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कारगिल दिवस: आखिरी सांस तक शहीद वीरेंद्र सिंह ने किया था दुश्मनों का खातमा

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Yuva Haryana

Faridabad, 26 July 2019

देशभर में आज कारगिल विजय दिवस के 20 साल पूरे होने का जश्न मनाया जा रहा है। आम लोगों से लेकर सेना के जवानों तक हर कोई कारगिल के शहीदों को सलाम कर रहे है। 1999 में आज ही के दिन भारत के वीर सपूतों ने कारगिल की चोटियों से पाकिस्तानी फौज को खदेड़कर तिरंगा फहराया था। हालांकि इस जंग में हमने कई बहादुर जवान खोए। इन्ही में से एक थे। हरियाणा के फरीदाबाद जिले के शहीद वीरेंद्र सिंह।

महज 21 साल की उम्र में देश के लिए बलिदान देने वाले वीरेंद्र सिंह युवाओं के लिए हमेशा ही प्रेरणा स्रोत रहेंगे। फरीदाबाद के गांव मोहना निवासी शहीद वीरेंद्र सिंह अक्तूबर 1998 में फौज में भर्ती हो गए थे। उन्हें जाट रेजिमेंट मिली थी। उनकी ट्रेनिंग के अभी कुछ ही माह हुए थे कि तभी कारगिल युद्ध छिड़ गया। सिपाही वीरेंद्र सिंह जब कारगिल की लड़ाई के लिए गए तो उनकी तैनाती मस्को घाटी में थी। आदेश मिलने पर 25 जवानों की टुकड़ी ने 5 जुलाई की रात 8 बजे पहाड़ी पर चढ़ाई शुरू कर दी

इसी बीच पहाड़ पर मौजूद पाकिस्तानी आतंकवादियों ने भारतीय सैनिकों पर गोलियां बरसानी शुरु की। इसी दौरान एक गोली वीरेंद्र सिंह के पैर पर लगी। लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने हार नहीं मानी। वह आखरी सांस तक पाकिस्तानी आतंकियों पर गोलियां बरसाते रहे। उन्होंने कई आतंकियों का खातमा किया तभी अचानक उनके पास एक गोला आकर गिरा, जिसकी चपेट में आकर वीरेंद्र शहीद हो गए।

 

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