भिवानी जिले के कोंट गांव छोरा बना ISRO का साईंटिस्ट, 8वां रैंक किया हासिल

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष के क्षेत्र में काम करने वाली प्रतिष्ठित संस्था इसरो में अब भिवानी जिला के छोटे से गांव कोंट के 26 वर्षीय सुमित कुमार अपनी प्रतिभा दिखाते नजर आएंगे। क्योंकि इसरो सैंट्रलड रिकरूटमैंट बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा में देश भर में 8वां रैंक प्राप्त करने के चलते सुमित कुमार का साईंटिस्ट के पद पर चयन हुआ है। बोर्ड द्वारा वर्ष 2017 में आयोजित परीक्षा में मैकेनिकल क्षेत्र में साईटिंस्ट के तौर पर 36 हजार परीक्षार्थियों को पछाड़ते हुए सुमित ने देश भर में 8वां रैंक प्राप्त किया है। सुमित के पिता ओमबीर सिंह भूतपूर्व सैनिक रहे है जो वर्तमान में प्राथमिक कक्षा के अध्यापक है। वही उनकी माता अनिता देवी एक गृहणी है। ऐसे में साधारण घरेलू परिस्थितियों के बाद सुमित सिंह ने वैज्ञानिक बनने की राह पार की है।

प्रारंभिक शिक्षा गांव कोंट में प्राप्त करने वाले सुमित कुमार अब जल्द ही रॉकेट का डिजाईन बनाते नजर आएंगे। क्योंकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में सुमित डिजाईनिंग के विशेषज्ञ है। गांव कोंट में जन्मे 26 वर्षीय अमित कुमार ने भिवानी के हलवासिया विद्या विहार स्कूल से विज्ञान विषय से 12वीं करने के बाद इनका चयन आईआईटी धनबाद में हुआ। जहां इन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। जिसके बाद अमित कुमार ने हैदराबाद की एक निजी कंपनी में बतौर मैकैनेकिल इंजीनियर काम किया। 3 साल यहां काम काम करते हुए 8 लाख सालाना के पैकेज को छोडक़र यूपीएसई की तैयारी शुरू कर दी। जिसके बाद इन्होंने दो बार इंजीनियरिंग सर्विस की लिखित परीक्षा को पास किया, परन्तु वे अंतिम चयन से चूक गए। इसके बाद इन्होंने अपना रूख पूर्णतया बदलते हुए भारतीय आंतरिक्ष अनुसंधान संगठन की तरफ किया। जहां वर्ष 2017 की परीक्षा में इनका लिखित परीक्षा में रैंक चौथे नंबर पर आया। साक्षात्कार में अंतिम परिणाम में अमित का रैंक देश भर में 8वां रहा। इस परीक्षा में 36 हजार अभ्यार्थियों में से कुल 35 वैज्ञानिकों का चयन इसरो द्वारा किया गया।

चयन के बाद गांव कोंट में पहुंच सुमित कुमार से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि उनकी बचपन से ही विज्ञान विषय में रूचि रही है। इसी के चलते उन्होंने 10वीं के बाद विज्ञान विषय को चुना तथा उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। परन्तु निजी कंपनी में अच्छा पैकेज मिलने के बाद भी उनकी इच्छा कुछ रचनात्मक करने की थी, जिसके चलते उन्होंने नौकरी छोडक़र यूपीएसई की पढ़ाई शुरू की। सुमित ने कहा कि स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने वैज्ञानिक बनने के सपने लिए थे, जो आज पूरे हुए है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी रूचि के अनुसार पढ़ाई के लिए विषय का चयन करें तथा अपने दिमाग में इस बात की सूची बना ले कि सुबह से शाम तक अपने पंसदीदा विषय के कुछ हिस्से को निर्धारित समय में जरूर पढऩा है तथा अपने उद्देश्य को सदा आगे रखकर पढ़ाई करें तो सफलता जरूर कदम चूमेगी। गौरतलब है कि बतौर वैज्ञानिक सुमित कुमार को इसरो में डिजाईनिंग के क्षेत्र में काम करना होगा। इसरो के विभिन्न प्रोजेक्ट की डिजाईनिंग का कार्य के तहत उन्हे रॉकेट का डिजाईन तैयार करने व आंतरिक्ष सैटेलाईट के डिजाईन पर काम करने का अवसर मिलेगा।

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