किसानों और व्यापारियों के मुद्दों पर अभय चौटाला ने सरकार को घेरा, मांगा जबाव

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 Dec, 2018
शुक्रवार को हुए एक दिवसीय विधानसभा सत्र में नेता विपक्ष अभय सिंह चौटाला ने किसानों और छोटे व्यापारियों के कर्जें माफी और एसवाईएल नहर, दादूपुर-नलवी और मेवात कैनाल के मुद्दे को उठाया। हालांकि उन्होंने सदन से कहा कि ये मुद्दे हरियाणा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और इन विषयों पर सरकार द्वारा अपना स्पष्ट निर्णय सदन और जनता के समक्ष रखा जाए।
उन्होंने विशेष तौर पर मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे सर्वोच्च न्यायालय के 10 नवम्बर, 2016 को आए फैसले बारे अपनी स्पष्ट राय से सदन को अवगत कराए जिसका संबंध एसवाईएल के निर्माण से है। सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय को आए अब दो वर्ष से अधिक का समय हो चुका है परंतु केंद्र व राज्य सरकार द्वारा नहर निर्माण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सदन की कार्रवाई के बाद इनेलो के सदस्यों ने इस बात पर खेद व्यक्त किया कि भाजपा सरकार इस मुद्दे पर कोई भी स्पष्ट राय रखने के लिए तैयार नहीं है जिससे यह प्रतीत होता है कि कांग्रेस की तरह ही वह भी इस विषय में तुष्टिकरण की नीति अपनाते हुए हरियाणा को उसके अधिकार से वंचित रखना चाहती है। इस पर सदस्यों ने यह भी मत प्रकट किया कि इनेलो अपने संघर्ष को तब तक जारी रखेगा जब तक इस नहर निर्माण से हरियाणा की भूमि को उसके अधिकार का नदी जल नहीं मिल जाता।
नेता विपक्ष ने इसी संदर्भ में किसानों और उनसे जुड़े सभी मुद्दों जिन पर पहले ही स्थगन प्रस्ताव व आठ ध्यानाकर्षण प्रस्ताव दर्ज करवाए हुए थे, को उठाने का प्रयास किया ताकि कर्जा माफी से लेकर फसलों के लाभकारी मूल्यों की बात भी सदन में की जा सके। किन्तु इस पूरी बहस के दौरान जहां सत्तापक्ष मुद्दों से भागता दिखाई दिया वहीं कांग्रेस पार्टी इन मुद्दों से हटकर सदन को भटकाने का काम करती रही।
एक दिवसीय विधानसभा सत्र के प्रारंभ होते ही नेता विपक्ष अभय सिंह चौटाला ने इस बात पर घोर आपत्ति जताई कि राज्य विधानसभा के इतिहास में पहली बार विधानसभा को किस प्रकार संचालित किया जाए, इसके निर्देश सरकार द्वारा दिए जा रहे हैं क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष द्वारा जारी हिदायतें जिनके तहत प्रस्तुत किए जाने वाले बिलों की प्रतियां पांच दिन पहले सदस्यों के पास भेजी जानी चाहिए जो कि नहीं भेजी गई। इस प्रकार अध्यक्ष द्वारा जारी निर्देशों की उल्लंघना है।
उन्होंने विधानसभा के अध्यक्ष एवं सदन को याद दिलाया कि सभा का सत्र कब बुलाया जाए, इसकी सिफारिश सरकार राज्यपाल महोदय को कर सकती है किंतु उसे बुलाने का अधिकार केवलमात्र राज्यपाल को है। सत्र बुलाए जाने के पश्चात सदन किस तरीके से चलाया जाएगा और किन विषयों पर उसमें बहस की जाएगी, इसका निर्णय करने का पूर्ण रूप से अधिकार अध्यक्ष महोदय को है। किंतु खेद की बात यह है कि भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री विधानसभा के अध्यक्ष को सरकार के किसी विभाग का मुखिया समझ बैठे हैं जिस कारण वे उन्हें भी उसी प्रकार निर्देश देते हैं जैसे अन्य विभागों को।
नेता विपक्ष ने अध्यक्ष महोदय से आग्रह किया कि वे स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय लें ताकि सदन और उसके सदस्यों की मर्यादा बनी रहे। उन्होंने यह बातें वर्तमान सत्र को बुलाए जाने और उसे किस प्रकार संचालित किया जाए उसके संदर्भ में कहीं।

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