पहले दिन करवाया था जीते जी काज, दूसरे दिन चल बसी जहरो देवी

Breaking चर्चा में बड़ी ख़बरें हरियाणा हरियाणा विशेष

Yuva Haryana,
Hisar, 14 Jan,2019

पति के काज के साथ ही खुद का जीते जी काज करवाया और अगले ही दिन 92 साल की जहरो देवी चल बसी। जिंदगी के 82 बरस एक साथ तय किए। परिवार की चार पीढ़ियों को पलते बढ़ते देखा।

कहानी कुम्हारान मोहल्ला निवासी जहरो देवी और बनवारी लाल की है। आजादी से दस साल पहले 1937 में विवाह बंधन में बंधे बनवारी लाल और जहरो देवी ने अपने जीवन को हंसी खुशी जीया। आज परिवार में बेटे-बेटियों, पोते-पोतियों, परपोते व परपोतियां सहित 32 सदस्य हैं। 92 साल की जहरो देवी और 102 साल के बनवारी लाल की अंतिम विदाई भी कुछ इस तरह हुई की यादगार बन गई।

दरअसल बनवारी लाल की 31 दिसंबर 2018 को मौत हो गई। बेटों ने पिता का 11 जनवरी को काज किया। मां ने बेटों से कहा कि मेरा भी जीते जी काज (जीते जी रस्म पगड़ी) कर दो। बेटों ने मां की बात मानी और पिता के काज के साथ ही मां का भी जीते जी काज कर दिया। काज करने के अगले ही दिन जहरो देवी ने भी इस दुनिया को अलविदा कह गई।

पोते जयपाल का कहना है कि दादा बनवारी ने कभी काम नहीं छोड़ा। 101 वर्ष के थे, तब तक काम करते थे। जयपाल के पिता बताते हैं कि कुरुक्षेत्र गोशाला बनने से पहले उनके पिता यहां ईंटें पकाते थे। इसके बाद यहां गोशाला का निर्माण हुआ। बनवारी लाल के हाथों से तैयार हुई ईंटों से गोशाला का निर्माण हुआ था।

बेटे ने बताया कि पिछले साल दिवाली पर भी पिता बनवारी लाल ने दीये बनाकर बेचे थे। मां जहरो देवी घर का ही काम करती थीं।

पोते जयपाल ने बताया कि दादा-दादी का प्रेम इतना था कि एक दूसरे के बिना खाना तक नहीं खाते थे। दोनों एक दूसरे के साथ ही बैठकर खाना खाते थे। अंतिम समय तक दोनों एक दूसरे के साथ रहे।

31 दिसंबर को बनवारी लाल की मृत्यु के बाद जहरो देवी उदास रहने लगी। वैसे पूरी तरह से स्वस्थ थी। 11 जनवरी को बनवारी लाल के काज के अगली सुबह ही जहरो देवी ने भी प्राण त्याग दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *