International Forest Day, धरती पर कम होते पेड़, पर्यावरण से सेहत तक पड़ता है असर

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Yuva Haryana

Panchkula (21 March 2018)

आज International Forest Day पर पेड़ो की क्या स्थिती है उस पर नजर डालते है। दूनिया में तेजी से बढ़ते शहरों की वजह से जंगल काटे जा रहे हैं। अगर बात करें तो देश के कई बड़े शहरों में हरियाली 50% से ज्यादा कम हुई है। जंगल सिर्फ भारत में ही कम नहीं हो रहे हैं बल्कि दुनियाभर में जंगल के खत्म होने की कगार पर है और इसका सबसे बड़ा कारण है औद्योगिक और शहरी विकास।

21 मार्च को पूरी दुनिया इंटरनेशनल फॉरेस्ट डे मना रही है। देश से लेकर विदेश तक जंगलों की स्थिति पर बात की जा रही है। जंगल लगाए जाने को लेकर दुनियाभर में एक बार फिर से चर्चा की जा रही है। लेकिन फिर भी जंगल तेजी से काटे जा रहे हैं।

दुनिया को नई दिशा और दशा देने में जुटे संयुक्त राष्ट्र ने इस साल की थीम “जंगल और हरे भरे शहर” रखा है।  दुनिया में बढ़ते शहरीकरण की वजह से 51 फीसदी पेड़ घटे हैं जबकि  2016 के आंकड़ें बताते हैं कि  7.3 करोड़ एकड़ पेड़ धरती से खत्म हुए हैं। यह आंकड़ा 2015 से 50 % ज्यादा है।

जंगल न केवल ऑक्सीजन के सबसे बड़े स्त्रोत होते हैं बल्कि पृथ्वी के तापमान को भी नियंत्रित करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक विश्व में धरती का एक तिहाई हिस्सा वन है, किंतु भारत में यह कुल भूमि का 22 प्रतिशत से भी कम है। भारत में तो प्रति व्यक्ति मात्र 0.1 हेक्टेयर ही वन है, जबकि विश्व का औसत 1.0 हेक्टेयर प्रति व्यक्ति है।

बता दें कि अगर शहर के 20 से 30 फीसदी हिस्से पेड़ हो जाए तो AC का खर्च 30 फीसदी तक कम हो जाता है वहीं 24 फीसदी पॉल्यूशन कम हो जाता है। जबकि शोर-शराबे को कम करने में भी पेड़ों का अहम योगदान होता है और यह 40 फीसदी तक शोर को कम करता है। धूल को पेड़ सोख लेते हैं और 75 फीसदी तक हवा में धूल का कण भी पड़ों की वजह से कम हो जाता है।