मीडिया की आजादी में भारत की खराब रैंकिंग, 4 साल में पहुंचा138वें स्थान पर

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Yuva Haryana

Hayana, 26-04-2018

मीडिया को मिलने वाली आजादी के मामले में भारत की स्थिति 4 साल के सबसे खराब स्तर पर पहुंच गई है। दुनिया के 180 देशों के लिए प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी किया गया है। इस इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 138 है। इससे पहले भारत की इतनी बुरी रैंकिंग 2013 और 2014 में थी।

तब भारत 140 नंबर पर था। 2017 में भारत 136वें स्थान पर पहुंच गया था। ये रैंकिंग फ्रांस के एक एनजीओ ‘रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर्स’ (आरडब्ल्यूबी) ने जारी की है। आरडब्ल्यूबी पिछले 16 साल से यानी 2002 से ये प्रेस फ्रीडम इंडेक्स जारी कर रहा है।

पाकिस्तान इस रैंकिंग में भारत से एक पायदान नीचे 139 नंबर पर है। 2017 में भी पाकिस्तान इसी पायदान पर था। इंडेक्स में नॉर्वे लगातार दूसरे साल पहले नंबर पर बरकरार है। इससे पहले 2007 से 2012 तक नॉर्वे लगातार टॉप पर रहा था। अब तक जारी हुई कुल 16 रैंकिंग में से 11 बार नॉर्वे ही नंबर एक रहा है। ब्रिटेन 40वें और अमेरिका 45वें स्थान पर है।

रिपोर्ट में लिखा गया है कि- “भारत में पिछले कुछ समय में नेशनल डिबेट को राष्ट्रविरोध की बातों की ओर मोड़ने का चलन बढ़ा है। मोदी का ये राष्ट्रवाद खतरा बनता जा रहा है।” रिपोर्ट में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या और मार्च 2018 में 3 पत्रकारों की हत्या का भी जिक्र है।

रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है कि- “दुनिया में मीडिया की कमजोर होती स्थिति के लिए तीन सुपरपावर जिम्मेदार हैं- अमेरिका, रूस और चीन। अमेरिका चुनाव में रूसी दखल और चीन में मीडिया पर लगी पाबंदियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

चीन मीडिया कंट्रोल मॉडल पर चल रहा है। सबसे ज्यादा चिंता वाली बात ये है कि दुनिया के बड़े-बड़े देशों में जो नेता जनता के बीच में से चुनकर आ रहे हैं, वो भी मीडिया को पनपने नहीं देना चाहते।:”

 

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