हिंदी हमारा आत्मसम्मान, शब्दकोश है इसका खान

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@Chetna Sharma

भारत में सभी त्यौहार धूमधाम से बनाए जाते हैं फिर वह सामाजिक हो अथवा धार्मिक। हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है। हिंदी दिवस के रूप में ,हमारी राजभाषा को सम्मान देने के लिए।

पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कहा था” 13 सितंबर 1949 को बहस के वक्त- किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान नहीं होता कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती, भारत के हित में यही है की हम इस राष्ट्र की आत्मा को पहचाने वह आत्मविश्वास के साथ हिंदी अपनाएं। परंतु भारत में ही अंग्रेजी बोलना सम्मान और हिंदी बोलना शर्म की बात मानी जाती है बेशक हिंदी हमारी राजभाषा है। हिंदी बोलने वाला व्यक्ति समाज में सबसे निचले पायदान पर देखा जाता है ।

स्कूलों में भी अंग्रेजी भाषा का प्रयोग ही अनिवार्य माना जाता है। वरना शिक्षक भुगतान करने को कहते हैं वही हिंदी प्रयोग करने वाले बच्चे दंड के भागीदार बनते हैं। जब की अंग्रेजी भारतीयों की मातृभाषा नहीं फिर भी हर भारतीय के दिल दिमाग फोन, बैग, कपड़ों सभी में पाई जाती है। हिंदी का प्रयोग यदि कभी होता भी है तो केवल हिंदी दिवस को छोड़कर तो वह है 15 अगस्त 26 जनवरी ।विद्यालय में बच्चे अंग्रेजी भाषा ज्ञान को रटते हैं जबकि हिंदी एक मात्र विषय बनकर रह गया है। अंग्रेजी का ज्ञान सभी को उचित रूप से नहीं हो पाता क्योंकि घर में माता पिता, दादा दादी को हिंदी भाषा प्रयोग करते देखते हैं ।

विद्यालय में अंग्रेजी के द्वारा बच्चे अपने विचार अभिव्यक्त नहीं कर पाते इस स्थिति में बेचारी हिंदी सफेद बालों की चांदनी लिए अपने ही घर में एक कोने में अस्तित्वहीन सी बैठी रहती है उसे किसी दिन कोई यह ना कह दे यहां तुम्हारा कुछ काम नहीं है। क्या तुम्हें हिंदी दिवस रुपए वृद्धा आश्रम छोड़ आए ?

भाषा चाहे अंग्रेजी हो अथवा हिंदी या फ्रेंच स्पेनिश या कोई अन्य भाषा केवल भाषा होती है अपने विचारों को व्यक्त करने का केवल एक माध्यम है परंतु हमारी हिंदी इतना इतना समृद्ध इतिहास लिए हुए भी आज अपने ही घर में बेचारी सी प्रतीत होती है और सभी अपनी मातृभाषा को छोड़ एक अंधी दौड़ में शामिल होने के लिए दौड़ रहे हैं।

हिंदी हमारा आत्मसम्मान,

शब्दकोश है इसका खान,

मुक्त कंठ लगा तू तान ,

लज्जा नहीं तू कर अभिमान,

स्वप्न नहीं है हकीकत मान,

तम के यह ना है सामान,

प्रकाश पुंज सा उदयीमान,

क्यों चमके चक्षु श्रीमान,

फोटो पर लो इसको थाम,

पिंजरे में ना इसको बांध,

नवयौवना ना इसे जान,

यह तो है देश का स्वाभिमान ,

हिंदी पर हमें अभिमान।।

मातृभाषा है यह तू जान ,

वेदना का अब ले संज्ञान,

ठुकराना तू निर्बल मान,

अस्तित्व इसी से क्यों ना भान,

हर प्रांत में विद्यमान,

मातृभाषा है यह ना मेहमान,

हिंदी ही इस राष्ट्र की शान,

हिंदी पर हमें  है अभिमान।।

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