धान खरीद को लेकर हुड्डा का सरकार पर तीखा हमला, बोले- किसानों के साथ धोखा कर रही सरकार

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Sahab Ram,Yuva Haryana
Chandigarh, 19 Nov, 2019

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के ब्यान कि ‘‘सरकार ने मण्डियों से किसानों का सारा धान खरीद लिया है’’ पर प्रतिक्रिया देते हुए हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि यह किसानों के साथ सरासर धोखा है। 26 अक्टूवर के बाद सरकारी ऐजेंसियों ने दिखावा मात्र धान की खरीद की है। आज भी धान कई मंडि़यों में पड़ा हुआ है, जो खरीदा नहीं जा रहा। इस सम्बन्ध में अभी भी धान कई मण्डियों के बाहर पड़ा हुआ है, उनकी फोटो भी संलग्न है। उन्होंने शंका व्यक्त करते हुए कहा कि कई हजार क्विंटल परमल धान, जो सरकारी खरीद के इंतजार में था, मंडि़यों से उठकर राईस मिलों में कैसे पहुंच गया ? सरकारी खरीद की अंतिम तिथि 15 नवम्बर जाने के बाद आढतियों और किसानों में बेचैनी बनी हुई है। कारण है कि आढ़तियों ने सरकारी खरीद के भरोसे पर मंडि़यों से किसानों की फसल को राईस मिलों में पहुंचा दिया। लेकिन अब एजेंसियों ने अपने रिकार्ड में उसे लिखने से हाथ खड़े कर दिए हैं। मंड़ी में धान की रिकार्डिंग पर अधिकारी बेतुके तर्क देकर इस फसल को सरकारी एजेंसी के खाते में लिखने से आना-कानी कर रहें हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि कई मंडि़यों से आढतियों और किसानों ने उन्हें इस गंभीर समस्या बारे बताया और समाधान करने के लिए अनुरोध किया। किसान को केवल वजन व रेट की कच्ची पर्ची आढ़तियों ने दी हुई है। सवाल उठता है कि अब उन किसानों को पेमेंट कैसे होगी ? इस सम्बंध में राईस मिर्ल्स भी पल्ला झाड़ रहें हैं। राईस मिर्ल्स तर्क दे रहें हैं कि इस फसल को उन्होंने सरकारी एजेंसी पर लिखवाने के आश्वासन पर लिया था। उन्होंने कहा कि इस बार सरकारी ऐजेंसियों द्वारा खरीद किए गए धान की किसी निष्पक्ष ऐजेंसी से जांच करवानी चाहिए और किसानों व आढतियों की परेशानियों को जल्द से जल्द दूर करना चाहिए तथा जो धान अभी भी मंडि़यों में पड़ा है उसे भी तुरन्त खरीदना सुनिश्चित करें। जो धान कांग्रेस काल में 5 से 6 हजार रूपये बिकता था, आज भी मंडि़यों में 22 सौ से 25 सौ रूपये में रूल रहा है।

पूर्व सीएम हुड्डा ने कहा कि प्रदेश की सरकार ने किसान की फसल की राशनिंग कर दी है। यह किसानों के साथ बेहुदा मजाक किया गया है। किसान की लागत दिनोंदिन बढती जा रही है और सरकार उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं दे रही। जबकि चाहिए तो यह था कि किसान को मुनाफे के लिए एमएसपी से अधिक दाम मिलता। उन्होंने कहा कि जो दुर्दशा किसान की भाजपा सरकार में हुई है, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। धान, कपास, बाजरा और गन्ना उत्पादक किसान आज मारा-मारा फिर रहा है। लेकिन उसकी फसल के लिए उचित दाम मिलना तो दूर, कभी नमी के बहाने और कभी अन्य कारणों से न्यूनतम दाम भी समय पर नहीं मिल रहा। उन्होंने कहा कि विपक्ष बहुत मजबूत है, किसानों को न्याय दिलवाने के लिए हम सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठायेंगे।

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