मेरी कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ दोस्त जयवीर का, जयवीर ने मेरा हमेशा साथ दिया- गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा

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Gourav Sagwal, Yuva Haryana

Panipat (21 April 2018)

कॉमनवेल्थ गेम्स में जेवेलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा अपने गांव खंण्डरा पहुंचे। जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। नीरज यहां अहने स्वागत से काफी खुश दिखे और अपने जीवन का किस्सा भी साझा करने लगे। उनके मुताबिक, एक समय था जब वे नया जेवेलिन नहीं खरीद पाए थे। तब 8 हजार के जेवेलिन से उन्होंने प्रैक्टिस की थी। उस समय अच्छे मैदान भी नहीं थे तब भी गलियों और सड़कों पर प्रैक्टिस करते थे। इस मेहनत की बदौलत वो इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं।

नीरज ने कहा कि उसकी कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ दोस्त जयवीर का है। 12 साल की उम्र में जब वे पानीपत जाने लगे तो वहां सीनियर खिलाड़ी जयवीर से मुलाकात हुई तभी जयवीर ने उनकी 6 फीट से ज्यादा की हाइट देखकर जेवेलिन खेलने के लिए कहा। शुरुआत में कई बार मन जेवेलिन के लिए नहीं हुआ, लेकिन जयवीर ने उसका हमेशा साथ दिया। उसकी कोशिशों के कारण ही वे आज एक अच्छे खिलाड़ी बन पाए हैं।

नीरज ने कहा कि खिलाड़ियों के बड़ी प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने के बाद सरकार अच्छी राशि देती है और सभी सुविधाएं भी देती है, यह सरकार की ओर से की जाने वाली अच्छी पहल है। लेकिन नए खिलाड़ी इस स्तर तक पहुंच सकें और बड़ी प्रतियोगिताओं में जाकर मेडल लाएं, इसके लिए उन्हें शुरू से अच्छी सुविधाएं देने पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।

ओलंपिक के लिए नीरज ने काफी मेहनत की थी, लेकिन क्वालीफायर के समय उसकी सेहत खराब हो गई थी। इसके कारण वह ओलंपिक के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए। इसका मलाल उन्हें अभी तक है और उस समय वे पूरी तरह टूट गया था। ऐसे समय में भी उनके परिवार ने उनका साथ दिया।

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