हाईकोर्ट का फैसला- प्यार में सैक्सुअल रिलेशन ‘रेप’ नहीं..

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Yuva Haryana

Goa, 3 April, 2018

बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने स्पष्ट तौर पर ये कह दिया है कि गहरे प्रेम में बने शारीरिक संबंध को ‘रेप’ नहीं कहा जा सकता।

जब इस बात के सुबूत हों कि महिला और पुरुष के बीच प्रेम संबंध था, तो उस स्थिति में महिला द्वारा गलत तथ्यों के आधार पर शारीरिक संबंधों की व्याख्या बलात्कार के तौर पर नहीं की जा सकती। ऐसे संबंध को बलात्कार बताकर पुरुष को आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

2013 के योगेश पालेकर केस में उसी की प्रेमिका द्वारा रेप का अरोप लगा था। जिसके बाद अदालत ने उसे 7 साल जेल और 10 हजार का जुर्माना भरने को कहा था।

योगेश ने हाईकोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की थी, जिसमें सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने आरोपी की सजा और जुर्माने को रद्द कर दिया है।

क्या था मामला –

महिला ने आरोप लगाया था कि योगेश अपने घर वालों से मिलवाने के लिए उसे अपन घर ले गया था, जहां उनके बीच प्रेम संबंध बने।

जिसके बाद दोनों के बीच शारीरिक संबंध का सिलसिला शुरू हो गया और 3-4 बार उनके बीच संबंध भी बने।

बाद में योगेश ने महिला को ये कहते हुए शादी से इनकार कर दिया कि वो नीचि जाति से है।

जिसके बाद महिला ने आरोपी के खिलाफ बलात्कार का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत में लिखा कि वो संबंध बनाने पर इसलिए राजी हुई क्योंकि पालेकर ने उससे शादी का वादा किया था।

जस्टिस सी. वी. भदांग ने पाया कि सबूत साफ तौर दिखाते हैं कि सहमति सिर्फ पालेकर के वादों पर ही नहीं बनी थी, बल्कि वो दोनों के बीच प्यार था और महिला की भी पूरी सहमती थी।

यहां तक कि रेप की शिकायत के बाद भी दोनों में संबंध जारी रहे।

लिहाजा ये साफ देखा जा सकता है कि संबंध बनाने के लिए दोनों के बीच सहमति थी।

 

 

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