फिर दिखी शिक्षा की बदहाली, कोसली में दूसरा स्कूल जहां एक शिक्षक, एक छात्र

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Devender Kumar, Yuva Haryana

Kosli

शिक्षा को लेकर कोसली के बच्चों में रूचि कम है यै सरकार यहां ध्यान नहीं दे रही है। इसका तो खैर पचा नहीं, लेकिन यहां शिक्षा बदहाल जरूर है। इससे पहले भी कोसली के ही राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय लूखी में देखने को मिला था जहां एक शिक्षक तो स्कूल में एक ही छात्रा थी।

वहीं शिक्षा के गिरते स्तर का नमूना जाटूसाना की ढाणी के एक स्कूल में औऱ देखने को मिला। यहां पढ़ने वाले विद्यार्थी दक्ष को किसी से कम नंबर आने की ना तो चिंता है और ना ही उसको कक्षा में पहली पंक्ति की सीट रोकने की फिक्र।

यहां इस छात्र का ना तो कोई दोस्त है ना ही कोई खेलने वाला। यह छात्र या तो पढ़ता है या दोपहर की मिड-डे मिल में मिलने वाली एक प्लेट खाना खा कर रहता है।

कारण है जाटूसाना की ढाणी के प्राथमिक पाठशाला में वर्तमान सत्र में केवल एक बच्चे का दाखिला है और उसको पढाने के लिए एक प्राईमरी अध्यापक और मिड डे मील योजना का भोजन परोसने हेतु एक सहायिका की व्यवस्था है।

दक्ष का कहना है कि स्कूल में दोस्तों का कोलाहल, सीट का झगड़ा, रबड़ पैंसिल का गुम हो जाना आदि घटनाओं का नहीं होना उसको स्कूल का जीवन नीरस बनाता है। काश मेरा भी कोई दोस्त होता जिसके साथ मैं खेलता, झगड़ा करता।

वहीं स्कूल में एकमात्र शिक्षक पवन कुमार की भी समस्याएं कम नही हैँ। उनका कहना है कि 2006 में पहली पोस्टिंग नाहड़ में हुई थी वहां 90बच्चे   थे। बच्चों में प्रतियोगिता करवाकर पढाने और खिलवाने का अपना आनंद होता था। अब एक बच्चे को कैसे पढाऐं और कैसे उनमें प्रतियोगिता की भावना डालकर पढाएं। विभाग की ओर से पौधा रोपण, कहानी सुनाना, खोखो आदि खेल खिलवाने सबंधी आदेशों की पालना भी संभव नहीं हो पाती है। बच्चे नहीं हैं तो अन्य स्टाफ भी नहीं है इसलिए डयूटी करते समय नीरसता स्वभाविक है।

 

राजकीय प्राथमिक पाठशाला में पढ़ने वाले एक बच्चे को हर दिन 3 रूपये 45 पैसे का भोजन मिलता है। इस भोजन को पकाने पर 20 पैसा खर्चा आता है। यह मामला जाटुसाना की ढाणी में बतौर अध्यापक काम कर रहे पवन कुमार ने बताया है कि उन्हें सरकार द्वारा निश्चित किए गए खर्चे में ही मात्र एक बच्चे का भोजन तैयार करवाना पड़ता है। भोजन की मैन्यु अन्य विद्यालयों की तरह ही लागू करना होता है। भोजन में मीठे चावल, चावल-राजमा, सब्जी-पूरी, खीर इत्यादि शामिल है।

इस विद्यालय में भोजन तैयार करने के लिए 3500 रूपये प्रतिमाह मानदेय पर एक कुक और एक हजार रूपये प्रतिमाह मानदेय पर एक डी.टी.एच. चोकीदार है और विद्यार्थि भी मात्र एक ही है। गौरतलब है कि शिक्षा विभाग एक ही बच्चे पर इतना खर्चा कर रहा है। दूसरा स्कूल  दो किलामीटर से अधिक दूर होने के कारण नीति के अनुसार इस स्कूल को न तो बंद किया जा सकता हैं। और न ही शिफ्ट किया जा सकता है।

बता दे कि यहां मिड डे मील बनाने वाली दक्ष की माता गीता ही है। रोजगार के लिए गीता ने अपने बेटे का दाखिला इसी स्कूल में करवा रखा है।

 

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