प्रेम के सामने झुकी जात-पात की दीवार, प्रदेश में अंतरजातीय विवाह में बढ़ोतरी

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Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 23 Nov, 2018

देश में हरियाणा काफी मशहूर रहा है। अपनी खासियत से ज्यादा प्रदेश को ऑनर किलिंग, बेटियों के लिए असुरक्षित, जात-पात को लेकर जाना जाता था। यहां लड़कियों से उनकी पसंद तो दूर, उनकी मर्जी भी जानना कोई जरूरी नहीं समझता था। परिजनों ने जहां शादी तय कर दी,वहीं लड़की अपनी किस्मत समझकर घर बसा लेती थी।

लेकिन अब लोगों की सोच में बदलाव आया है। पढ़ाई-लिखाई मानों या बेटियों की अपनी काबिलियत, किसी ने तो लोगों की सोच को बदला है।प्रदेश की बेटियों ने हर क्षेत्र में अपने राज्य का नाम रोशन किया है। अब धीर- धीरे जात-पात की दीवार भी गिरती दिख रही है। युवाओं की सोच में अंतरजातीय विवाह को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

कोई भी युवा प्रेम करने से पहले अब किसी की भी जाति नहीं देखता। अब सामाजिक वर्जनाओं को दरकिनार कर एससी-एसटी वर्ग के साथी को अपना जीवनसाथी बनाने के आंकड़े में ढाई गुणा बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में यह आंकड़ा 249 था, इस साल अब तक यह बढ़कर 638 तक पहुंच गया है।

राज्य के सामाजिक न्याय व सहकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेटी ने बताया कि मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। 2014-15 में सामान्य जातियों के 249 युवक-युवतियों ने एससी-एसटी वर्ग से जीवन साथी चुनें। 2015-16 में यह आंकड़ा 359 और 2016-17 में 465 पहुंच गया था। 2017-18 में 684 युवाओं ने दलित परिवारों में विवाह किया। जबकि इस साल 2018 में अब तक यह आंकड़ा 638 तक पहुंच गया है।

बता दें कि मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतरजातीय विवाह शगुन योजना के तहत अंतजातीय विवाह करने वालों को सरकार ने ढाई लाख रुपये दिए हैं। इस योजना से प्रदेश में काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। जात-पात के आगे प्रेम की जीत हुई है।

 

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