जो सांसद खुद दाग़ी है वो एक जज के खिलाफ महाभियोग कैसे ला सकते है-हाईकोर्ट में एडवोकेट HC अरोड़ा

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बुधवार को हाईकोर्ट में एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने अब हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा-3 को रद्द किये जाने की मांग की है। एडवोकेट अरोड़ा ने दायर याचिका में इस एक्ट के तहत सुप्रीमकोर्ट या हाईकोर्ट के जज को उसके पद से हटाए जाने के प्रस्ताव पर ही सवाल उठा दिए हैं।

अरोड़ा ने दायर याचिका में कहा है कि संविधान ने ही न्यायपालिका को स्वतंत्र रखा है। ऐसे में वह सांसद जो खुद आपराधिक मामलों में शामिल हैं या वकील हैं वो कैसे महाभियोग प्रस्ताव ला सकते हैं। फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के खिलाफ जो महाभियोग प्रस्ताव दिया गया था वह रद्द होना तय ही था।

याचिका में एचसी अरोड़ा ने सवाल किया है कि जो सांसद खुद संगीन अपराधों में आरोपी हैं और अदालतों में केसों का सामना कर रहे हैं क्या वह किसी सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के जज को उसके पद से हटाए जाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दे सकते हैं।

प्रस्ताव के लिए राज्य सभा के 50 तो लोकसभा के 100 सांसद सुप्रीम कोर्ट या किसी हाईकोर्ट के जज को उसके पद से हटाए जाने सम्बंधित सभा के सभापति को नोटिस दे सकते हैं। अरोड़ा के अनुसार इस समय 228 सांसदों पर आपराधिक मामले चल रहे हैं जो अदालतों में लंबित हैं क्या यह सांसद ऐसा प्रस्ताव दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कई सांसद वकील भी हैं बतौर वकील किसी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज को उसके पद से हटाए जाने के प्रस्ताव में कैसे वह शामिल हो सकते हैं। यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला बनता है।

अरोड़ा ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ राज्य सभा के 64 सांसदों द्वारा लाये गए महाभियोग प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि यह 64 सांसद दोनों सदनों के कुल 797 सांसदों का महज 8 प्रतिशत ही हैं ऐसे में क्या इन्हें सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के किसी जज पर सवाल उठाने का अधिकार दिया जा सकता है इससे सिर्फ न्यायपालिका की गरिमा ही आहात होती है।

लेकिन इस सबके चलते न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को आहात किया गया है लिहाजा अरोड़ा ने Judges (Inquiry) Act, 1968  की धारा-3 को रद्द किये जाने की हाई कोर्ट से मांग की गई है। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट इस मामले पर वीरवार को सुनवाई करेगा।

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