का खतरा बन सकता है।

लोगों ने जब विरोध किया तो जन स्वास्थ्य विभाग ने भी बहादुरगढ़ नगर परिषद को नोटिस जारी कर काम रोकने के आदेश दिए थे।  लेकिन नगर परिषद बहादुरगढ़ के अधिकारियों ने किसी की नहीं सुनी। तब जाकर बहादुरगढ़ के स्थानीय लोगों को पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। हाई कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए बहादुरगढ़ नगर परिषद के साथ साथ 9 विभागों को नोटिस जारी किया है।

जिनमें मुख्य सचिव सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, चीफ इंजीनियर सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन, शहरी स्थानीय निकाय निदेशक, जन स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, एक्सईएन जन स्वास्थ्य विभाग, एक्सईएन वाटर सर्विस डिविजन बहादुरगढ़ और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के आर.ओ. शामिल है।

नगर परिषद एवं अन्य विभाग के अधिकारियों को 9 अप्रैल को कोर्ट में हाजिर होने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सुनवाई की तारीख से 3 दिन पहले तक सभी को लिखित में जवाब दाखिल करने की हिदायत भी दी है। स्थानीय लोगों को अब पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट से ही न्याय मिलने की उम्मीद है क्योंकि विभिन्न विभागों के अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट कर के थक गए थे। लेकिन लोगों को नुकसान पहुंचाने वाले इस प्रोजेक्ट को किसी भी विभाग ने रोकने की कोशिश नहीं की।

 

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