एक ही गौत्र के लडके-लडक़ी का विवाह करना विज्ञान और धर्म के अनुसार सही नहीं- चौगामा खाप

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Indervesh Duhan, Yuva Haryana

Bhiwani (28 March 2018)

सुप्रीम कोर्ट द्वारा खाप पंचायतों को लेकर जो गाईडलाईन तैयार की गई है उसके तहत खाप पंचायतें आपसी सहमति से शादी करने वाले व्यस्कों पर कोई रोक नहीं लगा सकता। ऐसे में शादीशुदा जोड़ों को खाप पंचायतों द्वारा शादी तोडऩे के मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों के हस्तक्षेप को गैर कानूनी बताया है।

इस मामले में चौगामा खाप के प्रधान रामकिशन हालुवासियां ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते है और अपील करते हैं कि अलग-अलग गौत्र में शादी की परम्परा सनातन धर्म में युगों-युगों से चली आ रही है। इसका अपना एक आधार रहा है। एक ही गौत्र के फैसले से आपसी भाईचारा खराब होगा। आसपास में तनाव बढ़ेगा और सौहार्द का जो वातावरण वह खराब होगा।

खाप प्रधान ने कहा कि एक गौत्र में शादी करने का यह नुकसान है कि यदि एक व्यक्ति के वंशानुगत बीमारी से बचने के लिए एक गौत्र के लडक़े और लडकी का विवाह अन्य गौत्र में किया जाता है। यह विज्ञान के अनुसार भी सही है। समाज का ताना-बाना बिगडऩे का कार्य होना निश्चित है और इससे हमारी संस्कृती भी खत्म हो सकती। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पश्चिमी सभ्यता को बढ़ावा मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में एक बार फिर से पुन:विचार करे तो समाज में भाईचारा बना रहेगा।

खाप ने कहा कि एक गौत्र में तो लडक़े-लडक़ी भाई बहन के समान होते है। परन्तु इस निर्णय से समाज के भाई-बहन के नाते पर बुरा असर देखने को मिलेगा, जोकि सामाजिक दृष्टि से बहुत ही अनुचित कार्य है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर अन्य खाप प्रतिनिधियों से बातचीत करके पुर्नविचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में डालेंगे।

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