लंदन के किंग्समीड स्कूल में विश्वस्तरीय पढ़ाई का अनुभव ले रहे कैथल से गए स्कूली बच्चे

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कैथल के इंडस पब्लिक स्कूल के दस बच्चों का दल इन दिनों ब्रिटेन के शैक्षणिक भ्रमण पर हैं। एक विशेष कार्यक्रम के तहत लंदन पहुंचे इन बच्चों का मुख्य मकसद वहां स्थित ऐतिहासिक महत्व वाले किंग्समीड स्कूल के बच्चों और अध्यापकों के साथ वक्त बिताना है। इसके अलावा ये बच्चे लंदन, मैनचेस्टर, लिवरपूल आदि शहरों का भी शैक्षणिक दौरा कर रहे हैं।

इंडस पब्लिक स्कूल के ये बच्चे प्रिंसिपल तनु पुनिया के साथ वहां गए हैं। किंग्समीड स्कूल इंग्लैड के वरल में स्थित है और 1904 में स्थापित हुआ था। यह वहां के सबसे पुराने स्कूलों में से एक है। लगभग 115 साल पुरानी विरासत वाले इस स्कूल के हॉस्टल में ही इन बच्चों का पड़ाव है और ये वहां के बच्चों के साथ ही सुबह से शाम तक की दिनचर्या का अनुभव ले रहे हैं। इन बच्चों को ब्रिटेन की आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, वहां उपलब्ध रोजगार के नए आयाम और स्थानीय संस्कृति से वाकिफ करवाया जा रहा है।

इन बच्चों को नजदीकी शहरों के अलावा वेल्स क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों की झलक भी दिखाई गई। बच्चों के साथ गई प्रिंसिपल तनु पुनिया भी लगातार वहां के शिक्षाविदों से रुबरु हो रही हैं। तनु पुनिया का कहना है कि इंग्लैड की शिक्षा व्यवस्था में अध्यापक और छात्रों के बीच रिश्ता काफी मजबूत है और अध्यापकों को बच्चों की कमजोरियों, खूबियों व प्रगति के बारे में बहुत अच्छे से पता रहता है। उन्हें पता रहता है कि फ्लां बच्चे ने पिछले या उससे पिछले साल कैसा काम किया था। तनु पुनिया का कहना है कि कक्षा में ज्यादा बच्चे होने की वजह से भारत में ऐसा कम हो पाता है।

किंग्समीड स्कूल के अध्यापक भी हरियाणा से गए बच्चों से प्रभावित दिखे। उनका कहना था कि भ्रमण पर आए बच्चों में सीखने की लग्न है और वे एक दूसरे का सहयोग भी अच्छे से करते हैं। तनु पूनिया ने किंग्समीड स्कूल के हैडटीचर मार्क गिब्बन्स से भी मुलाकात की और उनसे अपने अनुभव सांझा किए।

भारतीयों बच्चों को ब्रिटेन के एजुकेशन टूर पर ले जाने का यह प्रयास वहां बसे एनआरआई सज्जन देसवाल के प्रयासों से संभव हुआ है। सज्जन देसवाल का मानना है कि युवाओं को देश-दुनिया का एक्सपोजर बहुत फायदा पहुंचाता है और इससे उनका मानसिक विकास वैश्विक स्तर की सोच के साथ होता है। इस तरह के शैक्षणिक भ्रमण से बच्चों के लिए उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना भी आसान हो जाता है। सज्जन देसवाल का प्रयास है कि हरियाणा के विभिन्न स्कूलों के ज्यादा से ज्यादा बच्चे इसी तरह विदेशी दौरों पर जाएं और विश्व स्तर की शिक्षा व्यवस्था से रूबरू हों।

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