पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम की सजा का हुआ ऐलान, कोर्ट ने राम रहीम सहित चारों दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

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(Reporter- Umang Sheoran)

(Panchkula)

Shweta Kushwaha, Yuva Haryana

Chandigarh, 17 Jan, 2019

साध्वियों से यौन शोषण मामले में सजा काट रहे गुरमीत राम रहीम को अब पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में भी सजा सुना दी गई है। बता दें कि 11 जनवरी को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या के मामले में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सहित चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था।

गुरमीत राम रहीम को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने राम रहीम समेत कुलदीप, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को भी उम्रकैद की सजा सुनाई है।

बता दें कि 16 साल बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में यह फैसला आया है। 2002 से मामले की कोर्ट मे सुनवाई चल रही थी और अब छत्रपति के परिजनों का लम्बा इंतजार खत्म हो गया है।

जानिये पूरा मामला-

2002 में साध्वी यौन शोषण मामले में एक पत्र सामने आया था, जिसमें साध्वियों ने अपने साथ हो रहे यौन शोषण का खुलासा करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में मदद की गुहार लगाई थी।

उन दिनों पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपना अखबार पूरा सच प्रकाशित करते थे। साध्वी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, तो छत्रपति ने साहस दिखाया और 30 मई को अपने अखबार में “धर्म के नाम पर किए जा रहे हैं साध्वियों के जीवन बर्बाद” शीर्षक से खबर छाप दी।

इस खबर से हर तरफ तहलका मच गया क्योंकि अब अखबार द्वारा खुलकर लोगों को इस बात की जानकारी हुई कि डेरे में साध्वियों के साथ यौन शोषण किया जा रहा है। जिसके बाद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को लगातार राम रहीम द्वारा धमकियां भी दिए जाने लगी। इस बारे में छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति बताते हैं कि पिता लगातार मिल रही धमकियों से नहीं डरे और इस मामले को लगातार प्रकाशित करते रहे।

24 सितंबर 2002 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए सीबीआई को जांच के आदेश दिए और सीबीआई द्वारा केस की जांच शुरू की गई। लेकिन शायद गुरमीत राम रहीम को यह मंजूर नहीं था और फिर कुछ ऐसा हुआ, जिसके बारे में किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

24 अक्टूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति अपने घर पर अकेले थे कि तभी कुलदीप और निर्मल सिंह ने उन्हें आवाज देकर घर के बाहर बुला लिया। कुलदीप ने छत्रपति पर पांच फायर किए और दोनों मौके से फरार हो गए। लेकिन पुलिस ने उसी दिन कुलदीप को गिरफ्तार कर लिया था।

पत्रकार छत्रपति को अस्पताल ले जाया गया था, पहले रोहतक पीजीआई में भर्ती करवाया गया था। बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए दिल्ली अपोलो में ले जाया गया था। लेकिन 28 दिनों बाद 21 नवंबर 2002 को पत्रकार रांमचंद्र छत्रपति ने दम तोड़ दिया।

बाद में जांच में सामने आया कि जिस रिवॉल्वर से फायर की गई थी, वह डेरा सच्चा सौदा के मैनेजर कृष्ण लाल की लाइसेंसी रिवॉल्वर थी। इसके बाद सिरसा समेत पूरे देश में इस घटना लेकर प्रदर्शन भी हुआ। तत्कालीन चौटाला सरकार ने जांच के आदेश दिए। इस दौरान दूसरे आरोपी निर्मल सिंह ने पंजाब में सरेंडर कर दिया।

पुलिस ने सिरसा कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर ट्रायल शुरू करवा दिया। इस मामले में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में गुहार लगाई। कई सुनवाई के बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने सिरसा कोर्ट के ट्रायल को रुकवा दिया और सीबीआई को जांच के आदेश दिए।

सीबीआई जांच के दौरान राम रहीम ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर केस में स्टे लगवा ली। जिसके बाद मामले में एक साल तक स्टे लगा रहा। बेटे अंशुल छत्रपति ने भी हार नहीं मानी और सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ी। जिसके बाद नवंबर 2004 में स्टे टूट गया। सीबीआई ने फिर से जांच शुरू कर दी और इस मामले में लगातार जांच चलती रही।

31 जुलाई 2007 में सीबीआई ने चार्जशीट पेश की। 2014 में कोर्ट में सबूतों को लेकर बहस शुरू हुई। 2007 में पेश किए गए चालान में खट्टा सिंह अहम गवाह थे, लेकिन वह अपने बयानों से पलट गए।

अगस्त 2017 में जब साध्वी यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को सजा हुई, तो खट्टा सिंह ने दोबारा अपनी गवाही देने के लिए अपील की और उनकी गवाही हुई।

2 जनवरी 2019 को इस मामले की आखिरकार सुनवाई पूरी हुई और कोर्ट ने राम रहीम समेत कुलदीप, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को 11 जनवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए आदेश दिए थे और सभी आरोपियों ोक दोषी करार दिया गया था।

आज 17 जनवरी को सभी दोषियों को सजा सुनाई गई है।

 

 

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