Home Breaking कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को मिलेगा वैधानिक दर्जा, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया ऐलान

कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को मिलेगा वैधानिक दर्जा, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किया ऐलान

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Yuva Haryana
Delhi, 23 Nov, 2018

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भविष्य में भी एक स्थाई कार्यक्रम हो, इसके लिए कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड को वैधानिक दर्जा दिया जाएगा। इसके अलावा, गीता मनीषी श्री ज्ञानानंद जी महाराज की अध्यक्षता में एक स्थाई आयोजन समिति का गठन भी किया जाएगा।

7 से 23 दिसम्बर, 2018 को कुरुक्षेत्र में मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के उपलक्ष्य में मुख्यमंत्री आज दिल्ली के लाल किला परिसर में आयोजित पत्रकार सम्मेलन के दौरान पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर दे रहे थे।

एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि मारीशश में फरवरी, 2019 में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन सहमति दी है, इसके अलावा यूके व कनाडा में भी इस पर विचार किया जा रहा है। इस साल गीता महोत्सव के दौरान 12 दिसंबर को यूके के हाऊस आफ कामन्स में भी गीता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, गीता महोत्सव को मनाने के लिए 15 देश अपने यहां पर तैयारी कर रहे है और प्रारूप तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज परिवर्तन व युवाओं में नैतिकता व उन्हें संस्कारवान बनाने के लिए राहगीरी, गीता जयंती, मैराथन जैसे कार्यक्रमों का आयोजन हरियाणाभर में किया जा रहा है ताकि युवाओं में शिक्षा के साथ-साथ नैतिकता का भी संचार हों।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि दिल्ली के लाल किला मैदान में गीता  महोत्सव से संबंधित प्रदर्शनी 20 नवंबर से लेकर 30 नबंवर तक रहेगी तथा इसके बाद 1 दिसंबर से यह प्रदर्शनी बोट क्लब में शिफट की जाएगी ताकि अधिक से अधिक लोगों तक गीता का संदेश जाएं।

महाभारत काल से जुडे राज्य के अन्य स्थानों के विकास के संबंध में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि गुडगांव का नाम गुरूग्राम किया गया क्योंकि पौराणिक समय में भी यह गुरूग्राम ही था और यहां पर गुरू द्रोणाचार्य ने कौरवों व पांडवों को शिक्षा दिक्षा दी थी तथा आज भी यहां पर गुरू द्रोणाचार्य के नाम से महाविद्यालय संचालित है। इसी प्रकार, गुरूग्राम में मेट्रो के एक स्टेशन का नाम भी गुरू द्रोणाचार्य के नाम पर रखा गया है।

गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ के तौर पर लाने के लिए पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि यदि इस प्रकार का कोई प्रस्ताव आता है तो वे उसका स्वागत करते है।

 

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