हरियाणा के मोरनी में विश्व औषधीय वन परियोजना का लोकार्पण, सीएम और बाबा रामदेव रहे मौजूद

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 20 Dec, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रदेश में आयुर्वेद व हर्बल औषधियों को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा हर्बल कारपोरेशन के गठन करने, मोरनी क्षेत्र को ऑर्गेनिक क्लस्टर बनाने तथा जड़ी-बूटियों के लिए एक विश्व स्तरीय नर्सरी स्थापित करने की घोषणा की ताकि प्रदेश में आयुष को बढावा दिया जा सके।
उन्होंने यह घोषणाएं आज मोरनी में विश्व औषधीय वन परियोजना का लोकार्पण करने उपरांत उपस्थित जनसमूह को सम्बोंधित करते हुए की। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के बाद भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को विश्व स्तर पर बढावा दे रही है और इसी कडी में आज हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा पंचकूला जिले के मोरनी क्षेत्र में हरियाणा वन विभाग व पतंजलि योग पीठ के सहयोग से स्थापित विश्व औषधीय वन परियोजना का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर हरियाणा के वन एवं वन्य प्राणी मंत्री राव नरबीर सिंह, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री कर्ण देव काम्बोज के अलावा योग गुरु बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पिछले तीन वर्षों से लगातार इस परियोजना पर कार्य कर रहे वन विभाग व पतंजलि योग पीठ के वैज्ञानिकों के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि मोरनी में वल्र्ड हर्बल फोरेस्ट स्थापित करने की उनकी परिकल्पना को आज धरातल पर क्रियान्वयन किया गया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वनों के साथ-साथ मोरनी क्षेत्र में वनों के औषधीय पौधों के रूप में विविधिकरण करने से इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिलने के साथ-साथ उनकी आय में भी बढ़ौतरी होगी तथा यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति भी बदलेगी।

उन्होंने कहा कि प्रति व्यक्ति आय में हरियाणा देश में कई बड़े राज्यों से अग्रणी है, परंतु मेवात व मोरनी का क्षेत्र प्रति व्यक्ति आय में पीछे है। अब यहां यह परियोजना आने से न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी मोरनी क्षेत्र अपनी पहचान बनाएगा। इसके साथ ही यहां पर्यटन की भी योजनाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि शिवालिक पर्वतीय क्षेत्र हरियाणा की शान है और इस पर्वतीय क्षेत्र के विकास पर वन, आयुष, पर्यटन व कृषि विभाग मिलकर योजनाएं बनाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा हर्बल कारपोरेशन प्रदेश में स्थापित किये जा चुके हर्बल पार्कों की देख-रेख करेगा। उन्होंने कहा कि सिक्किम जैसे राज्य की तर्ज पर इस क्षेत्र में भी जैविक (ऑर्गेनिक) खेती की आपार संभावनाएं हैं जो पंचकूला-चण्डीगढ-मोहाली के लोगों की ऑर्गेनिक फल-फूल व अन्य खाद्यान्नों की मांग को पूरा करेगा।
मुख्यमंत्री ने पतंजलि योगपीठ के अनुसंधानकर्ताओं को मोरनी में रहने के लिए स्थान उपलब्ध करवाने का आश्वासन भी दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि अनुसंधानकर्ताओं ने मोरनी क्षेत्र में 53 नई जड़ी-बूटियों की प्रजातियों की भी खोज की है और अब तक वन विभाग के रिकार्ड में जड़ी-बूटियों की 1062 प्रजातियां ही दर्ज थी, जो अब बढक़र 1115 हो गई हैं। उन्होंने कहा कि इन नई जड़ी-बूटियों से मोरनी क्षेत्र का नाम न केवल देश में बल्कि पूरे विश्व में जाना जाएगा। उन्होंने बताया कि जड़ी-बूटियों के जानकार नई प्रजातियों के बारे जानने के लिए यहां का दौरा करेंगे।
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने हरड़ वाटिका का उदघाटन भी किया। पतंजति योगपीठ द्वारा मोरनी क्षेत्र में कुल 125 वाटिकाओं को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया, जिसमें से अब तक 65 वाटिकाएं विकसित की जा चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने आचार्य बाल कृष्ण द्वारा लिखित तीन पुस्तकों नामत: फलोरा ऑफ मोरनी हिल्स, विजिटेटिव सर्वे ऑफ मोरनी हिल्स तथा मोरनी क्षेत्र के महत्वपूर्ण औषधीय पादप का विमोचन किया। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने आदिश अग्रवाल द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन पर लिखित 672 पृष्ठ की पुस्तक ‘नरेन्द्र मोदी-ए क्रिशमेटिक विजिनरी स्टेटस्मैन’ का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने अपने सम्बोधन में कहा कि पूरे विश्व में लगभग 10 लाख करोड़ रुपये प्रतिवर्ष फूड सप्लीमेंट पर खर्च हो रहे हैं। उन्होंने कोरिया का उदाहरण देते हुए कहा कि मात्र 3.5 करोड़ की जनसंख्या वाला देश कोरिया ने अपने तीन ब्रांडों नामत: एलजी, सैमसंग व हुंडई से पूरे विश्व में ख्याति अर्जित की है। उन्होंने कहा कि मोरनी क्षेत्र की हरड़, शतावर, सर्पगंधा, वनस्पा जैसी जड़ी-बूटियों का सही ढ़ंग से विपणन होने से यहां के लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और पतंजलि हर प्रकार का सहयोग यहां के लोगों को उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा को विश्व की आर्थिक व अध्यात्मिक राजधानी बनाना है। योग गुरु ने कहा कि आज मोरनी क्षेत्र का नाम विश्व में पहचान बना चुका है क्योंकि अब तक पतंजलि योगपीठ द्वारा चार अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रकाशित किये जा चुके हैं। हमें निरंतरता के साथ आगे बढऩा होगा तथा हम निरोगी व उपयोगी बनकर राष्ट्र के लिए कार्य कर सकते हैं।

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