Home Breaking हरियाणा में श्रमिकों के कल्याण में नहीं हो रहा पैसा खर्च, दस सालों से भरे पड़े हैं विभाग के भंडार

हरियाणा में श्रमिकों के कल्याण में नहीं हो रहा पैसा खर्च, दस सालों से भरे पड़े हैं विभाग के भंडार

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Yuva Haryana
Chandigarh, 22 March, 2018

लेखा एवं महानियंत्रक परीक्षक ( कैग) ने हरियाणा सरकार को निर्माण श्रमिकों के लिए दिये गए धन को उपयोग ना करने पर सवालों के घेरे में खड़ा किया है. कैग की रिपोर्ट के मुताबिक निर्माण श्रमिकों के वेलफेयर में पर्याप्त पैसे होने के बावजूद क्यों नहीं खर्च किये जा रहे हैं।

विधानसभा में एक जानकारी के मुताबिक हरियाणा भवन निर्माण एवं श्रमिक कल्याण वेल्फेयर में साल 2007 से 2017 के बीच 2535.94 करोड़ रुपये की आमद हुई है. यह अलग अलग तरीके से रजिस्ट्रेशन, मेंबरशिप और अन्य मदों से प्राप्त हुई है. लेकिन कैग की रिपोर्ट में बताया गया है कि इनमें से महज 224.31 करोड़ रुपये की खर्च किये गए हैं।

कैग ने कहा है कि वेल्फेयर बोर्ड 91 फीसदी रकम को खर्च करने में सक्षम नहीं है और ना ही श्रमिकों के कल्याण के लिए किसी प्रकार की स्कीमों का कोई प्रचार किया जा रहा है. कैग ने कहा कि श्रमिकों के लिए बनी स्कीमों का प्रचार ही नहीं किया जा रहा है, जिस वजह से इन स्कीमों का फायदा भी नहीं उठा पा रहे हैं।

इतना ही नहीं कैग ने कहा है कि पांच स्कीमों का फायदा किसी भी श्रमिक को नहीं दिया गया है. इनमें से घर बनाने के लिए सामान खरीदने के लिए अग्रिम राशि, पारिवारिक पेंशन के लिए वित्तीय सहायता, दर्शनीय स्थलों के लिए फ्री यात्रा, सोलर ऊर्जा के लिए वितिय सहायता जैसी कुछ स्कीमें हैं जिनमें साल 2005 से लेकर जनवरी 2016 के बीच कुछ भी खर्च नहीं किया गया। वहीं 31 मार्च 2017 तक भी इसका खाता खाली है।

इन सबके अलावा पांच अन्य स्कीमें जिनमें श्रमिकों के परिवारों को शादी में सहायता, कन्या की शादी में सहायता, दुर्घटना होने पर पेंशन सुविधा, गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए और शारीरिक रूप से विकलांग या मानसिक रूप से मंद बच्चों को वित्तीय सहायता के लिए बनी स्कीमों में मार्च 2005 से लेकर जुलाई 2014 तक करीब 2510 श्रमिकों को लाभ मिला है।

जानकारी के मुताबिक नंबवर 2006 में हरियाणा सरकार ने हरियाणा बिल्डिंग एवं निर्माण श्रर्मिक कल्याण बोर्ड का गठन किया था. इसका मुख्य उद्देश्य श्रमिकों के लिए योजनाएं लाना और उनको इन योजनाओं के जरिये सहायता प्रदान करना था. इस कल्याण बोर्ड के जरिये भी श्रमिकों का भला नहीं हो सका।

अब आलम यह है कि ज्यादातर पूंजी विभाग के पास पड़ी है और गरीब मजदूरों को इसका फायदा ही नहीं पहुंच रहा है।

मौजूदा हालात में जरुरत है कि श्रमिकों के कल्याण के लिए सरकार को कदम उठाने चाहिए और उनके लिए बनी स्कीमों की ज्यादा से ज्यादा जानकारी मजदूरों और श्रमिकों के बीच सांझी करनी चाहिए ताकि इन योजनाओं का लाभ जरुरतमंद श्रमिकों को मिल सके ।

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