Home Breaking पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर इनेलो का रुख कड़ा, अभय बोले- रेट घटाने की बजाय बढ़ा रही है सरकार

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर इनेलो का रुख कड़ा, अभय बोले- रेट घटाने की बजाय बढ़ा रही है सरकार

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Yuva Haryana, Chandigarh

भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर प्रति लीटर तीन रुपए सीमा शुल्क एवं एक रुपया प्रति लीटर सडक़ उप-कर लगाने पर इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें घटने के बावजूद भी भाजपा की सरकार ने आम आदमी को राहत देने की बजाय उपरोक्त कर लगाकर उनकी जेबों पर डाका डालने का काम किया है। विश्वस्तर पर कच्चे तेल की कीमतें दिन-ब-दिन घटती जा रही हैं और कोरोना वायरस की वजह से तेल की कीमतों पर विपरीत असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार केन्द्र में जब 2014 में आई थी तो उस समय पेट्रोल पर 9.48 रुपए और डीजल पर 3.56 रुपए प्रति लीटर टैक्स था परंतु नवम्बर 2014 से 2016 तक भाजपा सरकार ने पेट्रोल व डीजल पर नौ बार टैक्स में बढ़ौतरी की है।

इनेलो नेता ने कहा कि कोरोना वायरस की वजह से कच्चे तेल के दामों में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। कच्चे तेल की कीमतें घटने के पश्चात आम आदमी को उम्मीद थी कि अब पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी आएगी जिससे प्रत्येक वर्ग को हर क्षेत्र में राहत मिलेगी। केंद्र की सरकार ने आम आदमी को राहत देने की बजाय टैक्स बढ़ाकर खजाना भरने का काम किया है। यह सीमा शुल्क लगाने के पश्चात सरकार को प्रति वर्ष 39 हजार करोड़ रुपए का लाभ होगा। कच्चे तेल की मौजूदा दरों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमत लगभग 18 रुपए प्रति लीटर होनी चाहिए परंतु आज के दिन पेट्रोल 70 रुपए और डीजल 68 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। इस हिसाब से सरकार पेट्रोल पर 52 रुपए और डीजल पर 45 रुपए प्रति लीटर टैक्स वसूल कर रही है। भाजपा की सरकार को कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने की चिंता है और वह आम आदमी की भलाई बारे आंखें मूंदें बैठी है।

इनेलो नेता ने कहा कि अगर डीजल व पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी तो इसका यातायात उद्योग पर प्रतिकूल असर होगा। यातायात उद्योग की लागत में वृद्धि होगी जिसका सीधा-सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आएगी और आम आदमी की खरीदो फरोख्त करने की क्षमता कम होती जाएगी जिसका सीधा-सीधा असर उद्योगों के उत्पादन पर पड़ेगा। अगर उत्पादन कम होगा तो रोजगार कम होंगे जिसकी वजह से युवाओं का भविष्य अंधकारमयी होता जाएगा।
उन्होंने कहा कि डीजल की कीमतों में बढ़ौतरी के कारण कृषि पर विपरीत असर पड़ेगा। किसान को तो पहले ही धान की खरीद में नमी के नाम से सरकारी अधिकारियों ने जमकर लूटा है और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढऩे के पश्चात कृषि उत्पाद वस्तुओं की उत्पादन लागत बढ़ेगी जिसकी वजह से किसानों पर कर्जे का बोझ बढ़ता जाएगा। इसलिए केंद्र की सरकार को चाहिए कि पेट्रोल-डीजल कीमतों में जो सीमा शुल्क एवं सडक़ उप-कर की जो बढ़ौतरी की है उसको तुरंत वापिस लिया जाए ताकि आम आदमी इस आर्थिक मंदी में सुख की सांस ले सके।

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