हॉट लोकसभा सीटः कांग्रेस के लिए चुनौती भरा होगा इस बार रोहतक को जीतना

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 11 March, 2019

हरियाणा में लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है। हरियाणा में एक ही चरण में दसों लोकसभा सीटों पर 12 मई को चुनाव होंगे। देशभर में लोकसभा चुनाव के नतीजे 23 मई को आएंगे। हरियाणा में इस बार लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी। हरियाणा की दसों लोकसभा सीटों में हिसार और रोहतक लोकसभा सीट को इस बार ज्यादा हॉट सीट माना जा रहा है। इन दोनों सीटों पर सभी दलों की पूरी नजर रहेगी।

रोहतक लोकसभा क्षेत्र में नौ विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिसमें रोहतक, महम, कलानौर, गढ़ी सांपला किलोई, झज्जर, बेरी, बहादुरगढ़, बादली और कोसली विधानसभा क्षेत्र हैं।

आज सबसे पहले प्रदेश की हॉट लोकसभा सीट रोहतक की बात करते हैं। यहां पर मौजूदा सांसद कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा है। दीपेंद्र हुड्डा 2005 उपचुनाव, 2009 और 2014 में चुनाव जीत चुके हैं। इस बार उनका मुकाबला यहां पर कड़ा होने की संभावना है।

रोहतक लोकसभा सीट हमेशा से ही राजनीतिक मायनों में अहम सीट रही है। यहां पर जाट जाति से ही सांसद बने हैं। इस सीट पर चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा, लहरी सिंह, प्रो. शेर सिंह, हरद्वारी लाल, चौधरी देवीलाल और भूपेंद्र सिंह हुड्डा जैसे बड़े नेता सांसद रह चुके हैं। रणबीर हुड्डा 1951 और 1957 में सांसद रह चुके हैं। शेर सिंह 1977 में यहां से सांसद रह चुके हैं। 1989 में यहां से चौधरी देवीलाल सांसद रह चुके हैं। हरद्वारी लाल 1984 और 1989 उपचुनाव में यहां से जीते हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा यहां पर 1991, 1996 और 1998 में चुनाव जीत चुके हैं। इसके बाद दीपेंद्र हुड्डा 2005 के उपचुनाव, 2009 और 2014 में सांसद बने हैं।

रोहतक लोकसभा सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के 1991 से चुनाव लड़ना शुरु करने के बाद इस बीच सिर्फ 1999 में एक बार ही चुनाव हारा है। हुड्डा परिवार के सामने चौधरी देवीलाल, कैप्टन अभिमन्यु, नफे सिंह राठी और ओमप्रकाश धनखड़ जैसे नेता भी चुनाव जीतने में नाकामयाब रहे हैं। हालांकि चौधरी देवीलाल पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा की लोकसभा चुनाव में जीत सिर्फ 2664 और 383 वोटों की रही है। लेकिन हर हाल में यहां पर हुड्डा परिवार का ही दबदबा रहा है।

 

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की तरफ से दीपेंद्र सिंह हुड्डा को ही पार्टी की तरफ से चुनावी मैदान में उतारा गया था। दीपेंद्र हुड्डा ने 2005 के उपचुनाव में जीत दर्ज करने के बाद 2009 के चुनाव में भारी मतों से जीत दर्ज की थी, पहले चुनाव में उन्होने भाजपा के कैप्टन अभिमन्यु को दो साल 30 हजार वोटों से हराया था, जबकि 2009 में इनेलो के नफे सिंह राठी पर उनकी जीत 4 लाख 45 हजार वोटों की रही थी। यह 2009 के चुनाव में देश भर में सबसे बड़ी जीत थी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार रहते दीपेंद्र हुड्डा की लोकप्रियता चरम पर रही। इसी वजह से हरियाणा और पूरे देश में मोदी लहर के बावजूद दीपेंद्र हुड्डा के लिए यह सीट सुरक्षित रही। लोकसभा चुनाव के वक्त सभी नौ विधानसभा सीटों पर कांग्रेस के विधायक थे ऐसे में कांग्रेसी झुकाव वाला यह पहला संसदीय क्षेत्र था। हालांकि 2014 के चुनाव में कांग्रेस इन नौ सीटों में से सिर्फ पांच ही जीत पाई।

इस संसदीय क्षेत्र में रोहतक, बहादुरगढ़, बादली और कोसली की सीट कांग्रेस के हाथ से निकल गई। दीपेंद्र हुड्डा को महम, गढ़ी सांपला किलोई, रोहतक, कलानौर, बादली, झज्जर और बेरी में अच्छी बढ़त मिली। बहादुरगढ़ और कोसली में वो दूसरे स्थान पर रहे। खासकर कोसली में तो भाजपा उम्मीद्वार ने यहां पर 40 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त हासिल की। दिल्ली से सटे बहादुरगढ़, बादली और कोसली में कांग्रेस के प्रति कम रुझान की बदौलत यहां पर भाजपा विधायक चुने गए थे। साथ ही रोहतक विधानसभा में भी कांग्रेस की हार हो गई थी जो कि काफी हैरान करने वाली थी। दीपेंद्र हुड्डा ने रोहतक लोकसभा क्षेत्र में 46 फीसदी से ज्यादा वोट लिए और करीब 1 लाख 70 हजार वोटों से भाजपा के ओम प्रकाश धनखड़ को हरा दिया था।

 

दीपेंद्र हुड्डा के बारे में आम लोगों की राय है कि वो मिलनसार नेता है और स्वतंत्रता सेनानी परिवार में जन्मे हैं। दीपेंद्र हुड्डा ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और वे अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी से एमबीए भी कर चुके हैं।

रोहतक लोकसभा सीट पर अगर बीजेपी की बात करें तो यहां पर बीजेपी के ओमप्रकाश धनखड़ साल 2014 के चुनावी मैदान में थे। ओपी धनखड़ का यह पहला लोकसभा चुनाव था। ओमप्रकाश धनखड़ भाजपा के किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं और फिलहाल वो बादली से विधायक हैं। और कैबिनेट में मंत्री भी हैं। ओपी धनखड़ दादरी विधानसभा क्षेत्र से भी अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। पहली बार लोकसभा चुनाव में उतरे ओपी धनखड़ को 2014 के लोकसभा चुनाव में आम जनता से अच्छा समर्थन मिला था लेकिन फिर भी वो कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा की लोकप्रियता को यहां पर कम नहीं कर पाए थे।

 

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के ओपी धनखड़ के मजबूती से चुनाव लड़ने का यह फायदा हुआ कि जिस संसदीय क्षेत्र में भाजपा का एक भी विधायक नहीं था वहां पर कुछ ही समय बाद हुए विधानसभा चुनाव में 9 विधानसभा क्षेत्रों में से 4 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने चार सीटें जीत ली। रोहतक संसदीय क्षेत्र के बहादुरगढ़ में भाजपा के नरेश कौशिक, बादली से खुद ओपी धनखड़, कोसली से बिक्रम ठेकेदार और रोहतक से मनीष ग्रोवर विधायक चुनकर आए।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के ओपी धनखड़ को सबसे ज्यादा बढ़त कोसली विधानसभा क्षेत्र से 40 हजार से ज्यादा वोटों की बढ़त मिली थी, वहीं बहादुरगढ़ में भी वो वोट लेने में पहले नंबर पर रहे थे। रोहतक में ओपी धनखड़ के 42 हजार से ज्यादा वोट मिले थे। ओपी धनखड़ ने यहां पर 30 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किये थे। जो कि हुड्डा के गढ़ में काफी वोट थे। आपको बता दें कि साल 2009 का चुनाव यहां पर भाजपा ने नहीं लड़ा था और गठबंधन के तहत इनेलो के हिस्से में यह सीट छोड़ी थी। इस सीट पर भाजपा का कभी सांसद नहीं बना है। हालांकि 1962 में जनसंघ की टिकट पर मुख्तयार सिंह मलिक और 1971 में जनसंघ की टिकट पर चौधरी लहरी सिंह सांसद बने थे। भाजपा बनने के बाद पार्टी के लिए सर्वश्रेष्ट प्रदर्शन के तौर पर यहां कैप्टन अभिमन्यु दो बार उपविजेता जरुर रहे हैं। बताते हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में ओपी धनखड़ की सक्रियता की वजह से हुड्डा परिवार को ज्यादा समय रोहतक में ही देना पड़ा था जिस वजह से उनको हरियाणा की अन्य लोकसभा क्षेत्रों में ज्यादा समय नहीं दे पाए और इसका कहीं ना कहीं भाजपा को फायदा हुआ।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में इनेलो की तरफ से शमशेर सिंह खरकड़ा को प्रत्याशी बनाया गया था। जो कि महम में अपनी राजनीति करते रहे हैं। हालांकि बाद में उन्होने इनेलो को अलविदा कह दिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे। शमशेर सिंह खरकड़ा ने 2009 में महम से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा था और कांग्रेस के आनंद सिंह दांगी से करीब सात हजार वोटों से हार गए थे। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले ही शमशेर सिंह खरकड़ा ने इनेलो ज्वाइन की थी और रोहतक लोकसभा से इनेलो की टिकट ले ली थी। खरकड़ा को पार्टी में शामिल करवाने के लिए अभय सिंह चौटाला महम की एक जनसभा में अचानक पहुंचे थे।

साल 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त इनेलो का इस संसदीय क्षेत्र में कोई विधायक नहीं था। और यही स्थिति कुछ समय बाद हुए विधानसभा चुनाव में भी बनी रही। इनेलो रोहतक संसदीय क्षेत्र में अपना खाता नहीं खोल पाई थी। लोकसभा चुनाव में शमशेर खरकड़ा महम को छोड़कर सभी जगहों पर तीसरे स्थान पर रहे। महम में वो दीपेंद्र हुड्डा से दूसरे स्थान पर रहे। 2014 के लोकसभा चुनाव में शमशेर खरकड़ा को साढे चौदह फीसदी के करीब मत प्राप्त हुए थे जो कि साल 2009 में इनेलो के नफे राठी को मिले कुल वोटों से भी दो फीसदी कम थे। हालांकि बाद में वो मोदी लहर में बह गए थे और बीजेपी में शामिल होकर महम से चुनाव लड़ा था लेकिन वो यहां पर भी जीत दर्ज नहीं कर पाए और कांग्रेस के आनंद सिंह दांगी से विधानसभा चुनाव हार गए थे।

आम आदमी पार्टी की तरफ से नवीन जयहिंद चुनावी मैदान में थे। हालांकि बाद में उन्होने पार्टी की तरफ से प्रदेशाध्यक्ष बना दिया गया था। युवा नेता नवीन जयहिंद का यहां से ज्यादा समर्थन नहीं मिल पाया था और वो करीब साढे चार फीसदी वोट ही ले पाए थे। नवीन जयहिंद को सबसे ज्यादा वोट रोहतक विधानसभा क्षेत्र से ही मिले थे ।

इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से दीपेंद्र हुड्डा की टिकट पक्की मानी जा रही है वहीं बीजेपी, इनेलो, जेजेपी और आप की तरफ से अभी तक पत्ते नहीं खोले गए हैं। हालांकि लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान हो गया है, ऐसे में अब टिकट के चाहने वालों की सक्रियता बढ़ गई है।

 

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