हैदराबाद में मिली हरियाणा और तेलंगाना की संस्कृति, कविताओं के जरिये हुआ विचारों का आदान-प्रदान

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हरियाणा साहित्य अकादमी निदेशक डॉ० कुमुद बंसल ने कहा कि भारतीय संस्कृति की अस्मिता बनाए रखने के लिए प्रधानमंत्री की ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ योजना एक वरदान है, जो देश में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक नवचेतना जागृत करेगी।
उन्होंने ये विचार ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के योजना के अंतर्गत हैदराबाद में आयोजित तेलंगाना एवं हरियाणा के साहित्यिक एवं सांस्कृति आदान-प्रदान कार्यक्रम के दौरान आयोजित कवि सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किये।
डॉ० कुमुद बंसल ने कहा कि मुख्यमंत्री एवं हरियाणा साहित्य अकादमी के अध्यक्ष मनोहर लाल के मार्गदर्शन में हरियाणा साहित्य अकादमी प्रगति के पथ पर निरन्तर अग्रसर है और उसी का परिणाम है कि साहित्यकारों एवं कवियों का एक दल तेलंगाना राज्य की राजधानी हैदराबाद में पहुंचा है। उन्होंने दो दिवसीय संयुक्त कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए तेलंगाना सरकार तथा पर्यटन विभाग के उच्चाधिकारियों के प्रति आभार प्रकट किया।

‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के अंतर्गत सांस्कृतिक एवं साहित्यिक आदान-प्रदान विभिन्न राज्यों में चल रहा है।
कुमुद बंसल ने कहा, ‘‘हरियाणा भारत की प्राचीन संस्कृति की उद्गम स्थली कहा जाता है। वीर-भूमि हरियाणा एक ऐसा राज्य है जो एक ओर देश के लिए अन्न देता है वहीं देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सर्वाधिक जवान भी भारतीय सेना को देता है। इतिहास साक्षी है जब भी भारत पर युद्ध थोपा गया उसमें हरियाणा के जवानों के सबसे अधिक बलिदान की अमर गाथा से पूरा विश्व परिचित है।’’
कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वयोवृद्ध समालोचक डॉ. पुष्पा बंसल ने की। डॉ. पुष्पा बसंल ने हरियाणा के महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय, रोहतक के हिन्दी विभाग में अपनी सेवाएं प्रदान की। उन्होंने हरियाणा एवं तेलंगाना के समृद्ध साहित्यिक परिदृश्य को रेखांकित किया।
हरियाणा से पधारे डॉ. अशोक बत्रा ने रचना पाठ करते हुए कहा-
तिरंगे का श्वेत रंग बोला-
‘‘ मैं मां के वक्ष से झरता दूधिया वात्सल्य हूं
जिसकी गोदी की गरमाहट में
सारे रंग पिघलकर श्वेत हो जाते हैं
फिर चाहे हरियाणा हो या तेलंगाना
इसके सारे बेटे मिलकर एक हो जाते हें।
दिल्ली से पधारे वरिष्ठ कवि श्री महेन्द्र शर्मा का अंदाजे-बयां
मन के उपवन को महकाएं तो कुछ बात बने
अधरों पर मुस्कान सजाएं तो कुछ बात बने
खुद की खातिर खुशियों के सामान जुटा लें, पर
औरों के घर खुशियां लाए तो कुछ बात बने।’’

बहादुरगढ़ से पधारे कवि कृष्ण गोपाल विद्यार्थी ने कहा-
‘‘तेलंगाना तेलंगाना है हरियाणा-हरियाणा,
दोनों में कितनी समानता है दुनिया ने पहचाना।
भाव-भंगिमा अलग है, बेशक भाषा में भी अंतर है,
भाता है मन के सितार पर दोनों का मिलकर दोगाना।’’
झज्जर से पधारे हास्य कवि मास्टर महेन्द्र ने हरियाणा की संस्कृति को रेखांकित करते हुए कहा-
‘‘मेरी दादी का घाघरा
मां की सन्दूक मैं धर्या सै।
दादी नै मरी नै बारह साल हो लिए
घाघरा आज तक नही मरा सै।।’’

पंचकूला से पधारी डॉ. सुनीता नैन ने हरियाणवी लोक गीत की मनमोहक प्रस्तुति दी। स्थानीय कवि सरदार असर ने अपने गज़़लों से सभागार में उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके गज़़लों की कुछ पंक्तियां-
‘‘उनसे मिलने जब गये, दिल में सुभा पहले से था,
उनका एक आशिक वहां बैठा हुआ पहले से था।
एक दो अशआर सर्फा किया मैंने असर,
शायरों में इस तरह का सिलसिला पहले से था। ’’

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