तीन वरिष्ठ पत्रकारों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट सख्त, पूर्व डीजीपी संधू समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस

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Sahab Ram, Yuva Haryana
Chandigarh, 28 March, 2019

फरीदाबाद में तीन पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और गिरफ्तारी के मामले में अब हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। इस मामले में पीड़ित पत्रकारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसके बाद अब कोर्ट ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी बीएस संधू, हिसार रेंज के आईजी अमिताभ सिंह ढिल्लों और विजिलेंस एसपी सुखबीर सिंह व कई अन्य पुलिस अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर 23 मई तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

इस मामले में पीड़ित पत्रकार संजय कपूर ने बताया कि 15 अप्रैल, 2018 को उन्होने अपने ऑनलाइन वेब पॉर्टल पर एक विधायक और एक नेत्री के मामले में बिना किसी का नाम लिखे खबर प्रकाशित की थी। यह खबर अन्य ऑनलाइन वेब न्यूज पोर्टलों पर भी छपी थी जिसके बाद एक महिला नेत्री ने पुलिस को शिकायत दी कर दी थी और पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते 16 अप्रैल 2018 वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा, संजय कपूर और नवीन गुप्ता के खिलाफ आईटी एक्ट 67A, 354D व 499 की धारा के तहत मामला दर्ज कर लिया था।

संजय कपूर ने बताया कि इस घटनाक्रम के बाद हम तीनों पत्रकारों को हिमाचल प्रदेश के ऊना से अवैध तौर पर गिरफ्तार कर लिया था। जबकि तीनों ही पत्रकार किसी धार्मिक स्थल पर जा रहे थे, जिसके बाद पत्रकार नवीन धमीजा के पिता की इस सदमे से मौत भी हो गई थी।

हरियाणा पुलिस द्वारा यह सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन था। तीनों पीड़ित पत्रकारों ने इस बर्बर कार्यवाही के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की शरण ली।
हाईकोर्ट की माननीय न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता एस.एस. बरार, पवन सांखला एवं ललित सांखला ने पेश होकर उक्त मामले में तीनों पत्रकारों का पक्ष रखा।

अब अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा के तत्कालीन डीजीपी बी.एस. संधू, फरीदाबाद के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर अमिताभ ढिल्लो ( वर्तमान आई.जी. हिसार), तत्कालीन डीसीपी क्राईम सुखबीर सिंह पहलवान ( मौजूदा एसपी विजिलेंस गुरूग्राम), फरीदाबाद के तत्कालीन क्राईम ब्रांच सैक्टर 30 प्रभारी इंस्पेक्टर संदीप मोर सहित गिरफ्तारी टीम में शामिल रहे सब-इंस्पेक्टर रविन्द्र सिंह, एएसआई अनूप तथा हवलदार राजीव नामक पुलिस कर्मचारियों को व्यक्तिगत नोटिस जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी पुलिस अधिकारियों से 23 मई, 2019 तक जवाब मांगा है कि क्यों ना तुम्हारे खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना करने की कार्रवाई की जाए।

 

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