अध्यापकों के लिए जिले से बाहर तबादले की पॉलिसी मंजूर, 3 साल से अधिक नौकरी कर चुके टीचर ले सकेंगे फायदा

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Yuva Haryana

चंडीगढ़ में आज हुई मंत्रिमण्डल की बैठक में जिला काडर के अध्यापकों के लिए काडर चेंज पॉलिसी स्वीकृत की गई है, जिसमें मौलिक शिक्षा विभाग में नियमित आधार पर कार्यरत पीआरटी, जेबीटी और एचटी अध्यापक तथा क्लासिकल एवं वार्नाक्यूलर (C&V) अध्यापक शामिल हैं।
इस नीति के अंतर्गत जिला बदलाव के लिए मौलिक शिक्षा निदेशालय में तीन साल से नियमित आधार पर कार्यरत जिला काडर अध्यापकों में पीआरटी, जेबीटी और एचटी अध्यापक तथा क्लासिकल एवं वार्नाक्यूलर (सी एंड वी) अध्यापक (केवल जिला काडर) को पात्र माना जाएगा।
मेवात काडर के अध्यापक, जिन्हें विशेषकर मेवात काडर के लिए रखा गया है, को मेवात से बाहर स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। हालांकि, अन्य अध्यापकों, जो मेवात में कार्य कर रहे हैं, को इस नीति के अंतर्गत जिला बदलाव के लिए विचार किया जाएगा। आवेदक अध्यापक को विभाग के एमआईएस पोर्टल पर अधिकतम तीन जिलों का विकल्प देना होगा और स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत अध्यापक के रूप में तीन साल की नियमित सेवा पूरी होनी चाहिए। 
किसी भी समय विभाग रिजर्व स्टाफ के साथ अध्यापकों की जिलावार नवीनतम रेशनलाइजेशन कर सकता है। रिजर्व स्टाफ विभिन्न प्रकार की छुट्टियों जैसे कि मातृत्व लीव, चाइलड केयर लीव, स्टडी लीव और एक्सट्रा आर्डनरी लीव पर जाने वाले अध्यापकों की वजह से सृजित होने वाली रिक्तियों पर काम करेंगे।

विभिन्न श्रेणियों जैसे कि सामान्य, एससी, बीसीए, बीसीबी और एक्स सर्विसमैन की प्रतिशतता का अनुपात जिला की आवश्यकता अनुसार  जिला स्तर पर रखा जाएगा। हालांकि, राज्य इस नियम में कुछ श्रेणियों जैसे कि दिव्यांग श्रेणी में छूट दे सकता है।
यदि कोई अध्यापक स्वयं स्थानांतरण की कार्यवाही में भाग लेता है तो यह माना जाएगा कि वह अपना काडर बदलवाने और लियन तथा वरिष्ठता के प्रभाव के लिए सहमत है जैसा कि इस नीति में उल्लेखित है। यदि किसी अध्यापक ने पहले किसी काडर बदलाव कार्यवाही में भाग लिया था और उसका काडर बदल गया तो वह ऐसे काडर बदलाव अभियान में अगले तीन वर्षों तक भाग नहीं ले सकेगा।
किसी जिले को आवंटित करने का निर्णय अध्यापक द्वारा सृजित किये गए स्कोर बिन्दुओं के आधार पर किया जाएगा। इस वर्ग में निर्धारित मानदंडों के अनुसार अध्यापक को अंक दिए जाएंगे। अध्यापक की आयु के अधिकतम 60 अंक होंगे। अध्यापक के जीवन की परिस्थितियों और आवंटित काडर की वजह से कार्य की कार्यवाही में आ रही दिक्कत के मद्देनजर अध्यापकों को विशेष श्रेणियों के लिए अतिरिक्त अधिकतम 20 अंक दिए जाएंगे। एक अध्यापक को 20 से अधिक अंक नहीं दिए जाएंगे और कुल 80 अंक एक अध्यापक को आवंटित होंगे।
प्रत्येक श्रेणी के लिए, दिव्यांग श्रेणी को छोडक़र दो प्रकार की रिक्तियां होंगी। वास्तिविक रिक्ति: किसी एक जिले में कार्यरत नियमित अध्यापक और जिला की आवश्यकता में अंतर वास्तिविक रिक्ति को गठित करेगा। मानी जाने वाली रिक्ति: एक अध्यापक जो स्थानांतरण अभियान में भाग लेता है और वह स्वयं तथा कम से कम एक जिले का विकल्प देता है, तो उस जिले में उसकी श्रेणी में रिक्ति सृजित होगी।

स्थानांतरण अभियान में स्वयं भू-भाग लेना होगा। अध्यापक जो इस स्थानांतरण अभियान में भाग लेना चाहते हैं, उन्हें एमआईएस पोर्टल पर अपनी सहमति देनी होगी और अधिकतम तीन जिलों का विकल्प देना होगा तथा उन्हें केवल उनकी इच्छा अनुसार चुने गए जिलों में ही स्थानांतरित किया जाएगा। यदि कोई अध्यापक अपना विकल्प नहीं देता है तो उसका काडर बदलाव में विचार नहीं किया जाएगा।

अध्यापक जो 90 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांग है या वर्तमान में कैंसर से पीडि़त है या बाइपास सर्जरी से पीडि़त है या किडनी ट्रांसप्लांट या डायलिसिस से पीडि़त है, को उसकी इच्छानुसार जिला में रिक्ति के स्थिति के आधार पर कार्य दिया जाएगा। कैंसर के मामले में छ: माह से पुराना कैंसर का प्रमाण-पत्र नहीं होना चाहिए।
यदि कोई अध्यापक स्थानांतरण अभियान में मेवात और मोरनी स्थानों में तैनात किया जाता है तो उसे उसकी बेसिक वेतन का 20 प्रतिशत अतिरिक्त तथा डीए दिया जाएगा बशर्ते कि नूंह और पंचकूला उसका गृह जिला नहीं होना चाहिए। नये जिले में आने पर अध्यापक को उस जिले की वरिष्ठïता सूची के अंत में रखा जाएगा और उसका पिछले जिले का लियन समाप्त हो जाएगा।

यदि किसी अध्यापक को यह महसूस होता है कि इस नीति के प्रावधानों के विरूद्ध उसका काडर बदला गया है तो वह अपनी शिकायत विभाग के पोर्टल पर आदेश निकलने के 15 दिनों के भीतर दर्ज करवा सकता है और ऐसी शिकायत का निवारण इस नीति के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा और विभाग द्वारा लिया गया निर्णय उपयुक्त माना जाएगा।

 

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