हॉट लोकसभा सीटः सोनीपत में इस बार मुकाबला होगा कड़ा, बीजेपी ने रमेश कौशिक को मैदान में दोबारा उतारा

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 06 April, 2019

हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव में सोनीपत लोकसभा की सीट कुछ खास रहने वाली है। इस सीट पर बीजेपी ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतार दिया है वहीं अन्य पार्टियां अभी इंतजार में हैं। बीजेपी ने आज ही मौजूदा सांसद रमेश कौशिक पर दोबारा विश्वास जताया है वहीं कांग्रेस की तरफ से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को चुनावी मैदान में उतारने की चर्चाएं जोरों-शोरों से चल रही है।

सोनीपत लोकसभा सीट पर बीजेपी ने पिछली लोकसभा चुनाव में बाजी मार ली थी। जाटलैंड की इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में कौशिक यानी ब्राह्मण नेता ने बाजी मार ली थी। इस बार मुकाबला इस सीट पर कड़ा होने की संभावना है। इधर लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के सुप्रीमो राजकुमार सैनी ने भी सोनीपत लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के संकेत दिये हैं।

इस लोकसभा क्षेत्र के इतिहास के बारे में थोड़ा जानते हैं। यह हरियाणा का वह लोकसभा क्षेत्र है जो भारतीय जनता पार्टी के लिए हमेशा से ही कुछ हद तक मजबूत रहा है। वरिष्ठ नेता स्वर्गीय किशन सिंह सांगवान यहां से लगातार तीन बार चुनाव जीते जिनमें से दो बार वे भाजपा की टिकट पर लड़े थे। फरीदाबाद के अलावा यह इकलौती लोकसभा सीट है जहां भाजपा ने लगातार दो चुनाव जीते। दरअसल किशन सिंह सांगवान लोकदल के नेता थे और 1998 में यहां से हरियाणा लोकदल की टिकट पर सांसद बने थे लेकिन 1999 में भाजपा से गठबंधन के तहत यह सीट भाजपा को दे दी गई। चुनाव लड़ने के लिए किशन सिंह सांगवान भाजपा में चले गए और अगले दोनों चुनाव उन्होंने भाजपा की टिकट पर जीते। 2004 में चुनी गई लोकसभा में तो वे हरियाणा से भाजपा के अकेले सांसद थे। सोनीपत सीट जाट नेताओं के दबदबे वाली सीट रही है और सिर्फ 1996 में अरविंद शर्मा ही अन्य जाति से सांसद बने थे। 2014 में रमेश कौशिक ने एक बार फिर जाटलैंड की इस सीट में ब्राह्मण नेतृत्व की वापसी करवाई। इनके अलावा यहां हुए 12 चुनावों में से 10 बार जाट ही सांसद बने हैं।

सोनीपत लोकसभा सीट 1977 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले इस क्षेत्र का कुछ हिस्सा झज्जर लोकसभा सीट में था जो 1951 से 1971 तक रही। झज्जर सीट से वरिष्ठ नेता और चै देवीलाल के साथी रहे प्रो शेर सिंह दो बार सांसद बने थे। बाद में चै देवीलाल भी 1980 में सोनीपत सीट से सांसद बने। देवीलाल को 1983 उपचुनाव और 1984 लोकसभा आम चुनाव में सोनीपत से हार का सामना भी करना पड़ा। चै भजनलाल के करीबी रहे धर्मपाल मलिक भी यहां से दो बार (1984, 1991) सांसद बने। मौजूदा समय में सोनीपत लोकसभा में पूरा सोनीपत जिला और जींद जिले के सफीदों, जींद और जुलाना विधानसभा क्षेत्र आते हैं।

2014 चुनाव के लिए भाजपा ने यहां से पूर्व विधायक रमेश कौशिक को टिकट दी जो कुछ महीने पहले ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। रमेश कौशिक 1996 में सोनीपत जिले की कैलाना सीट से हविपा के और 2005 में सोनीपत जिले की ही राई सीट से कांग्रेस के विधायक बने थे। रमेश कौशिक को लोकसभा की टिकट मिलना यहां के पुराने भाजपाईयों को लिए हैरानी का विषय था लेकिन कौशिक ने जल्द ही ज्यादातर को राजी कर लिया। मोदी लहर के सहारे कौशिक ने यहां के गन्नौर, राई, सोनीपत, सफीदों और जींद विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोट लिए जबकि खरखौदा और बरोदा में उन्हें कांग्रेस और इनेलो के मुकाबले कम वोट मिले। सोनीपत विधानसभा क्षेत्र ने तो उन्हें लगभग 30 हजार वोटों की बढ़त दी।

विशेष बात यह रही कि चुनाव के वक्त भी इस क्षेत्र में सिर्फ सोनीपत सीट से ही भाजपा का विधायक था और 5 महीने बाद हुए विधानसभा चुनाव में भी सिर्फ सोनीपत से ही भाजपा जीती। इस लिहाज से देखें तो विधानसभा के स्तर पर यह भाजपा के लिए न्यूनतम सुधार वाला क्षेत्र रहा। रमेश कौशिक को कुल 35.23 प्रतिशत वोट मिले जबकि 2009 में भाजपा की टिकट पर लड़े किशन सिंह सांगवान को करीब 25ः वोट ही मिले थे। उनकी जीत करीब 77 हजार वोटों यानी लगभग 8ः की रही जो हरियाणा में जीते भाजपा उम्मीदवारों में सबसे कम थी। कांग्रेस के गढ़ और इनेलो के मजबूत कार्यकर्ताओं वाले इस क्षेत्र में रमेश कौशिक की जीत एक महत्वपूर्ण घटना रही।

कांग्रेस पार्टी ने गोहाना से विधायक जगबीर मलिक को लोकसभा की टिकट दी थी। जगबीर मलिक पहली बार 1996 में गोहाना से ही विधायक बने थे और उन्होंने समता पार्टी के किशन सिंह सांगवान को हराया था। साल 2000 के विधानसभा चुनाव में मलिक को गोहाना में इनेलो के राजकुमार सैणी से हार देखनी पड़ी थी। जगबीर मलिक दोबारा 2008 में उस वक्त विधायक बने जब धर्मपाल मलिक कांग्रेस छोड़ हजका में चले गए थे और गोहाना में उपचुनाव हुआ था। इसके बाद 2009 में वे फिर से गोहाना से ही विधायक बने।

2009 में सोनीपत से सांसद बने जितेंद्र मलिक के इस बार चुनाव लड़ने से मना कर देने और गन्नौर से विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए पार्टी ही छोड़ देने के बाद कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के करीबी जगबीर मलिक को टिकट थमा दी। चुनाव के समय सोनीपत शहर को छोड़कर जिले की पांच सीटों पर कांग्रेस के विधायक थे और यही स्थिति 5 माह बाद हुए विधानसभा चुनावों में भी बनी रही। इन्हीं 5 सीटों पर कांग्रेस दोबारा जीती। इस पैमाने पर यह लोकसभा क्षेत्र कांग्रेस पार्टी के लिए विधानसभा स्तर पर सबसे ज्यादा संतोषजनक रहा।

रोहतक क्षेत्र में भी कांग्रेस अपनी सभी सीटें नहीं बचा सकी थी। जगबीर मलिक को खरखौदा, गोहाना और बरोदा विधानसभा क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वोट मिले जबकि गन्नौर, राई और सोनीपत में वे दूसरे स्थान पर रहे। उन्हें जींद, जुलाना और सफीदों में काफी कम वोट मिले। चुनाव में जगबीर मलिक ने 27.37ः वोट लिए जबकि 2009 में पार्टी उम्मीदवार जितेंद्र मलिक को 47.57ः वोट मिले थे। वोटों की संख्या में लगभग 40 फीसदी की यह कमी कांग्रेस के लिए चुनौती वाला पहलू थी।

इनेलो की तरफ से सोनीपत सीट पर लोकसभा उम्मीदवार थे पदम सिंह दहिया जो काफी समय से सोनीपत जिले के पार्टी प्रधान थे। पदम दहिया 2000 में रोहट सीट से विधायक बने थे जिसे बाद में खत्म कर खरखौदा आरक्षित सीट बना दी गई। पदम सिंह ने रोहट से 1996 और 2005 के चुनाव भी लड़े थे और हार गए थे। लोकसभा चुनाव के समय इस क्षेत्र में जींद जिले की तीनों सीटों सफीदों, जींद और जुलाना में इनेलो के विधायक थे जिनमें से जींद और जुलाना सीटें पार्टी ने अक्तूबर 2014 के चुनाव में फिर से जीती। पदम दहिया को जुलाना सीट पर सबसे ज्यादा वोट मिले जबकि सफीदों, बरोदा, खरखौदा सीटों पर वे दूसरे नंबर पर रहे। दहिया को सोनीपत और गोहाना सीटों पर काफी कम वोट मिले। उन्हें मिले वोट कुल मतदान का 26.83ः था और वे जगबीर मलिक से कुछ वोट कम मिलने की वजह से तीसरे स्थान पर खिसक गए थे। इस चुनाव में इनेलो के लिए संतोष की बात यह रही कि उनका उम्मीदवार कहीं भी तीसरे स्थान पर नहीं खिसका। पदम दहिया को सभी 9 विधानसभा क्षेत्रों में पहले या दूसरे नंबर के वोट मिले। 2009 में इनेलो ने इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था और इनेलो-भाजपा गठबंधन के यहां उम्मीदवार किशन सिंह सांगवान थे। अब 2014 में इनेलो के लोकसभा उम्मीदवार रहे पदम सिंह दहिया ने अपना पाला बदलकर जेजेपी का दामन थाम लिया है।

सोनीपत सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जय सिंह ठेकेदार थे जिन्होंने करीब 50 हजार वोट लिए और वे चौथे स्थान पर रहे। जय सिंह को सर्वाधिक 8666 वोट सोनीपत विधानसभा क्षेत्र से मिले।

सोनीपत लोकसभा सीट पर 2014 में विशेष बात यह रही कि सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवार पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे थे। भाजपा के रमेश कौशिक, कांग्रेस के जगबीर मलिक और इनेलो के पदम सिंह दहिया का यह पहला लोकसभा चुनाव था। खास बात यह भी है कि तीनों ही हरियाणा विधानसभा के सदस्य रह चुके थे। यह बात भी दिलचस्प रही कि सोनीपत जिले में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के वोट काफी घटे जबकि विधानसभा चुनाव आते ही यहां के लोगों ने कांग्रेस को फिर से 5 सीटें दी।

इस बार के लोकसभा चुनाव में यहां पर मुकाबला इसलिए भी रोचक होने की संभावना है क्योंकि इस सीट पर हरियाणा के दिग्गज नेताओं के चुनावी दंगल में उतरने की संभावना है। ऐसे में इस सीट पर चुनावी मुकाबले के बीच हरियाणा में नई पार्टी आई जेजेपी भी जोर-शोर से तैयारी कर रही है। यहां पर जेजेपी के दिग्गज नेता इस जाटलैंड में अपनी छाप छोड़ने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

 

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