जाट आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने HC के फैसले पर लगाई रोक, सुनवाई अब अगले हफ्ते होगी

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Yuva Haryana

Delhi (27 March 2018)

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के जाट आरक्षण मामले में यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है। हरियाणा में जाट समेत 5 अन्य जातियों को 10% आरक्षण देने वाले काननू की संवैधानिक वैधता पर मोहर लगाने संबंधी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है।

हरियाणा पिछड़ा वर्ग कानून 2016 का विरोध कर रहे याचिकाकर्ता सतवीर सिंह सैनी और अन्य की ओर से सीनियर एडवोकेट के सुल्तान सिंह ने सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर रोक या यथास्थिति की मांग की थी।

उन्होंने कहा था कि आरक्षण के प्रतिशत पर पिछड़ा वर्ग आयोग 31 मार्च तक रिपोर्ट पेश करेगा। इसके बाद हरियाणा सरकार फैसले पर अमल कर सकती है। जस्टिस जे चेलमेश्वर और संजय किशन कौल की बेंच ने कहा कि मामले की सुनवाई अब अगले हफ्ते ही होगी।

बता दें कि हरियाणा विधानसभा ने 29 मार्च 2016 को सर्वसम्मति से हरियाणा पिछड़ा वर्ग संस्थानों से सेवा ओर दाखिलों के लिए विधेयक 2016 को पारित कर दिया था। सरकार ने अपने आधिकारिक गजट में भी इस अधिनियम की अधिसूचना 12 मई 2016 को जारी कर दी थी। नए कानून के अनुसार जाट के अलावा जाट शिख, बिश्नोई, रोड़ और त्यागी सहित पांच जातियों को 10% आरक्षण का प्रावधान रखा गया है।

लेकिन 26 मई को हाईकोर्ट की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इन जातियों को आरक्षण देने पर रोक लगा दी थी। PIL में बिल को कानून के विरूद्घ बताते हुए खारिज करने की अपील की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि नए बिल के पारित होने के बाद आरक्षण सीमा 70% तक पहुंच गई है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि आरक्षण कोटा 50% से अधिक नहीं होना चाहिए।

 

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