इनेलो ने विधानसभा स्पीकर पर लगाए आरोप, बताई ये पुरानी बात

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 26 March, 2019
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव आरएस चौधरी ने इस बात को लेकर खेद एवं निराशा व्यक्त की है कि नलवा और हथीन विधानसभा चुनाव क्षेत्रों से इनेलो के चुनाव चिह्न पर जीत कर आए रणबीर गंगवा और केहर सिंह रावत के दलबदल के मामले के तथ्यों को तोड़मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अभी तक जितने भी प्रिंट एवं मीडिया से प्राप्त प्रमाण मिले हैं उनसे यह स्पष्ट हो जाता है कि रणबीर गंगवा ने दलबदल कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा 22 मार्च को की थी और केहर सिंह रावत ने ऐसी घोषणा 25 मार्च, 2019 को की। किंतु आश्चर्य की बात है कि विधानसभा के अध्यक्ष कंवर पाल गुज्जर संसार को यह बताना चाहते हैं कि उक्त दलबदलुओं के विधानसभा की सदस्यता से त्याग-पत्र 20 मार्च, 2019 को ही उनके कार्यालय में आ चुके थे हालांकि वे सदस्य स्वयं प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दलबदल के समय यह कहते सुने गए कि उन्होंने दलबदल के समय त्याग-पत्र नहीं दिया था।
चौधरी ने कहा कि जिस प्रकार से इस पूरे प्रकरण में अध्यक्ष महोदय अब भूमिका निभा रहे हैं उससे हरियाणा राज्य को वापिस उस दशक में ले जाया जा रहा है जिसमें हरियाणा और ‘आया राम गया राम’ की राजनीति के पर्याय बन गए थे। उन्होंने यह भी कहा कि अध्यक्ष महोदय 1982 के तत्कालीन राज्यपाल जीडी तपासे और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष तारा सिंह की तरह ही सत्तापक्ष से मिलीभगत कर कानून की धज्जियां उड़ाते हुए प्रजातंत्र में सेंध लगा रहे हैं। किंतु उन्होंने याद दिलाया कि ऐसे प्रयासों का सटीक उत्तर हरियाणा की जनता ने 1987 में दिया था जब सभी दलबदलुओं का चुनावों के दौरान पूरी तरह से सफाया हो गया था।
चौधरी ने कहा कि ये खेद की बात है कि वर्तमान अध्यक्ष की अब तक की छवि बड़ी साफ-सुथरी थी और अध्यक्ष के रूप में अपने आचरण से उन्होंने सभी का मन जीता था। परंतु इस प्रकरण से उनकी छवि पर दाग लगा है क्योंकि अब वह दलबदल की राजनीति को न केवल बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि उसको पुरस्कृत भी कर रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर अध्यक्ष महोदय से आग्रह किया कि वे तुरंत प्रभाव से रणबीर गंगवा, केहर सिंह रावत, नैना सिंह चौटाला, अनूप धानक, राजबीर फोगाट और पिरथी सिंह नंबरदार को विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित किया जाए। इसी के साथ उन्होंने यह भी स्पष्टीकरण दिया कि अभय सिंह चौटाला ने पहले ही उनकी अयोग्यता को ध्यान में रखते हुए और अध्यक्ष महोदय के निर्णय के उपरांत इनेलो के सदस्यों की गिनती कम होने के कारण नेता विपक्ष के पद से त्याग-पत्र भेज दिया था। इसलिए अध्यक्ष महोदय का यह कहना कि उन्हें उनके पद से हटाया गया है, गलत बयानी है।

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