हरियाणा का हर स्कूल होगा चकाचक, सुधार में जुटा विभाग

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Yuva Haryana, Ambala

हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवरपाल ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अगले चार माह में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चारदीवारी, शौचालय, रंग-रोगन ,स्कूल जाने का कच्चा रास्ता पक्का करने जैसे कई मूलभूत कार्य प्राथमिकता के आधार पर किए जांएगे। शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बिल्ंिडग प्राईवेट स्कूलों से बेहतर है और आगामी दो वर्षो में हरियाणा में किसी भी स्कूल में टीचरों की कमी नहीं रहने दी जाएगी। जिन सरकारी स्कूलों की बिल्ंिडग में अगर कहीं कोई कमी हैं तो उसे दुरूस्त करने का काम किया जाएगा। बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर इनफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध हो इसके लिए 207 करोड़ रूपए का टेंडर भी किया गया है।

एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि दिल्ली से बेहतर हरियाणा के स्कूल हैं। दिल्ली सरकार के अधीन मात्र 119 स्कूल हैं। जबकि बाकि एमसीडी के अंतर्गत हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 14 हजार से ज्यादा स्कूल हैं तथा इन स्कूलों की बिल्ंिडग भी बेहतर है। उन्होंने यह भी बताया कि जिला स्तर पर स्थापित मॉडल संस्कृति स्कूल की तर्ज पर ब्लाक स्तर (119) पर यह स्कूल खोलें जाएगें। उन्होंने यह भी कहा कि बजट सत्र में शिक्षा के लिए अधिक से अधिक फंड सरकार द्वारा मिलेगा, ऐसी उन्हें आशा है।

शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि स्मार्ट वर्चूअल क्लास रूम बनाने पर विचार किया जा रहा है, इसकी शुरूआत 12वीं कक्षा से होगी, बाद में इसे 10वीं में भी शुरू किया जाएगा। नियम 134 ए के विषय पर पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने बताया कि इसके तहत 700 रूपए की राशि संबधित स्कूल को प्रति बच्चा प्राइवेट स्कूल को दिए जाते हैं। जिन प्राइवेट स्कूलों को यह राशि नहीं मिली है उन्हें जल्द ही जारी कर दी जाएगी।

वन एवं शिक्षा मंंत्री श्री कंवर पाल ने कहा कि पर्यावरण सरंक्षण के लिए वे पेड़ ज्यादा लगाए जाएगें जो अधिक हरियाली देते है व जिन पेड़ों पर पक्षी घोंसला बना सकते है व ऐसे पेड़ जिन पर फल लगते है उन्हें अधिक लगाया जाएगा। ऐसे पेड़ जिनकी समय अवधि एवं आयु लंबी होती है वो अधिक संख्या में लगाएं जाएंगे। उन्होंने बताया कि आम ऐसा पेड़ है जिसकी समय अवधि ज्यादा होती है तथा इसको लगाकर पंचायते अपनी आमदन भी बढ़ा सकती हैं। उन्होंने कहा कि पहले सफेदे एवं पॉपुलर के पेड़ लगाकर विभाग पंचायत को देती थी और ये पेड़ मात्र 3 वर्ष में तैयार हो जाते थे। अब पंचायत व किसानों से सम्पर्क करके आम आदि के पेड़ों को लगाया जाएगा जिससे पंचायतों की आमदन में भी बढ़ोतरी होगी। इस विषय को लेकर कई पंचायते उनसे मिल भी चुकी हैं।

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