हरियाणा पुलिस में दलित अफसरों की भागादारी न के बराबर, आयोग ने जताई चिंता

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Yuva Haeyana

Haryana, 22-04-2018

हरियाणा पुलिस में आरक्षण के बावजूद अनुसूचित जाति की भागीदारी न के बराबर है। राज्य पुलिस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 10 जिले ऐसे हैं, जहां किसी भी थाने में अनुसूचित जाति के अफसर को कमान नहीं है। इतना ही नहीं, डीआइजी-आइजी और  पुलिस कमिश्नर जैसे महत्वपूर्ण पदों से भी इन अफसरों को दूर रखा गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने इस पर चिंता जताई है।

आयोग के चेयरमैन ने राजकुमार चानना ने प्रदेश के सभी एसपी को मेल कर 23 अप्रैल तक इन अफसरों का ब्योरा मांगा है। इसके तहत पिछले दो साल में अनुसूचित जाति के कितने अधिकारियों को थाने की कमान दी गई या इससे ऊपर लगाया गया, इसकी जानकारी विस्तार से देने को कहा गया है।

सूत्रों के मुताबिक प्रदेश में करीब 310 थाने हैं। इनमें से 30 थानों की कमान अनुसूचित जाति के अफसरों के पास है। चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश के हांसी, चरखी-दादरी, फतेहाबाद, कैथल, झज्जर, सोनीपत, भिवानी, मेवात, नारनौल व जीआरपी में एक भी एसएचओ अनुसूचित जाति का नहीं है।

इसी प्रकार प्रदेश में 219 डीएसपी हैं जिनमें से 126 फील्ड में हैं। इनमें भी अनुसूचित जाति के सिर्फ 13 अफसरों की ही फील्ड में जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश में 70 एसपी और डीसीपी में से 30 फील्ड में हैं।

इनमें अनुसूचित जाति के मात्र 3 अफसरों को ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी हुई है। आयोग ने एससी एंड एसटी एक्ट  रूल्स 1995 एवं संशोधित नियम 2016 का हवाला भी अपनी चिट्ठी में दिया है। पिछले दो साल की पोस्टिंग का अफसरों का ब्योरा मांगा गया है।

आयोग ने अपनी ई-मेल में चेताया है कि अगर मांगा गया ब्योरा निश्चित तिथि तक नहीं दिया गया, तो उन्हें तलब किया जा सकता है। सभी अफसरों को 23 अप्रैल तक ई-मेल के माध्यम से ही यह ब्योरा आयोग को देना है। यह भी पूछा गया है कि अनुसूचित जाति के अफसरों के कितने पद स्वीकृत हैं और कितने खाली पड़े हैं। डीजीपी के मांगने पर भेजा गया था ब्योरा

 

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