जिलों के अफसर खुद ही तय करेंगे कि विधायकों को कितनी लिफ्ट देनी है और उसकी कितनी सुनवाई करनी है

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(18 मार्च 2018)

हरियाणा की अफसरशाही और भाजपा के विधायकों में टकराव बढ़ सकता है। नौकरशाही की कार्यशैली से पहले ही नाखुश विधायकों को कितनी लिफ्ट देनी है और उसकी कितनी सुनवाई करनी है, अब ये जिलों के अफसर खुद ही तय करेंगे। सरकार की तरफ से फील्ड के अफसरों पर किसी तरह का दवाब नही होगा। कुछ इसी तरह की हिदायतें सीएमओ के एक आला अफसर ने जिले के अफसरों को दी है।

इसे विधायकों द्वारा भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के सामने की गयी ब्यूरोकैसी की शिकायत से जोड़कर भी देखा जा सकता है। चंडीगढ़ से वीडियों कानफ्रंसिंग के जरिए बैठक की गई। वैसे यह बैठक थी तो पब्लिक विभाग की, लेकिन इसमें अधिकांश जिलों के डीसी और एडीसी के अलावा कई शहरों के एसडीएम भी मौजूद थे। कुल मिलाकर जिले का पूरा प्रशासनिक अमला बैठक में मौजूद रहा। मीटिंग में मौजूद रहे सार चंडीगढ़ से बैठक को दो आईएएस अधिकारियों के अलावा एक राजनीतिक नियुक्ति पर बैठे व्यक्ति ने भी सम्बोधित किया।

बैठक में एक और सुधार कार्यक्रम को लेकर भी बातचीत हुई और आरटीए कार्यालयों में फैल भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी बातचीत हुई आरटीए कार्यालयों में भ्रष्टाचार की शिकायतों पर के बाद ही सरकार ने आरटीए के सभी सचिवों को हटा दिया था। उनकी जगह संबंधित जिलों के एडीसी को आरटीए सचिव का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया था। सूत्रों का कहना है कि यह बात भी बैठक में स्वीकार की गयी कि एडीसी को जिम्मा सौंपने के बाद भी आरटीए कार्यालयों में लेन- देन का खेल पूरी तरह खत्म नही हुआ है। इसके लिए अधिकारियों से सुझाव मांगे गए। और अधिकारियों को एक ओर बात कही गई कि विधायको की कितनी सुनवाई करनी है और कितन नही ये भी वे अपने हिसाब से खुद से फैसला करें। इस तरह के फरमान से विधायकों की मुश्किलें और भी बढ़ सकती है। उनकी मुश्किलें बढ़ती है तो अधिकारियों और विधायकों में खींचतान बढ़ना भी स्वाभाविक है।

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