INLD ने कोरोना वायरस को लेकर हरियाणा सरकार को दिया सुझाव, पढ़िए पूरी खबर…

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हरियाणा में कोरोना वायरस द्वारा संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एहतियातन तौर पर किए गए प्रबंधों की पोल सोनीपत अस्पताल6 में उस वक्त 6खुल गई जब ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के एक कोरोना वायरस संक्रमित छात्र को सोनीपत अस्पताल में जांच के लिए भेजा गया और उसको डॉक्टरों ने पर्ची बनवाने के लिए लाइन में खड़ा कर दिया। इस संक्रमण संबंधित जो टेस्ट थे उनकी जांच किए बगैर ही इस मरीज को क्लीन चिट भी दे दी गई। यहां तक कि इस दौरान डॉक्टरों ने भी एहतियातन तौर पर मास्क भी नहीं पहने थे। यह बात इनेलो नेता चौधरी अभय सिंह चौटाला ने प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों की अनदेखी किए जाने बारे कही कि सरकार केवल केंद्र द्वारा दी गई हिदायतों पर ही निर्भर है और विभाग ने कोरोना वायरस का इलाज करने बारे कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए हैं।

इनेलो नेता ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस संक्रमण को महामारी के तौर पर माना है और हमारे देश में भी 15 अप्रैल तक सभी बाहरी जाने वाले यात्रियों के वीजे निलंबित कर दिए गए हैं। इस वायरस से अभी तक लगभग 3200 मरीजों का चाइना में निधन हो चुका है और यहां तक कि ब्रिटेन के हेल्थ मिनिस्टर भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। हरियाणा सरकार ने अलर्ट तो जारी किया है परंतु वह केवल हवाई अड्डों आदि के लिए ही है जबकि सरकार को प्रदेश में तमाम बस अड्डे एवं रेलवे स्टेशनों पर भी अलर्ट जारी करना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को इन जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश के अस्पतालों की व्यवस्था को देखा जाए तो उनमें सफाई और पीने के पानी का उचित प्रबंध नहीं है। शौचालयों की हालत बद से बदत्तर है और अस्पतालों में दवाइयों का अभाव है। किसी भी अस्पताल में प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमित मरीज के लिए अलग से वार्ड आदि नहीं बनाए गए।

इनेलो नेता ने कहा कि हमारा प्रदेश दिल्ली के चारों तरफ फैला हुआ है और एनसीआर एरिया में तो इस वायरस की संक्रमणता की बहुत ज्यादा संभावना है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक एनसीआर क्षेत्र में इस संक्रमण से बचने के लिए कोई एडवायजरी जारी नही की। दिल्ली के साथ लगते गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर आदि जिलों में स्वास्थ्य विभाग को 24 घंटे निगरानी रखने की आवश्यकता है। प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के बार्डरों पर कोरोना वायरस संक्रमण के लिए उचित प्रबंधन न करना सरकार की लापरवाही का सबूत है। प्रदेश में हाथ धोने के लिए सेनेटाइजर नामक दवाई ब्लैक में कई गुणा ज्यादा दामों पर बिक रही है और 70 पैसे का मास्क कम से कम 250-300 रुपए में बिक रहा है। इस संबंधित दवाइयां भी दुगुने-तिगुने रेट पर बिक रही हैं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी आंख मूंदें लोगों को लुटवा रहे हैं। इसलिए हरियाणा के स्वास्थ्य विभाग को तमाम अस्पतालों में कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए और जो दवाइयां आदि की ब्लैक मार्केट तुरंत बंद करवानी चाहिए और ऐसे मेडिकल स्टोर जिन पर ब्लैक का धंधा जोरों पर है, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।

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